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Railway News: बंगला खलासी पद खत्म करने से रेलवे के साहब से लेकर मेमसाब तक परेशान

Sun, 09 Aug 2020 12:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 09 Aug 2020 12:27 AM IST
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Railway News: The disbanding of the Bungalow Khalasi post upset the Railway Honor to Memsab
Peon

रेलवे में अंग्रेजों के समय से चली आ रही बंगला खलासी रखने की व्यवस्था खत्म करने के निर्णय से तमाम रेलवे के तमाम सीनियर अफसरों में शनिवार को खासी हलचल देखने को मिली। रेलवे बोर्ड के इस निर्णय से कुछ सीनियर अफसर बेहद खफा भी दिखे। हालांकि सीधे तौर पर सभी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, लेकिन उत्तर मध्य रेलवे के सीनियर अफसरों के व्हाटसअप ग्रुप में दिन भर यह चर्चा का विषय रहा। बताया जा रहा है कि इस निर्णय से अफसरों से ज्यादा उनकी पत्नियां ज्यादा खफा है।

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Railway News: The disbanding of the Bungalow Khalasi post upset the Railway Honor to Memsab
बंगला (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

दरअसल रेलवे के सीनियर अफसरों को एक खास सुविधा मिलती है। वह सुविधा है टेलीफोन अटेंडेंट कम डाक खलासी  (टीएडीके) की।  रेलवे ने इस प्रथा पर विराम लगाने का फैसला किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस बारे में रेलवे बोर्ड ने दो दिन पहले ही एक चिट्ठी जारी कर सभी जोनल रेलवे के जीएम को भेज दिया है।

बता दें कि टीकेडीऐ यानी कि अफसरों को घर में काम करने के लिए 24 घंटे का एक नौकर मिल जाता है। कुछ  जोनल रेलवे में इसे बंगलो पियून भी कहा जाता है। इसकी भर्ती के लिए कोई परीक्षा नहीं होती। रेल अधिकारी जिसे चाहे भर्ती कर लेते हैं और वह रेलवे का कर्मचारी बन कर साहब के बंगले पर घरेलू काम करता है। आम तौर पर 3 साल तक वह साहब के घर पर काम करता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
उसके बाद उसे रेलवे के आफिस, या वर्कशॉप आदि में तैनात कर दिया जाता है। एक अफसर अपने कार्यकाल के दौरान कुल दो बंगला पियून रख सकता है। अब उनसे यह अधिकार छीना जा रहा है। चर्चा है कि कुछ अफसरों ने रेलवे बोर्ड में यह मसला दोबारा रीप्रेजेंट करने को कहा है।  बता दें कि एनसीआर जोन के आगरा, प्रयागराज एवं झांसी मंडल में इस तरह के 200 से ज्यादा बंगला खलासी हैं। इसमें 100 के आसपास तो केवल प्रयागराज में ही है।
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