फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Second delivery in four days on the road

चार दिन में सड़क पर दूसरा प्रसव

Wed, 17 Aug 2016 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 17 Aug 2016 02:15 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर अपनी पीठ थपथपा रही हैं और संवेदनहीन डॉक्टर्स एवं अस्पतालों में तैनात कर्मचारी मरीजों को मरने के लिए छोड़ दे रहे हैं। बहादुर ब्लॉक के सीएचसी कोटवा बनी से गर्भवती महिलाओं को भगाए जाने के कारण वहां चार दिनों में दूसरी बार सड़क पर प्रसव का मामला सामने आया है। डीएम संजय कुमार ने जांच का आदेश दिया है। 24 घंटे में जांच रिपोर्ट तलब की गई है। दोषी डॉक्टर्स एवं कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


सीहीपुर गांव में रहने वाली गर्भवती महिला खुशबू को 15 अगस्त को अचानक दर्द उठा। पति रघु अपनी पत्नी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोटवा बनी पहुंचा। खुशबू को देखकर डॉक्टरों ने कहा कि इसे यहां लाने की कोई जरूरत नहीं थी। अभी डिलेवरी का वक्त नहीं आया है। खुशबू के पेट का दर्द बढ़ता जा रहा था। आरोप है कि डॉक्टरों ने उसका इलाज करने के बजाय सीएचसी से भगा दिया। सीएचसी से बाहर आकर कुछ दूरी तय करने के बाद खुशबू सड़क पर ही गिर पड़ी। आसपास की महिलाएं खुशबू के पास पहुंचीं और उसे चारों ओर से घेर लिया। पास खड़े ट्रैक्टर की आड़ में महिलाओं ने उसका प्रसव कराया। इसके बाद वहां हंगामा शुरू हो गया। सूचना मिलने पर डीएम ने एसडीएम फूलपुर विकास कुमार सिंह को मौके पर भेजा। एसडीएम ने महिला को सीएचसी में भर्ती कराया। इलाज मिलने के बाद खुशबू की हालत सामान्य हुई।
विज्ञापन


डीएम संजय कुमार ने एसडीएम को जांच अधिकारी नामित करते हुए डीएम ने 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है ताकि दोषी डॉक्टर्स और कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा सके। डीएम ने सीएमओ को निर्देश दिए हैं कि सीएचएसी एवं पीएचसी का नियमित रूप से निरीक्षण करें और गड़बड़ी पर संबंधित डॉक्टर्स एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई करें। डीएम ने यह चेतावनी भी दी है कि मामले में सीएमओ ने लापरवाही की तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि पांच दिन पहले 12 अगस्त को भी सीएचसी कोटवा बनी में ऐसी ही घटना हुई थी। फूलपुर तहसील के सुदनीपुर खुर्द गांव में रहने वाली गर्भवती महिला मीना को सीएचसी से यह कह कर वापस कर दिया गया था कि वहां इलाज संभव नहीं है, किसी दूसरे अस्पताल में जाएं। सरकारी एंबुलेंस से उसे वापस भेजा गया। एंबुलेंस वाला बीच रास्ते उसे और उसके पति को छोड़कर भाग गया। साथ ही 200 रुपये ले गया। सड़क पर ही मीना की डिलेवरी हो गई। इस घटना के बावजूद सीएचसी के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने कोई सबक नहीं लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed