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रचनाकर्म संजीवनी, जो रचेगा वही बचेगा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 20 Dec 2015 01:59 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। राष्ट्रीय पुस्तक मेले में शनिवार को ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ कवि नंदल हितैषी, योगेंद्र मिश्रा और रेनूराज सिंह पाठकों से रूबरू हुई। रचना शैली और सरोकारों को साझा करते हुए नंदल हितैषी ने कहा, अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बात करना बहुत प्राकृतिक और व्यावहारिक होता है। जहां तक रचनाकर्म का सवाल है, मेरे लिए सक्रिय रचनात्मकता संजीवनी की तरह है।
आज तक जिसने भी कुछ रचा है वास्तव में वही बचा है। उन्होंने ईसा मसीह, बाढ़ समेत सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और धार्मिक सरोकारों से जुड़ी कई कविताएं पढ़ीं। उनके गीत फिर नदियां उतराईं होंगी, नीचे मछली थाह लगाई होगी खूब सराही गई। वहीं रचनाकार योगेंद्र मिश्रा ने कविताओं और कहानियों के पाठ से पाठकों से रिश्ता जोड़ा। कवयित्री रेनूराज सिंह ने समसामयिक कविताएं पढ़ीं। संचालन संजय पुरुषार्थी और धन्यवाद ज्ञापन आयोजक देवराज अरोरा ने किया।
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आज तक जिसने भी कुछ रचा है वास्तव में वही बचा है। उन्होंने ईसा मसीह, बाढ़ समेत सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और धार्मिक सरोकारों से जुड़ी कई कविताएं पढ़ीं। उनके गीत फिर नदियां उतराईं होंगी, नीचे मछली थाह लगाई होगी खूब सराही गई। वहीं रचनाकार योगेंद्र मिश्रा ने कविताओं और कहानियों के पाठ से पाठकों से रिश्ता जोड़ा। कवयित्री रेनूराज सिंह ने समसामयिक कविताएं पढ़ीं। संचालन संजय पुरुषार्थी और धन्यवाद ज्ञापन आयोजक देवराज अरोरा ने किया।
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