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प्रयागराज : युवक की हत्या में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, न्यायालय ने अग्रिम विवेचना का दिया आदेश
Fri, 12 Nov 2021 09:06 PM IST
विनोद सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 12 Nov 2021 09:06 PM IST
सार
खुल्दाबाद के मनीष केसरवानी की दो जुलाई 2020 को अरैल में मिली थी लाश। वादी विनय केसरवानी ने अपने भाई मनीष केसरवानी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दो जुलाई 2020 को खुल्दाबाद थाने में दर्ज कराई थी।
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prayagraj News : court
- फोटो : प्रयागराज
विस्तार
जिला न्यायालय ने युवक मनीष केसरवानी की मौत मामले में पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया है और अग्रिम विवेचना के लिए एसएसपी को निर्देश दिया है कि वह किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से इसकी अग्रिम विवेचना कराएं। यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेंद्रनाथ ने वादी की प्रोटेस्ट पिटिशन पर उनके अधिवक्ता विकास गुप्ता को सुनकर दिया है।
प्रकरण थाना खुल्दाबाद का है। वादी विनय केसरवानी ने अपने भाई मनीष केसरवानी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दो जुलाई 2020 को खुल्दाबाद थाने में दर्ज कराई थी। बताया कि उसका भाई 1 जुलाई को अपनी बाइक लेकर घर से गया था, जो लौट कर नहीं आया। दो जुलाई को उसके भाई की बाइक और हेलमेट लावारिस हालत में मिली थी। बाद में खुल्दाबाद पुलिस ने उसे अरैल घाट पर मिली एक अज्ञात लाश के बारे में बताया। जाकर देखा तो उसके भाई मनीष की लाश थी।
वादी की तहरीर पर पुलिस ने 20 जुलाई 2020 को रमेश केसरवानी, शिवानी और अजय कुमार के खिलाफ हत्या, हत्या की साजिश और हत्या कर साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया था। विवेचना बाद पुलिस ने 5 फरवरी 2021 को अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी। वादी विनय केसरवानी ने अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ न्यायालय में एक प्रोटेस्ट पिटिशन दाखिल किया। वादी ने प्रोटेस्ट पिटिशन में कहा कि उसके द्वारा हाईकोर्ट में मामले की निष्पक्ष विवेचना के लिए याचिका प्रस्तुत की गई थी, जो लंबित है। इसी दौरान पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है।
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कोर्ट में दाखिल प्रोटेस्ट पिटिशन में कहा गया है कि 3 जुलाई 2020 को मृतक के गले पर दबाव के निशान अंकित करते हुए पुलिस ने पंचनामा तैयार किया था। जबकि पोस्टमार्टम में कोई बाहरी चोट न होने का अंकन किया गया है। मामले के अभियुक्त गण को उनके राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया। विवेचक द्वारा निष्पक्ष विवेचना नहीं की गई। प्रोटेस्टेशन में यह भी कहा गया कि विवेचक, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और अभियुक्त गण का कृत्य पूरी विवेचना को संदेह के घेरे में लाता है। उपलब्ध साक्ष्य को विवेचक द्वारा तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।
वादी द्वारा दाखिल प्रोटेस्ट पिटिशन पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा है कि मृत्यु पानी में डूबने से हुई लेकिन किन परिस्थितियों में मृतक पानी तक पहुंचा जिसकी विवेचना होनी आवश्यक है। मृत्यु पूर्व गले में चोट आदि का उल्लेख और विवेचक के द्वारा घटना से संबंधित महत्वपूर्ण गवाहों का बयान अंकित नहीं किया गया।
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प्रकरण थाना खुल्दाबाद का है। वादी विनय केसरवानी ने अपने भाई मनीष केसरवानी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दो जुलाई 2020 को खुल्दाबाद थाने में दर्ज कराई थी। बताया कि उसका भाई 1 जुलाई को अपनी बाइक लेकर घर से गया था, जो लौट कर नहीं आया। दो जुलाई को उसके भाई की बाइक और हेलमेट लावारिस हालत में मिली थी। बाद में खुल्दाबाद पुलिस ने उसे अरैल घाट पर मिली एक अज्ञात लाश के बारे में बताया। जाकर देखा तो उसके भाई मनीष की लाश थी।
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वादी की तहरीर पर पुलिस ने 20 जुलाई 2020 को रमेश केसरवानी, शिवानी और अजय कुमार के खिलाफ हत्या, हत्या की साजिश और हत्या कर साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया था। विवेचना बाद पुलिस ने 5 फरवरी 2021 को अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी। वादी विनय केसरवानी ने अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ न्यायालय में एक प्रोटेस्ट पिटिशन दाखिल किया। वादी ने प्रोटेस्ट पिटिशन में कहा कि उसके द्वारा हाईकोर्ट में मामले की निष्पक्ष विवेचना के लिए याचिका प्रस्तुत की गई थी, जो लंबित है। इसी दौरान पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी है।
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कोर्ट में दाखिल प्रोटेस्ट पिटिशन में कहा गया है कि 3 जुलाई 2020 को मृतक के गले पर दबाव के निशान अंकित करते हुए पुलिस ने पंचनामा तैयार किया था। जबकि पोस्टमार्टम में कोई बाहरी चोट न होने का अंकन किया गया है। मामले के अभियुक्त गण को उनके राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया। विवेचक द्वारा निष्पक्ष विवेचना नहीं की गई। प्रोटेस्टेशन में यह भी कहा गया कि विवेचक, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और अभियुक्त गण का कृत्य पूरी विवेचना को संदेह के घेरे में लाता है। उपलब्ध साक्ष्य को विवेचक द्वारा तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।
वादी द्वारा दाखिल प्रोटेस्ट पिटिशन पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा है कि मृत्यु पानी में डूबने से हुई लेकिन किन परिस्थितियों में मृतक पानी तक पहुंचा जिसकी विवेचना होनी आवश्यक है। मृत्यु पूर्व गले में चोट आदि का उल्लेख और विवेचक के द्वारा घटना से संबंधित महत्वपूर्ण गवाहों का बयान अंकित नहीं किया गया।