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मेडिकल कॉलेज में छात्रों की रैगिंग
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:10 AM IST
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मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ रैगिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंगलवार को जूनियर छात्रों को मुर्गा बनाया गया। प्रतिरोध करने पर उनकी लात-घूंसों से पिटाई की गई और कॅरियर चौपट कराने की धमकी भी दी। यही नहीं अधिकांश मेडिकल छात्रों के सिर भी मुड़वा दिए गए हैं।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के मेडिकल छात्रों की कक्षाएं 20 अगस्त से शुरू हुईं। बकरीद की छुट्टी के बाद मंगलवार को क्लास का तीसरा दिन था। सुबह शर्ट की तीसरी बटन देखकर क्लास पहुंच छात्र सिर उठाकर जब निकले तो उनकी शामत आ गई। मेस में लेजाकर उन्हें मुर्गा बना दिया गया। इस बीच जिसने कान छोड़ा उसकी जमकर लात घूंसों से पिटाई करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दीं गईं। शाम करीब 3.20 बजे से 4.30 बजे तक एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों की पिटाई की गई। रैंगिग से सहमा एक छात्र अपने पिता से आपबीती सुनाते हुए रो पड़ा। उन्होंने ढांढस बंधाया और वार्डेन के साथ पुलिस से शिकायत करने को कहा। इस पर छात्र ने पिता को बताया कि उन्हें शिकायत न करने की धमकी दी गई है। मारपीट करने वालों ने कहा है कि मुंह खोला तो करियर चौपट हो जाएगा। टीचर तो विरोध करेंगे ही हम भी किसी को पढ़ाई नहीं करने देंगे। पांच साल का कोर्स सात साल में भी पूरा नहीं हो पाएगा।
धमकी से सहमे अधिकांश छात्र डिप्रेशन में आ गए हैं। एंटी रैंगिग सेल के जिम्मेदार परिसर में नहीं दिखे। चीफ वार्डेन डॉ. देवाशीष शर्मा शहर के बाहर गए हैं, एक सहायक वार्डेन पद से इस्तीफा दे चुके हैं। मौजूदा समय में एक अन्य सहायक वार्डेन डॉ. संतोष भी छुट्टी से मंगलवार शाम ही लौटे हैं।
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पहले भी हो चुकीं घटनाएं
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में तीन वर्ष पूर्व भी रैगिंग की घटना हो चुकी है। एक छात्र की शिकायत पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। पुलिस उस घटना में आरोपियों तक पहुंचती, इससे पहले मामला सुलटा दिया गया।
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सिर्फ नाम की एंटी रैगिंग सेल, एंटी रैगिंग कमांडो
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष केनवप्रवेशियों केलिए कोर्ट केनिर्देश पर एंटी रैगिंग सेल का गठन किया गया है। एंटी रैगिंग कमांडो की तैनाती भी है। कॉलेज परिसर और छात्रावासों में ‘रैगिंग संज्ञेय अपराध’ है के स्लोगन लिखे पोस्टर और फ्लैक्स लगाए गए हैं। इसके बावजूद छात्रों की रैगिंग हो रही है। दहशद के मारे छात्र हॉस्टल ही छोड़कर परिचितों के यहां रहने चले गए।
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मेडिकल कॉलेज में कोर्ट और एमसीआई के निर्देश के मुताबिक रैगिंग रोकने के पूरे उपाय किए गए हैं। रैगिंग की अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
डॉ. संतोष, सहायक वार्डेन एमएलएन मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के मेडिकल छात्रों की कक्षाएं 20 अगस्त से शुरू हुईं। बकरीद की छुट्टी के बाद मंगलवार को क्लास का तीसरा दिन था। सुबह शर्ट की तीसरी बटन देखकर क्लास पहुंच छात्र सिर उठाकर जब निकले तो उनकी शामत आ गई। मेस में लेजाकर उन्हें मुर्गा बना दिया गया। इस बीच जिसने कान छोड़ा उसकी जमकर लात घूंसों से पिटाई करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दीं गईं। शाम करीब 3.20 बजे से 4.30 बजे तक एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों की पिटाई की गई। रैंगिग से सहमा एक छात्र अपने पिता से आपबीती सुनाते हुए रो पड़ा। उन्होंने ढांढस बंधाया और वार्डेन के साथ पुलिस से शिकायत करने को कहा। इस पर छात्र ने पिता को बताया कि उन्हें शिकायत न करने की धमकी दी गई है। मारपीट करने वालों ने कहा है कि मुंह खोला तो करियर चौपट हो जाएगा। टीचर तो विरोध करेंगे ही हम भी किसी को पढ़ाई नहीं करने देंगे। पांच साल का कोर्स सात साल में भी पूरा नहीं हो पाएगा।
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धमकी से सहमे अधिकांश छात्र डिप्रेशन में आ गए हैं। एंटी रैंगिग सेल के जिम्मेदार परिसर में नहीं दिखे। चीफ वार्डेन डॉ. देवाशीष शर्मा शहर के बाहर गए हैं, एक सहायक वार्डेन पद से इस्तीफा दे चुके हैं। मौजूदा समय में एक अन्य सहायक वार्डेन डॉ. संतोष भी छुट्टी से मंगलवार शाम ही लौटे हैं।
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पहले भी हो चुकीं घटनाएं
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में तीन वर्ष पूर्व भी रैगिंग की घटना हो चुकी है। एक छात्र की शिकायत पर मुकदमा भी दर्ज किया गया था। पुलिस उस घटना में आरोपियों तक पहुंचती, इससे पहले मामला सुलटा दिया गया।
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सिर्फ नाम की एंटी रैगिंग सेल, एंटी रैगिंग कमांडो
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष केनवप्रवेशियों केलिए कोर्ट केनिर्देश पर एंटी रैगिंग सेल का गठन किया गया है। एंटी रैगिंग कमांडो की तैनाती भी है। कॉलेज परिसर और छात्रावासों में ‘रैगिंग संज्ञेय अपराध’ है के स्लोगन लिखे पोस्टर और फ्लैक्स लगाए गए हैं। इसके बावजूद छात्रों की रैगिंग हो रही है। दहशद के मारे छात्र हॉस्टल ही छोड़कर परिचितों के यहां रहने चले गए।
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मेडिकल कॉलेज में कोर्ट और एमसीआई के निर्देश के मुताबिक रैगिंग रोकने के पूरे उपाय किए गए हैं। रैगिंग की अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
डॉ. संतोष, सहायक वार्डेन एमएलएन मेडिकल कॉलेज