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राजूपाल हत्याकांडः सीबाआई के विवेचक कोर्ट में तलब
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : डेमो
चर्चित राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल के अपहरण और धमकाने के मामले में चल रहे मुकदमे में कोर्ट ने सीबीआई के विवेचक डिप्टी एसपी अमित कुमार गुप्ता को तलब किया है। अमित घटना के दो अभियुक्तों आशिक उर्फ मल्ली और दिनेश पासी की मांग पर बुलाए गए हैं। दोनों ने बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर सीबीआई विवेचक को तलब करने के लिए स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए में अर्जी दी है। अर्जी पर सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट जज डॉ. बालमुकुंद ने विवेचक को गवाही के लिए समन जारी किया है। उनको 18 दिसंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया गया है।
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अदालत ने कहा कि सीबीआई के डिप्टी एसपी अमित कुमार स्पेशल क्राइम नई दिल्ली को बचाव पक्ष के साक्षी के रूप में तलब किए जाने का पर्याप्त आधार है। बसपा विधायक राजूपाल की हत्या 25 जनवरी 2005 को धूमनगंज थाना क्षेत्र में हुई थी। इस मुकदमे में तत्कालीन सांसद अतीक अहमद, तत्कालीन विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ सहित तमाम आरोपी बनाए गए थे। हत्याकांड के अहम गवाह उमेश पाल के अपहरण का आरोप भी इन्हीं अभियुक्तों पर है।
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इस मुकदमे में एक मार्च 2006 को गवाह उमेश पाल का बयान अपर सेशन जज कक्ष संख्या-14 इलाहाबाद के समक्ष दर्ज हुआ था। उमेश ने घटना का समर्थन नहीं किया तो अदालत ने उसे पक्ष द्रोही घोषित कर दिया। लेकिन, बाद में उमेश पाल ने एक रिपोर्ट धूमनगंज थाने में दर्ज करा दी थी कि उसे अपहरण करके ले जाया गया था कि वह इस मामले में गवाही न दें।
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उमेश पाल को अपहरण कर ले जाने के मामले में आशिक़ मल्ली व दिनेश पासी को भी अभियुक्त बनाया गया है। दोनों की ओर से अपने बचाव के लिए साक्षी पेश किए जाने की कार्यवाही के दौरान उनकी ओर से एक अर्जी अदालत में दी गई, जिसमें कहा गया कि उन्हें अपनी ओर से बचाव साक्षी के रूप में सीबीआई के डिप्टी एसपी स्पेशल क्राइम नई दिल्ली को पेश किया जाना है। इसके लिए अनुमति जारी किए जाएं।
अभियुक्तों का दावा, सीबीआई ने दी है क्लीन चिट
अभियुक्तों की ओर से सीबीआई के विवेचक को तलब करने की मांग करते हुए दावा किया गया है कि सीबीआई जांच में उनका कहीं भी नाम नहीं आया है। सीबीआई के साक्ष्य से वह निर्दोष साबित हो सकते हैं। राजू पाल की पत्नी पूजा पाल के प्रार्थनापत्र पर राजूपाल हत्याकांड की सीबीआई जांच हुई थी। इसी जांच में सीबीआई ने उमेशपाल के अपहरण की भी जांच की है। जिसमें यह पाया गया है कि उमेश पाल को अपहरण करने के कारण पक्ष द्रोही नहीं घोषित किया गया है, बल्कि उसका दूसरा कारण है। इसलिए वह निर्दोष है और डिप्टी एसपी अमित कुमार की गवाही मामले में भी आवश्यक है।