Prayagraj News: बालिग के शादीशुदा जीवन में किसी को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं: हाईकोर्ट
कोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि लड़का-लड़की दोनों बालिग हैं तो अपनी मर्जी से रह सकते हैं। माता-पिता सहित किसी को भी उनके शादीशुदा शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. केजे ठाकर ने कानपुर नगर की प्रिया वर्मा व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस समय दोनों बालिग हैं। एफआईआर दर्ज करते समय नाबालिग थे, इससे इनके शादीशुदा जिंदगी में फर्क नहीं पडे़गा।
कोर्ट ने कहा कि यदि कोई याचियों को परेशान करे तो वह पुलिस संरक्षण मांगें और पुलिस उनको संरक्षण दे। कोर्ट ने कहा कि यदि परिवार के लोगों को लगता है कि फर्जी दस्तावेज से आदेश लिया गया है तो वह इस आदेश की वापसी की अर्जी दे सकते हैं।