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स्वर्ण पदक पाने वालों में 71 फीसदी बेटियां
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Rajarshi Tondon Open University Convocation- 2019
- फोटो : CITY DESK
मुक्त विवि के दीक्षांत समारोह में 27 हजार विद्यार्थियों को मिली उपाधि
पीएचडी करने वाले नौ छात्रों को दीक्षांत समारोह में दी गई शोध उपाधि
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को स्नातक एवं परास्नातक के तकरीबन 27 हजार विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। वहीं, समारोह में 14 विद्यार्थियों को 18 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। दीक्षा चुग को कुलाधिपदक दिया गया, लेकिन वह पदक लेने के लिए समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। मेडल पाने वाले 14 विद्यार्थियों में 10 छात्राएं हैं।
दीक्षा के अलावा एक अन्य छात्रा अनीता चौहान भी समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। उन्हें भी दो मेडल मिलने थे। इस तरह समारोह में उपस्थित 12 विद्यार्थियों को कुल 14 पदक बांटे गए। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने हाथों से मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। पांच मेधावी शिक्षार्थियों को दानदाता स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। स्नातक एवं परास्नातक की उपाधि पाने वालों में 15555 छात्र एवं 11115 छात्राएं शामिल रहीं। वहीं, पीएचडी करने वाले नौ छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 14वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने सर्व समावेशी संस्कृति कुंभ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया।
राज्यपाल ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारी के छात्र-छात्राओं, स्वयं सहायता समूहों की दीदियों और ज्वाला देवी विद्या मंदिर इंटर कॉलेज विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्रों को हरित फूल, स्कूल एवं प्रेरणादायी पुस्तकें भेंट कीं। साथ ही यमुना परिसर में बनने वाले सामुदायिक केंद्र का शिलान्यास किया। समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक भगत, विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री नीलिमा कटियार और दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. आशीष गौतम ने दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
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कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने स्वागत भाषण दिया और प्रगति आख्या प्रस्तुत की। इस मौके पर न्यायमूर्ति सुधीर नारायण, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र सिंह गौर, विधायक लाल बहादुर, पूर्व कुलपति प्रो. केएनएस यादव, प्रो. केबी पांडेय आदि मौजूद रहे।
देश में खेतीपरक शिक्षा की जरूरत: अशोक भगत
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि देश में खेतीपरक और उद्योगपरक शिक्षा की जरूरत है। कहा कि लोकतंत्र में यह मनोवृत्ति हो गई है कि सब काम सरकारें करेंगी लेकिन यह भी देखना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्नन करते हुए कहा कि लखनऊ और दिल्ली जाने की आस छोड़ें। वहां बहुत प्रदूषण है। हम जंगलों की ओर चले और गांवों का विकास करें। हमें यह भी समझना होगी कि पढ़ाई का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं होती। इन परिस्थितियों में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
शिक्षा के साथ संकल्प से भी जुड़ते हैं हम: नीलिमा कटियार
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने दीक्षांत समारोह में कहा कि छात्रों में संवेदनशीलता के साथ परिवेश की अनुभूति जरूरी है। जब तक शिक्षित होते हैं तब हम व्रत और संकल्प से भी जुड़ते हैं। हमें सिर्फ आगे नहीं देखना है। समारोह में आए स्कूली बच्चों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें शिक्षित होने के बाद पीछे भी देखना होगा और इस जिम्मेदारी का एहसास करना होगा कि आज हम जहां पहुंचे हैं, वहां पीछे खड़े खड़े बच्चों को कैसे पहुंचाया जाए।
डॉ. आशीष को एलएलडी की मानद उपाधि
दीक्षांत समारोह में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. आशीष गौतम को एलएलडी की मानद उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल के हाथों उपाधि प्राप्त करने के बाद वह बोले कि शिक्षा और शिक्षाविदों का एक ही काम है कि मनुष्य में विद्यामान ऊर्जा को समाज की प्रगति के लिए इस्तेमाल में लाएं। कहा कि हम सभी में ऊर्जा और शक्ति का पुंज है, जिसका उपयोग समाजहित में करना चाहिए।
विश्वविद्यालय करेगा सौर ऊर्जा का इस्तेमाल
दीक्षांत समारोह के दौरान कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने बताया कि मुक्त विश्वविद्यालय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा और इसके लिए विश्वविद्यालय में व्यापक पैमाने पर काम शुरू होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा के प्लांट लगाए जाएंगे।
इन्हें मिले स्वर्ण पदक
- दीक्षा चुग को कुलाधिपति स्वर्ण पदक और विद्या विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- साधना वर्मा को मानविकी विद्याशाखा में समाज विज्ञान विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक एवं अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक
- अनीता चौहान को समाज विज्ञान विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक एवं एवं अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक
- हीरा तमकीन को शिक्षा विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक एवं बीएडी की सर्वश्रेष्ठ महिला विद्यार्थी के लिए बाबू ओम प्रकाश शुक्ला स्मृति स्वर्ण पदक
- रोहित कुमार शुक्ला को मानविकी विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- अंजूलता विश्वकर्मा को शिक्षा विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- निधि गौतम को प्रबंधन अध्ययन विद्याशाख्शा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- रिया वर्मा को मानविकी विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- अफसाना परवीन को विज्ञान विद्याशाखा सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- अमरीश यादव को प्रबंधन अध्ययन विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- शिवम पांडेय को कंप्यूटर एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- वीरांगी वर्मा को पर्यावरण एवं गांधी शांति अध्ययन संबंधी योग्यता के लिए सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी हेतु प्रो. एमपी दुबे, पर्यावरण एवं गांधी शांति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्ण पदक
- प्रमोद कुमार सिंह को विश्वविद्यालय की समस्त विद्याशाखाओं में दिव्यांगों में सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के लिए प्रो. एमपी दुबे, दिव्यांग मेधा स्वर्ण पदक
- प्रज्ञा यादव को परास्नातक हिंदी में उत्तीर्ण सर्वश्रेष्ठ अभ्यर्थी के लिए राष्ट्रकवि पंडित सोनललाल द्विवेदी स्मृति स्वर्ण पदक
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पीएचडी करने वाले नौ छात्रों को दीक्षांत समारोह में दी गई शोध उपाधि
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को स्नातक एवं परास्नातक के तकरीबन 27 हजार विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। वहीं, समारोह में 14 विद्यार्थियों को 18 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। दीक्षा चुग को कुलाधिपदक दिया गया, लेकिन वह पदक लेने के लिए समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। मेडल पाने वाले 14 विद्यार्थियों में 10 छात्राएं हैं।
दीक्षा के अलावा एक अन्य छात्रा अनीता चौहान भी समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। उन्हें भी दो मेडल मिलने थे। इस तरह समारोह में उपस्थित 12 विद्यार्थियों को कुल 14 पदक बांटे गए। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने हाथों से मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। पांच मेधावी शिक्षार्थियों को दानदाता स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। स्नातक एवं परास्नातक की उपाधि पाने वालों में 15555 छात्र एवं 11115 छात्राएं शामिल रहीं। वहीं, पीएचडी करने वाले नौ छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 14वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने सर्व समावेशी संस्कृति कुंभ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया।
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राज्यपाल ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारी के छात्र-छात्राओं, स्वयं सहायता समूहों की दीदियों और ज्वाला देवी विद्या मंदिर इंटर कॉलेज विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्रों को हरित फूल, स्कूल एवं प्रेरणादायी पुस्तकें भेंट कीं। साथ ही यमुना परिसर में बनने वाले सामुदायिक केंद्र का शिलान्यास किया। समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक भगत, विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री नीलिमा कटियार और दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. आशीष गौतम ने दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
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कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने स्वागत भाषण दिया और प्रगति आख्या प्रस्तुत की। इस मौके पर न्यायमूर्ति सुधीर नारायण, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र सिंह गौर, विधायक लाल बहादुर, पूर्व कुलपति प्रो. केएनएस यादव, प्रो. केबी पांडेय आदि मौजूद रहे।
देश में खेतीपरक शिक्षा की जरूरत: अशोक भगत
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि देश में खेतीपरक और उद्योगपरक शिक्षा की जरूरत है। कहा कि लोकतंत्र में यह मनोवृत्ति हो गई है कि सब काम सरकारें करेंगी लेकिन यह भी देखना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्नन करते हुए कहा कि लखनऊ और दिल्ली जाने की आस छोड़ें। वहां बहुत प्रदूषण है। हम जंगलों की ओर चले और गांवों का विकास करें। हमें यह भी समझना होगी कि पढ़ाई का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं होती। इन परिस्थितियों में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
शिक्षा के साथ संकल्प से भी जुड़ते हैं हम: नीलिमा कटियार
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री नीलिमा कटियार ने दीक्षांत समारोह में कहा कि छात्रों में संवेदनशीलता के साथ परिवेश की अनुभूति जरूरी है। जब तक शिक्षित होते हैं तब हम व्रत और संकल्प से भी जुड़ते हैं। हमें सिर्फ आगे नहीं देखना है। समारोह में आए स्कूली बच्चों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें शिक्षित होने के बाद पीछे भी देखना होगा और इस जिम्मेदारी का एहसास करना होगा कि आज हम जहां पहुंचे हैं, वहां पीछे खड़े खड़े बच्चों को कैसे पहुंचाया जाए।
डॉ. आशीष को एलएलडी की मानद उपाधि
दीक्षांत समारोह में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. आशीष गौतम को एलएलडी की मानद उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल के हाथों उपाधि प्राप्त करने के बाद वह बोले कि शिक्षा और शिक्षाविदों का एक ही काम है कि मनुष्य में विद्यामान ऊर्जा को समाज की प्रगति के लिए इस्तेमाल में लाएं। कहा कि हम सभी में ऊर्जा और शक्ति का पुंज है, जिसका उपयोग समाजहित में करना चाहिए।
विश्वविद्यालय करेगा सौर ऊर्जा का इस्तेमाल
दीक्षांत समारोह के दौरान कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने बताया कि मुक्त विश्वविद्यालय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा और इसके लिए विश्वविद्यालय में व्यापक पैमाने पर काम शुरू होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा के प्लांट लगाए जाएंगे।
इन्हें मिले स्वर्ण पदक
- दीक्षा चुग को कुलाधिपति स्वर्ण पदक और विद्या विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- साधना वर्मा को मानविकी विद्याशाखा में समाज विज्ञान विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक एवं अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक
- अनीता चौहान को समाज विज्ञान विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक एवं एवं अनिल मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक
- हीरा तमकीन को शिक्षा विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक एवं बीएडी की सर्वश्रेष्ठ महिला विद्यार्थी के लिए बाबू ओम प्रकाश शुक्ला स्मृति स्वर्ण पदक
- रोहित कुमार शुक्ला को मानविकी विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- अंजूलता विश्वकर्मा को शिक्षा विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- निधि गौतम को प्रबंधन अध्ययन विद्याशाख्शा में सर्वश्रेष्ठ स्नातकोत्तर विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- रिया वर्मा को मानविकी विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- अफसाना परवीन को विज्ञान विद्याशाखा सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- अमरीश यादव को प्रबंधन अध्ययन विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- शिवम पांडेय को कंप्यूटर एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा में सर्वश्रेष्ठ स्नातक विद्यार्थी के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक
- वीरांगी वर्मा को पर्यावरण एवं गांधी शांति अध्ययन संबंधी योग्यता के लिए सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी हेतु प्रो. एमपी दुबे, पर्यावरण एवं गांधी शांति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्ण पदक
- प्रमोद कुमार सिंह को विश्वविद्यालय की समस्त विद्याशाखाओं में दिव्यांगों में सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के लिए प्रो. एमपी दुबे, दिव्यांग मेधा स्वर्ण पदक
- प्रज्ञा यादव को परास्नातक हिंदी में उत्तीर्ण सर्वश्रेष्ठ अभ्यर्थी के लिए राष्ट्रकवि पंडित सोनललाल द्विवेदी स्मृति स्वर्ण पदक

Rajarshi Tondon Open University Convocation- 2019- फोटो : CITY DESK