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शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह को प्रयागराज में चौराहा तक नसीब नहीं

Tue, 23 Mar 2021 12:35 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 23 Mar 2021 12:35 AM IST
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Shaheed-e-Azam Sardar Bhagat Singh has no luck in the crossing in Prayagraj
भगत सिंह - फोटो : social media
भारत माता की आजादी के लिए फांसी का फंदा चूमकर जान की बाजी लगाने वाले शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की प्रतिमा लगाने की आवाज कागजों में दब कर रह गई है। ये हाल तब है, जब आजाद पार्क में विक्टोरिया टॉवर की जगह शहीद-ए-आदम की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव विधान सभा में वर्षों पहले पारित किया जा चुका है। इसी तरह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केपीयूसी हॉस्टल के सामने चौराहे पर भी शहीद-ए-आजम की प्रतिमा लगाने की गुहार अब तक नहीं सुनी जा सकी है।  
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चंद्रशेखर आजाद पार्क में मंगलवार को शहीद-ए-आजम के शहादत दिवस पर एक बार फिर देश की आन, बान और शान की खातिर उनके शौर्य का बखान किया जाएगा। इस दौरान विक्टोरिया टॉवर पर उनकी प्रतिमा लगाने का मुद्दा भी फिर से उठाने की तैयारी है। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद एवं शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह स्मारक समिति की ओर से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, सांसद केशरी देवी पटेल,  सांसद रीता बहुगुणा जोशी को इसके लिए हाल में ही पत्र भेजा गया है।
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विक्टोरिया टॉवर पर शहीद-ए-आजम की प्रतिमा स्थपित कराने के लिए संघर्ष की शुरुआत लंबे समय से की जा रही है। वर्ष 2006 में स्वतंत्रता सेनानी संघ, भगत सिंह स्मारक समिति और सोशलिस्ट फ्रंट ने साझा तौर पर अभियान चलाकर विक्टोरिया टॉवर पर प्रतिमा लगाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। दो वर्ष बाद 27 फरवरी 2008 को विधान सभा में शहर उत्तरी के विधायक रहे अनुग्रह नारायण सिंह इस प्रस्ताव को उठाया था और इसे पारित पारित कर दिया गया था। लेकिन, अब तक शहीद-ए-आजम की सुध नहीं ली जा सकी और उन्हें शहर में विक्टोरिया टॉवर तो क्या कोई चौराहा तक नसीब नहीं हो सका। 
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विस में प्रस्ताव पारित होने के बाद जब प्रतिमा लगाने की बारी आई तब पुरातत्व विभाग ने यह कहते हुए अड़ंगा लगा दिया कि विक्टोरिया टॉवर ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित हैं। वहां प्रतिमा लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद पार्क में ही आजाद की प्रतिमा के पास या दूसरी जगह पर शहीद-ए-आजम की प्रतिमा लगाने की पहल की गई, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हो सका।
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