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रेल यूनियनों को किया जाएगा संगठित - शिवगोपाल
Thu, 09 Sep 2021 11:23 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 09 Sep 2021 11:23 PM IST
सार
शिवगोपाल मिश्र ने कहा कि यह बड़ा आंदोलन होगा। इसलिए इसे जन आंदोलन में भी तब्दील किया जाएगा। इस आंदोलन में रेलवे के उपभोक्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। क्योंकि रेलवे के निजीकरण आदि का कर्मचारियों से ज्यादा असर आम यात्रियों पर ही पड़ेगा।
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ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने रेलवे में किए जाने वाले मौद्रीकरण का विरोध किया है। उन्होंने कहा सरकार निजीकरण की राह में तेजी से बढ़ रही है। मौद्रीकरण निजीकरण का ही अगला कदम है। उसकी नीतियों के खिलाफ रेलवे की सभी मान्यता प्राप्त, गैर मान्यता प्राप्त यूनियनों को संगठित कर अब एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। एआईआरएफ महामंत्री ने यह बातें वाल्मीकि रोड स्थित नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के केंद्रीय कार्यालय में हुई प्रेसवार्ता में कहीं।
शिवगोपाल मिश्र ने कहा कि यह बड़ा आंदोलन होगा। इसलिए इसे जन आंदोलन में भी तब्दील किया जाएगा। इस आंदोलन में रेलवे के उपभोक्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। क्योंकि रेलवे के निजीकरण आदि का कर्मचारियों से ज्यादा असर आम यात्रियों पर ही पड़ेगा। निजीकरण हो जाने से रेलवे स्टेशन पर वाहन स्टैंड, प्रतीक्षालय, खानपान आदि की सुविधाएं महंगी हो जाएंगी। क्योंकि फिर संबंधित एजेंसी की ही मनमानी चलेगी। शिवगोपाल मिश्र ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां पूरी तरह से लागू न कर पाने की वजह से ही पीयूष गोयल को रेलमंत्री के पद से हटाकर दूसरा मंत्रालय सौंपा गया।
कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू
एआईआरएफ महामंत्री ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू है। वर्ष 1991 में कांग्रेस सरकार के दौरान योजना आयोग में रहते हुए मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने रेलवे के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, तब इसका यूनियनों द्वारा व्यापक विरोध किया गया। इसके बाद अब कांग्रेस की राह भाजपा ने पकड़ ली है। शिवगोपाल ने कहा कि सरकार ने अभी हबीबगंज भोपाल समेत चार स्टेशनों को निजी सहभागिता से विकसित किया है। लेकिन जिस एजेंसी द्वारा हबीबगंज को लिया गया है उसे संदेह है कि इस स्टेशन से उसे कोई फायदा होगा या नहीं। उधर प्रेसवार्ता के बाद शिवगोपाल मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव के साथ शाम को दिल्ली वापस चले गए।
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शिवगोपाल मिश्र ने कहा कि यह बड़ा आंदोलन होगा। इसलिए इसे जन आंदोलन में भी तब्दील किया जाएगा। इस आंदोलन में रेलवे के उपभोक्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। क्योंकि रेलवे के निजीकरण आदि का कर्मचारियों से ज्यादा असर आम यात्रियों पर ही पड़ेगा। निजीकरण हो जाने से रेलवे स्टेशन पर वाहन स्टैंड, प्रतीक्षालय, खानपान आदि की सुविधाएं महंगी हो जाएंगी। क्योंकि फिर संबंधित एजेंसी की ही मनमानी चलेगी। शिवगोपाल मिश्र ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां पूरी तरह से लागू न कर पाने की वजह से ही पीयूष गोयल को रेलमंत्री के पद से हटाकर दूसरा मंत्रालय सौंपा गया।
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कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू
एआईआरएफ महामंत्री ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू है। वर्ष 1991 में कांग्रेस सरकार के दौरान योजना आयोग में रहते हुए मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने रेलवे के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, तब इसका यूनियनों द्वारा व्यापक विरोध किया गया। इसके बाद अब कांग्रेस की राह भाजपा ने पकड़ ली है। शिवगोपाल ने कहा कि सरकार ने अभी हबीबगंज भोपाल समेत चार स्टेशनों को निजी सहभागिता से विकसित किया है। लेकिन जिस एजेंसी द्वारा हबीबगंज को लिया गया है उसे संदेह है कि इस स्टेशन से उसे कोई फायदा होगा या नहीं। उधर प्रेसवार्ता के बाद शिवगोपाल मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव के साथ शाम को दिल्ली वापस चले गए।
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