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High Court : बीएचयू की सेवाओं से नर्सिंग अधिकारी को करें मुक्त, एम्स पटना में ज्वाइन करने के लिए याची स्वतंत्र

Fri, 07 Jun 2024 11:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 07 Jun 2024 11:19 AM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने नर्सिंग अधिकारी नितिन कुमार की ओर से कार्यमुक्त किए जाने की मांग वाली याचिका पर दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बीएचयू की ओर से बकाया भुगतान की मांग पर 25 जून 2024 को या उससे पहले याची अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करेगा।

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Release nursing officer from the services of BHU, petitioner free to join AIIMS Patna
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बीएचयू की सेवाओं से नर्सिंग अधिकारी को तत्काल मुक्त किया जाए। साथ ही वह एम्स पटना की सेवाओं में शामिल होने के लिए स्वतंत्र हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने नर्सिंग अधिकारी नितिन कुमार की ओर से कार्यमुक्त किए जाने की मांग वाली याचिका पर दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बीएचयू की ओर से बकाया भुगतान की मांग पर 25 जून 2024 को या उससे पहले याची अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करेगा।

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याची को सुनने के बाद बीएचयू के अधिकारी बकाया का निर्धारण कर आदेश पारित करेंगे। इसके बाद बकाया भुगतान का अंतिम रूप से निर्धारण होने के बाद याची को भुगतान के लिए एक महीने का समय होगा।याची सर सुंदरलाल अस्पताल, बीएचयू में नर्सिंग अधिकारी हैं। उन्होंने इस्तीफा दिया, लेकिन उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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इस पर कोर्ट ने याची के पक्ष में फैसला दिया। वहीं, बीएचयू ने आदेश का पालन करते हुए कहा कि बकाया भुगतान करने पर ही कार्यमुक्त का आदेश लागू होगा। याची ने पुन: इस आदेश के विरुद्ध अवमानना का आवेदन दाखिल किया। याची ने बताया कि प्रतिवादी-बीएचयू उसे कार्यमुक्त नहीं कर रहा है, जबकि कोर्ट ने 30 मई 2024 को आदेश दिया था।

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15 जून 2024 तक एम्स पटना में उन्हें ज्वाइन करना है, लेकिन देरी होने पर नौकरी खोनी पड़ेगी। बीएचयू अंतिम क्षण में आश्चर्यजनक रूप से उन्हें 5,51,434 रुपये का बकाये का भुगतान करने के लिए कहा है। इतनी बड़ी रकम इकट्ठा करने में वक्त लग जाएगा। ऐसे में पटना एम्स ज्वाइन की तिथि बीत जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि 30 मई 2024 के आदेश का उल्लंघन करने के लिए बीएचयू छल-कपट और तीखे हथकंडों का सहारा ले रहा है। कोर्ट ने कहा कि बीएचयू का आचरण ठीक नहीं है। इससे पहले, बीएचयू याचिकाकर्ता का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। 30 मई 2024 के आदेश के अनुसार इसे स्वीकार किया, लेकिन एक चतुर चाल में बकाया भुगतान की मांग को लाकर याची को हराने का प्रयास किया।

मामूली साधनों वाला व्यक्ति अचानक इस मांग को पूरा नहीं कर पाएगा। कोर्ट ने कहा कि हम आदेश देते हैं कि याचिकाकर्ता को बीएचयू की सेवाओं से तत्काल मुक्त कर दिया जाए। साथ ही कहा कि याची एम्स, पटना की सेवाओं में शामिल होने के लिए स्वतंत्र होगा।

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