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हाईकोर्ट : कानूनी सहमति से संचालित उद्योग के खिलाफ जनहित याचिका पोषणीय नहीं
Sun, 01 Nov 2026 08:14 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 01 Nov 2026 08:14 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कानूनी सहमति से संचालित उद्योग के खिलाफ जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इस टिप्पणी के साथ मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सहारनपुर निवासी मोहम्मद इस्तेखार की जनहित याचिका खारिज कर दी।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कानूनी सहमति से संचालित उद्योग के खिलाफ जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इस टिप्पणी के साथ मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सहारनपुर निवासी मोहम्मद इस्तेखार की जनहित याचिका खारिज कर दी।
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याचिका में अजीम कॉलोनी स्थित टायर और तरल गैस ईंधन फैक्टरी को बंद कराने की मांग की गई थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्रदूषणकारी उद्योग है। इसके कारण आसपास के आठ गांवों के ग्रामीण परेशान हैं।
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राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने बताया कि फैक्टरी को बोर्ड से वैध संचालन की अनुमति मिली हुई है। यह 31 जुलाई 2027 तक प्रभावी है। याची फैक्टरी से लगभग 45 किमी दूर रहता है। याचिका दाखिल होने के बाद किए गए निरीक्षण के दौरान फैक्टरी बंद पाई गई थी।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति को चुनौती देने का अलग कानूनी रास्ता
हाईकोर्ट ने कहा कि वैध सहमति के तहत संचालित उद्योग को बंद कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति उद्योग को दी गई सहमति से असंतुष्ट है तो उसके पास वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा-31 के तहत वैधानिक उपचार उपलब्ध है।