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Prayagraj Sangam News: पितरों के श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान को जुटे परिजन

Thu, 03 Sep 2020 12:42 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 03 Sep 2020 12:42 AM IST
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Prayagraj Sangam News: Shraddha of ancestors, Tarpan, family gathered at Pinddaan
prayagraj news - फोटो : prayagraj
बुधवार को प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितरों के प्रति श्रद्धा का पर्व पितृपक्ष आरंभ हुआ। तिथि के मुताबिक प्रतिपदा पर ऐसे पुरखों का पिंडदान, श्राद्ध और उनके निमित्त तर्पण किया गया जिनका निधन प्रतिपदा को हुआ था।
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बाढ़ के कारण लेटे हनुमान मंदिर के करीब से लेकर काली सड़क तक तीर्थपुरोहितों के तख्त लगे रहे। बाढ़ के कारण सुविधानुसार स्नान के बाद ज्यादातर परिजनों ने पुरोहितों के तख्त पर ही श्राद्धकर्म, पिंडदान, तर्पण की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि बाढ़ के कारण संगम पर गोदान के लिए तीर्थपुरोहितों के तख्त के पास बछिया नहीं दिखाई पड़ी। सुबह 9.34 बजे के बाद प्रतिपदा तिथि के संचरण के बाद प्रतिपदा  श्राद्ध के लिए परिजनों की संख्या बढ़ी।
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परिजनों ने अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनकी प्रसन्नता के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान करने के साथ ही तीर्थपुरोहितों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा भी दिया। पितृपक्ष की दस्तक के साथ श्राद्धकर्म के लिए परिजनों के पहुंचने से संगम क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ी। तीर्थपुरोहितों के तख्त के साथ फूल और पूजा सामग्री बेचने वाले भी जहां-तहां अपनी दुकानें सजाए रहे।
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गंगा पुत्र घाटिया संघ के अध्यक्ष राकेश मिश्र उर्फ पिप्पी गुरु तथा कोषाध्यक्ष सालिक राम पांडेय बोले, साधन की कमी और बाढ़ आदि कारणों से पास-पड़ोस के जनपदों सहित दूर दराज से आने वालों की संख्या कम रही, लेकिन स्थानीय परिजन बड़ी संख्या में पहुंचे। तकरीबन सभी तीर्थपुरोहितों के यहां उनके परिवार के सदस्यों के साथ ही कई-कई कर्मचारी भी रहे जो स्थानीय और बाहर से आने वाले यजमानों का सहयोग करते रहे।
  • श्राद्ध की परंपरा प्रयाग से आरंभ होती है। सो गया जाने से पहले परिजनों ने प्रयाग में संगम क्षेत्र में श्राद्ध किया, फिर यहां से वाराणसी के लिए प्रस्थान किया। वहां पिंडदान के बाद परिजन श्राद्ध के लिए गया जाएंगे। राजेंद्र पालीवाल, महामंत्री, प्रयागवाल सभा

आवश्यक है पितरों की प्रसन्नता

श्रीमद्भागवत के आचार्य अमिताभ जी महाराज कहते हैं, सर्वमंगल के लिए पितरों का आशीर्वाद आवश्यक है। पितृपक्ष में उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान, श्राद्धकर्म आदि के अतिरिक्त पितरों के निमित्त गाय, कुत्ता, कौआ आदि को भोजन कराना श्रेयस्कर है। पितरों की प्रसन्नता के लिए शनिवार को पीपल के वृक्ष को जल देने सहित दीपक भी जलाएं।
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