Mahakumbh : संगम नाव हादसे में बचाए गए दूसरे श्रद्धालु की भी मौत, दो लोग 72 घंटे बाद भी लापता
संगम में तीन दिन पहले नाव पलटने में बचाए गए दूसरे श्रद्धालु की भी मौत हो गई। देहरादून निवासी बृजलाल प्रसाद(65) को एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। हादसे में डूबे दो लोगों का 72 घंटे बाद भी पता नहीं चल पाया। अब सर्च ऑपरेशन भी थम गया है।
विस्तार
संगम में तीन दिन पहले नाव पलटने में बचाए गए दूसरे श्रद्धालु की भी मौत हो गई। देहरादून निवासी बृजलाल प्रसाद(65) को एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। हादसे में डूबे दो लोगों का 72 घंटे बाद भी पता नहीं चल पाया। अब सर्च ऑपरेशन भी थम गया है।
11 फरवरी को दोपहर 3:00 बजे के करीब हुए इस हादसे में नौ लोग नदी में डूबे थे। इनमें से सात को बचा लिया गया था, जबकि दो नदी में डूब गए थे। बचाए गए लोगों में गंभीर हाल में जीएमएस रोड मोहित विहार निवासी महावीर प्रसाद (65) व उनके ममेरे भाई बृजलाल को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इनमें से महावीर की बुधवार रात 8:00 बजे के करीब मौत हो गई थी। उधर बृजलाल की हालत भी लगातार बिगड़ती चली जा रही थी। बृहस्पतिवार दोपहर बाद परिजन एयरलिफ्ट कर उन्हें दिल्ली ले गए। हालांकि वहां इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी सांसें थम गईं। रिश्तेदार रामगोपाल मित्तल ने बताया कि महावीर प्रसाद का शव लेकर शुक्रवार भोर में परिजन देहरादून पहुंचे। जबकि बृजलाल प्रसााद का शव दोपहर बाद दिल्ली से लाया गया। देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार लक्खीबाग श्मशान घाट पर किया गया।
मृतक की पत्नी व एक अन्य फुफुेरे भाई हैं लापता
इस हादसे में संगम में डूबे जो दो लोग लापता हैं, उनमें मृतक बृजलाल की पत्नी ललिता देवी(60) व उनके फुफेरे भाई सुरेश चंद्र (65) शामिल हैं। 72 घंटे बीतने के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल पाया है। शुक्रवार को सर्च ऑपरेशन भी नहीं चला। ललिता देवी के भाई रामगोपाल मित्तल का आरोप है कि लापता दोनों लोगों को खोजने में गंभीरता से प्रयास नहीं किए गए। हादसे के अगले दिन कुछ देर तक तलाश के बाद जल पुलिस के लोग स्नान पर्व होने की बात कहकर शांत बैठ गए। शुक्रवार को उन्होंने जल पुलिस सीओ रजनीश यादव से फिर निवेदन किया तो वह यही कहते रहे कि प्रयास जारी है।
महज हादसा नहीं, व्यवस्था पर सवाल
संगम में हुई यह घटना महज हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल भी है। हादसा संगम में हुआ, जो स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील स्थान है। अफसर दावे करते नहीं थक रहे थे कि यहां ही नहीं बल्कि मेला क्षेत्र के सभी स्नान घाटों पर जल में सुरक्षा के पुख्ता, हाईटेक और अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। इसके बावजूद दो लोगों का डूब जाना और फिर 72 घंटे तक उनका कुछ पता नहीं चलना दावों पर सवाल खड़े करता है।
50 से ज्यादा जवान, प्राइवेट गोताखोर भी पर सब नाकाम
जल पुलिस प्रभारी जनार्दन साहनी का कहना है कि बताया कि मौके पर जल पुलिस के 20 जवान तैनात थे। 100 मीटर की दूरी पर जल पुलिस कंट्रोल रूम भी है। एनडीआरएफ इंस्पेक्टर अनिल कुमार कहते हैं कि संगम में उनकी 10 से ज्यादा नावें तैनात हैं और हर नाव पर दो-तीन जवान मुस्तैद रहते हैं। प्राइवेट गोताखोर भी लगाए गए हैं। दोनों प्रभारियों ने दावा किया कि जवानों ने अपनी ओर से पूरा प्रयास किया। लेकिन दो लोग नहीं बचाए जा सके। उनकी तलाश में 36 घंटे सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया।
परिजनों को साथ लेकर दो दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया और वह प्रयासों से संतुष्ट हैं। पानी के भीतर नीचे की ओर भी बहाव बहुत तेज है। जवानों की ओर से हरसंभव कोशिश की गई। फिलहाल लापता दोनों लोगों का कुछ पता नहीं चल पाया है। शुक्रवार को हवा बहुत तेज है, इसलिए तलाश नहीं कराई जा सकी। - रजनीश यादव, सीओ जल पुलिस
ऐसे हुआ था हादसा
देहरादून के छह और बंगलूरू के तीन श्रद्धालु मंगलवार दोपहर स्नान करने अरैल से संगम पर पहुंचे थे। स्नान करने के बाद सभी वापसी के लिए नाव पर चढ़ने लगे और इसी दौरान एक तरफ भार ज्यादा हो जाने के कारण नाव पलट गई। इससे उसमें सवार श्रद्धालु संगम में गिर गए और डूबने लगे। इनमें से बंगलूरू के तीन और देहरादून के चार श्रद्धालुओं को बचा लिया गया। जबकि, दो लापता हो गए थे।