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शिल्प, स्वाद के संगम संग लोकरंगों से सजा शिल्पहाट
Thu, 02 Dec 2021 01:49 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 02 Dec 2021 01:49 AM IST
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shilp mela
- फोटो : prayagraj
पूरे दो वर्षों बाद एक बार फिर शिल्प, स्वाद के संगम के साथ बारह दिनी राष्ट्रीय शिल्प मेला बुधवार से सांस्कृतिक केंद्र के शिल्प हाट में आरंभ हुआ तो मुक्ताकाशी मंच पर लोकरंगों की खुशबू बही, महकी। गणेश वंदना ‘हे परमेश्वर गौरी नंदन’ से शुुरुआत के बाद भजन गायिका अंकिता चतुर्वेदी ने भजन रसराज बृज बिहारी, प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे, रामचंद्र कृपालु भजमन की प्रस्तुतियों ने पूरे पंडाल को भक्तिमय रंग से सराबोर किया। फिर सूफी गीत छाप तिलक सब छीनी सुनाकर श्रोताओं, दर्शकों की वाहवाही बटोरी। नेहा सिंह तथा दल ने आल्हा गायन प्रस्तुत किया।
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- फोटो : prayagraj
लोकनृत्यों की शृंखला में त्रिपुरा की पंचाली देव बर्मा तथा दल ने ममिता एवं लबांग बोमानी लोकनृत्य से समां बांधा, फिर छिंदवाड़ा के विजय कुमार बंदेवार एवं दल ने जनजातीय नृत्यों शैला एवं गैंड़ी, बुंदेलखण्ड के राम सहाय पांडेय व दल ने शृंगार प्रधान नृत्य ‘राई’ के तहत ‘गोकुल वाले सांवरिया, ले चल अपनी नागरिया’ से दर्शकों को मुग्ध किया।
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- फोटो : prayagraj
हरियाणा के फाग लोकनृत्य की प्रस्तुति में देवर और भाभी की नोकझोंक दिखी तो होली की ठसक भरी मस्ती भी। बरसाने की लठमार होली, फूलों की होली भी आनंदित करती रही। शिल्प मेेले में देश के विभिन्न प्रांतों के व्यंजनों की खुशबुओं का भी संगम हुआ।
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आरंभ में बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त संजय गोयल ने गणपति की मूर्ति पर माल्यार्पण तथा नारियल फोड़ने के बाद मंच पर दीप जलाकर उद्घाटन किया। उन्होंने मेले के तमाम स्टाल देखने के बाद शिल्पियों की सराहना की। सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा ने पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्र भेंटकर उनका स्वागत और अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया।