Railway News: बंगला खलासी पद खत्म करने से रेलवे के साहब से लेकर मेमसाब तक परेशान
रेलवे में अंग्रेजों के समय से चली आ रही बंगला खलासी रखने की व्यवस्था खत्म करने के निर्णय से तमाम रेलवे के तमाम सीनियर अफसरों में शनिवार को खासी हलचल देखने को मिली। रेलवे बोर्ड के इस निर्णय से कुछ सीनियर अफसर बेहद खफा भी दिखे। हालांकि सीधे तौर पर सभी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, लेकिन उत्तर मध्य रेलवे के सीनियर अफसरों के व्हाटसअप ग्रुप में दिन भर यह चर्चा का विषय रहा। बताया जा रहा है कि इस निर्णय से अफसरों से ज्यादा उनकी पत्नियां ज्यादा खफा है।
दरअसल रेलवे के सीनियर अफसरों को एक खास सुविधा मिलती है। वह सुविधा है टेलीफोन अटेंडेंट कम डाक खलासी (टीएडीके) की। रेलवे ने इस प्रथा पर विराम लगाने का फैसला किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस बारे में रेलवे बोर्ड ने दो दिन पहले ही एक चिट्ठी जारी कर सभी जोनल रेलवे के जीएम को भेज दिया है।
बता दें कि टीकेडीऐ यानी कि अफसरों को घर में काम करने के लिए 24 घंटे का एक नौकर मिल जाता है। कुछ जोनल रेलवे में इसे बंगलो पियून भी कहा जाता है। इसकी भर्ती के लिए कोई परीक्षा नहीं होती। रेल अधिकारी जिसे चाहे भर्ती कर लेते हैं और वह रेलवे का कर्मचारी बन कर साहब के बंगले पर घरेलू काम करता है। आम तौर पर 3 साल तक वह साहब के घर पर काम करता है।