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UP: गंगा की तेज धार से बढ़ी मुसीबत, घाटों पर घुटने तक पहुंचा पानी; घाटों पर बालू भरीं बोरियां संग डाल रहे पुआल

Sat, 31 Jan 2026 11:30 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 31 Jan 2026 11:30 AM IST
सार

माघ मेले के पांचवें मुख्य स्नान पर्व पर गंगा की तेज धार से मुसीबत बढ़ गई है। घाटों पर घुटने तक पानी पहुंच गया है। घाटों पर बालू भरीं बोरियों के साथ पुआल डाल रहे हैं। साफ-सफाई पर जोर है। 

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Rising water levels in Ganges river have increased difficulties water has reached knee-deep on ghats prayagraj
माघ मेला के दौरान संगम तट पर स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रयागराज में माघ मेले के पांचवें मुख्य स्नान पर्व पर भी गंगा की तेज धार मुसीबत का कारण बनी है। नागवासुकि से संगम नोज तक कई स्थान ऐसे हैं जो कटान की वजह से खतरे का कारण बने हैं। प्रशासन ने बल्लियों की बैरिकेडिंग लगाकर ऐसे घाटों पर स्नान बंद करा दिया है।
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वहीं, दशाश्वमेध समेत जिन घाटों पर स्नान कराया जा रहा है, वहां सुरक्षा के दृष्टिकोण से डीप वाटर बैरिकेडिंग कर जल पुलिस की तैनाती की गई है। घाटों पर श्रद्धालु घुटने तक के पानी में डुबकी लगा रहे हैं।
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मेलाधिकारी ऋषिराज और एसपी मेला नीरज पांडेय ने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ स्नान घाटों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर मुस्तैद रहने का निर्देश दिया। प्रशासन का अनुमान है कि पूर्णिमा पर 70 लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। धूप तेज होने पर यह आंकड़ा एक करोड़ के पार भी जा सकता है।
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उधर, मेला प्रशासन का साफ-सफाई पर जोर है। चेंजिंग रूम की भी सफाई कराई जा रही है। घाटों पर बालू भरीं उन सफेद बोरियों को बदलवाया जा रहा है जो फट गई हैं। घाटों पर पुआल भी डाला जा रहा है। पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया गया है कि श्रद्धालु स्नान के बाद तुरंत घाट छोड़ने के लिए कहें।

 
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माघ पूर्णिमा की पुण्य डुबकी के साथ कल्पवासियों की होगी घर वापसी
पौष पूर्णिमा से शुरू कल्पवास रविवार को माघी पूर्णिमा पर पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही पूरा होगा। एक माह तक तंबुओं की नगरी में बसे कल्पवासी पुण्य की गठरी समेट और संगम की रेती लेकर अपने-अपने घरों को रवाना हो जाएंगे। इससे पहले शिविर-शिविर भंडारा होगा। कल्पवासी संकल्प के मुताबिक पूजन-अर्चन कर दान करेंगे।

एक फरवरी को माघी पूर्णिमा स्नान के साथ ही कल्पवासियों की घर वापसी शुरू हो जाएगी। प्रशासन का भी इस बात पर जोर है कि कल्पवासियों के साथ स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षित घर वापसी हो।

मेला प्राधिकरण की बैठक में अधिकारियों ने मेला क्षेत्र से कल्पवासियों को बाहर निकलने के लिए एकल मार्ग की दिशा दी जाएगी। साथ ही शुक्रवार को उनके वाहन मेला क्षेत्र के शिविरों तक ले जाने की व्यवस्था की गई, जिससे रविवार या सोमवार को वह सामान लेकर घर जा सकें।
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