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Prayagraj News: बिना परिचालक दौड़ते स्कूली वाहन, आरटीओ चलाएगा अभियान
Fri, 23 Oct 2026 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Fri, 23 Oct 2026 02:08 AM IST
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शहर की सड़कों पर कई स्कूली वाहन बिना परिचालक के दौड़ रहे हैं जिसकी वजह से हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नैनी, प्रयागपुरम की घटना में भी स्कूली वाहन में परिचालक का न होना पाया गया है। चालक ने बिना पीछे देखे गाड़ी बैक कर दी और एक मासूम बच्ची वाहन की चपेट में आ गई।
इस साल स्कूली वाहनों के खिलाफ चले अभियान में सरकार की तरफ से चालक के साथ परिचालक की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। छात्राओं के स्कूली वाहन में महिला परिचालक का होना भी अनिवार्य है।
आरटीओ की तरफ से चलाए गए अभियान में 15 विद्यालयों को महिला परिचालक न रखने पर नोटिस भी जारी किया जा चुका है। एक बार फिर से स्कूली वाहनों के खिलाफ आरटीओ की तरफ से अभियान चलाए जाने की तैयारी है।
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इंश्यारेंस हो चुका है समाप्त
स्कूली वाहन अशोक कुमार मिश्रा के नाम से आरटीओ में रजिस्टर्ड है। वाहन का परमिट विद्यालय के नाम से है। वाहन का इंश्योरेंस 29 नवंबर 2026 को समाप्त हो चुका है।
नैनी हादसे में स्कूली वाहन का परमिट विद्यालय के नाम से है। वाहन में परिचालक के न होने की बात सामने आई है। स्कूल प्रबंधन को इसके लिए नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। — एसपी सिंह, आरटीओ प्रवर्तन
बचाव के उपाय
1. स्कूली वाहन का इंतजार करते समय बच्चों को मुख्य सड़क व फुटपाथ के किनारे से कम से कम छह से 10 फीट (लगभग तीन से चार कदम) दूर खड़े होना चाहिए।
2. वाहन के पूरी तरह रुकने पर ही बच्चे को बस के पास या प्रवेश द्वार की तरफ बढ़ना चाहिए।
3. वाहन में चढ़ने के लिए बच्चों को धक्का-मुक्की करने व दौड़ने से मना किया जाना चाहिए।
4. बस में चढ़ते और उतरते समय बच्चों को सीढ़ियों पर संतुलन बनाने के लिए हत्थे का उपयोग करना चाहिए।
5 . 12 साल तक के बच्चों के स्कूल वाहन में परिचारक व परिचारिका का मौजूद रहना अनिवार्य है।
6. वाहन तभी आगे बढ़ाया जाना चाहिए, जब सभी बच्चे सुरक्षित रूप से उतर जाएं व चढ़कर अपनी-अपनी सीट पर बैठ जाएं।
7. यदि बच्चों को उतरकर सड़क पार करना हो तो उन्हें बस के कम से कम 10 फीट आगे चलकर सड़क पार करना चाहिए।
8. वाहन के ठीक आगे, किनारों और पीछे का हिस्सा डेंजर जोन माना जाता है, जहां ड्राइवर को बच्चे दिखाई नहीं देते। बच्चों को इस क्षेत्र में रुकने से मना करें।
9. सुनिश्चित करें कि बच्चों के स्कूल बैग के फीते, पानी की बोतल व कपड़ों की डोरियां वाहन के दरवाजे व हत्थे में न फंसे।
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इस साल स्कूली वाहनों के खिलाफ चले अभियान में सरकार की तरफ से चालक के साथ परिचालक की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। छात्राओं के स्कूली वाहन में महिला परिचालक का होना भी अनिवार्य है।
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आरटीओ की तरफ से चलाए गए अभियान में 15 विद्यालयों को महिला परिचालक न रखने पर नोटिस भी जारी किया जा चुका है। एक बार फिर से स्कूली वाहनों के खिलाफ आरटीओ की तरफ से अभियान चलाए जाने की तैयारी है।
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इंश्यारेंस हो चुका है समाप्त
स्कूली वाहन अशोक कुमार मिश्रा के नाम से आरटीओ में रजिस्टर्ड है। वाहन का परमिट विद्यालय के नाम से है। वाहन का इंश्योरेंस 29 नवंबर 2026 को समाप्त हो चुका है।
नैनी हादसे में स्कूली वाहन का परमिट विद्यालय के नाम से है। वाहन में परिचालक के न होने की बात सामने आई है। स्कूल प्रबंधन को इसके लिए नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। — एसपी सिंह, आरटीओ प्रवर्तन
बचाव के उपाय
1. स्कूली वाहन का इंतजार करते समय बच्चों को मुख्य सड़क व फुटपाथ के किनारे से कम से कम छह से 10 फीट (लगभग तीन से चार कदम) दूर खड़े होना चाहिए।
2. वाहन के पूरी तरह रुकने पर ही बच्चे को बस के पास या प्रवेश द्वार की तरफ बढ़ना चाहिए।
3. वाहन में चढ़ने के लिए बच्चों को धक्का-मुक्की करने व दौड़ने से मना किया जाना चाहिए।
4. बस में चढ़ते और उतरते समय बच्चों को सीढ़ियों पर संतुलन बनाने के लिए हत्थे का उपयोग करना चाहिए।
5 . 12 साल तक के बच्चों के स्कूल वाहन में परिचारक व परिचारिका का मौजूद रहना अनिवार्य है।
6. वाहन तभी आगे बढ़ाया जाना चाहिए, जब सभी बच्चे सुरक्षित रूप से उतर जाएं व चढ़कर अपनी-अपनी सीट पर बैठ जाएं।
7. यदि बच्चों को उतरकर सड़क पार करना हो तो उन्हें बस के कम से कम 10 फीट आगे चलकर सड़क पार करना चाहिए।
8. वाहन के ठीक आगे, किनारों और पीछे का हिस्सा डेंजर जोन माना जाता है, जहां ड्राइवर को बच्चे दिखाई नहीं देते। बच्चों को इस क्षेत्र में रुकने से मना करें।
9. सुनिश्चित करें कि बच्चों के स्कूल बैग के फीते, पानी की बोतल व कपड़ों की डोरियां वाहन के दरवाजे व हत्थे में न फंसे।