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Research : रमन सेंसर पलक झपकते ही कर लेगा कैंसरकारी आर्सेनिक की पहचान, इविवि के वैज्ञानिकों को मिली सफलता

Fri, 24 Jul 2026 07:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 Jul 2026 07:43 PM IST
सार

पानी में छिपे साइलेंट किलर कैंसरकारी आर्सेनिक की पहचान अब पलक झपकते हो जाएगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने एक शोध में रमन सेंसर विकसित कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

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Raman sensor to detect carcinogenic arsenic in the blink of an eye; scientists at Allahabad University achieve
पानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 

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पानी में छिपे साइलेंट किलर कैंसरकारी आर्सेनिक की पहचान अब पलक झपकते हो जाएगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने एक शोध में रमन सेंसर विकसित कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

यह सेंसर पानी में मौजूद आर्सेनिक की बेहद सूक्ष्म मात्रा की पहचान एक सेकंड से भी कम समय में कर लेगा। यह पोर्टेबल सेंसर प्रयोगशाला के बाहर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मौके पर ही पानी की जांच हो जाएगी। भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो.केएन उत्तम व उनकी टीम के इस शोध को टेलर फ्रांसिस के अंतरराष्ट्रीय जर्नल केमिकल फिजिक्स लेटर्स ने प्रकाशित करने के लिए चुन लिया है।

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प्रो.केएन उत्तम और उनकी टीम में शामिल वैज्ञानिक अपर्णा तिवारी, डॉ. आरती जायसवाल व डॉ. श्वेता शर्मा ने निनहाइड्रिन क्रियात्मक सिल्वर नैनोकण पर आधारित बहुत कम लागत वाला रमन सेंसर विकसित किया है। यह सेंसर पेयजल, भूजल और अन्य जलीय घोल में मौजूद विषैले आर्सेनिक की अत्यंत सूक्ष्म मात्रा का भी तेजी और सटीकता से पता लगाता है। इसके माध्यम से आर्सेनिक की सांद्रता का भी निर्धारण किया जा सकता है। 

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ऐसे तैयार हुआ सेंसर

वैज्ञानिकों ने सबसे पहले प्रयोगशाला में सिल्वर नाइट्रेट और निनहाइड्रिन के अलग-अलग जलीय विलयन (आसुत जल में) तैयार किए। इसके बाद दोनों विलयनों को मिलाकर आइस बाथ में लगातार घुमाया गया। मिश्रण में धीरे-धीरे सोडियम बोरोहाइड्राइड का विलयन बूंद-बूंद करके मिलाया गया। एक घंटे यह प्रक्रिया चलने के बाद भूरे रंग का निनहाइड्रिन-क्रियात्मक सिल्वर नैनोकणों का कोलॉयडल विलयन प्राप्त हुआ। विश्लेषण में लगभग 15 नैनोमीटर आकार के निनहाइड्रिन-क्रियात्मक सिल्वर नैनोकण बनने की पुष्टि हुई। इसी कोलॉयडल विलयन की सहायता से रमन सेंसर तैयार किया गया। आर्सेनिक मिश्रित पानी की जांच की गई, जिसमें एक सेकंड से भी कम समय में पानी में आर्सेनिक मिले होने की पुष्टि हुई।

क्या है रमन सेंसर

रमन सेंसर एक अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण है, जो रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर आधारित है। इसमें लेजर प्रकाश की मदद से किसी पदार्थ के अणुओं की पहचान की जाती है। जब लेजर की किरण किसी नमूने पर पड़ती है तो उससे निकलने वाला बिखरा प्रकाश उस पदार्थ की रासायनिक संरचना की जानकारी देता है। इसी आधार पर रमन सेंसर पानी में मौजूद आर्सेनिक जैसी विषैली भारी धातु की बहुत कम मात्रा का भी तेजी व सटीकता से पता लगाता है।

अगले चरण में तैयार किया जाएगा एप

प्रो.केएन उत्तम ने बताया कि शोध के अगले चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से एप तैयार किया जाएगा, ताकि आम लोग भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर पानी की जांच कर सकें। इस दिशा में प्रयोगशाला स्तर पर काम शुरू हो चुका है।

पठारी इलाकों के लिए संजीवनी बनेगा रमन सेंसर

रमर सेंसर का अविष्कार पठारी इलाकों में रहने वालों के लिए संजीवनी की तरह काम करेगा। हाल ही में प्रयागराज के शंकरगढ़ विकासखंड के कई गांवों में कैंसर की बीमारी तेजी से फैलने की बात सामने आई है। प्रो.उत्तम बताते हैं कि शंकरगढ़ पठारी इलाका है। पत्थरों में मौजूद आर्सेनिक बारिश के पानी के साथ भूजल में मिल जाता है। सिर्फ शंकरगढ़ नहीं, बल्कि देश के सभी पठारी इलाकों के भूजल में आर्सेनिक की जांच का त्वरित पता लगाने में रमन सेंसर की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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