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प्रयागराज: कछार के एक लाख से अधिक मकान डूबे,गंगा-यमुना ने मचाई तबाही

Wed, 11 Aug 2021 01:41 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 11 Aug 2021 01:41 AM IST
सार

  • बेली की बड़ी मस्जिद की गली में उफनाई गंगा, नेवादा, बघाड़ा और बख्शी बांध इलाके में बहने लगी गृहस्थी, बर्बादी देख लोगों की आंखों में बहे आंसू
  • जिन सड़कों पर हफ्ते भर पहले फर्राटा भरते थे वाहन, अब नावों से वहां जाने में भी डर रहे लोग, बाढ़ से बिगड़ने लगे हालात 

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Prayagraj: More than one lakh houses of Cachar submerged, Ganga-Yamuna created havoc
गंगा-यमुना के जलस्तर में वृद्धि। - फोटो : prayagraj

विस्तार

साहबों के बंगले की सफाई और गमलों की सिंचाई कर परिवार की जीविका चलाने वाले रोशन का किराये का मकान मंगलवार को डूब गया। घर में आठ फीट से अधिक पानी आ गया है। इससे उसकी गृहस्थी का सारा सामान पानी में डूबकर बर्बाद हो गया। पानी में अनाज, कपड़े भीगने के बाद वह नाव की मदद से किसी तरह पत्नी और दो बच्चों को लेकर महबूब अली इंटर कॉलेज के शिविर में पहुंच गया। इसी तरह नेवादा में पानी से घिरे कई परिवारों के बच्चों को तीन दिन से दूध नहीं मिल सका है। गलियों में पानी भरने से दुकानें बंद हैं और रोजमर्रा की वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है।

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दो हजार रुपये प्रतिमाह किराये के मकान में रहकर झाड़ू, पोछा और बर्तन की धुलाई कर बच्चों को पढ़ाने, पालने वाली नेवादा की मुस्कान के कमरे में पानी भर गया है। उसका चूल्हा-चौका डूब गया। दोपहर बाद वह अपने दो बच्चों पिंकी और रीतेश के साथ सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भटकती रही। रोशन और मुस्कान की तरह बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की आपदा की चपेट में आकर मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। खतरे के निशान के ऊपर जाने के बाद गंगा और यमुना इस तरह कई इलाकों में तबाही मचा रही हैं। लगातार तीसरे दिन मंगलवार को दोनों नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से करीब एक लाख से अधिक की अबादी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई।
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बाढ़ का पानी इस दिन नेवादा की गलियों में भी भर गया। इस वजह से गलियों में खुले दर्जन भर से अधिक जनरल स्टोर और दुकानें बंद हो गईं। कछार के दर्जनों मोहल्ले टापू में तब्दील हो गए हैं। बाढ़ की वजह से हजारों की संख्या में लोग बेघर होकर रिश्तेदारों, परिचितों के यहां पहुंच गए हैं या फिर राहत शिविरों में उनका चूल्हा जल रहा है। किसी की गृहस्थी बह गई है तो कोई बाढ़ घिरने के बावजूद अभी भी घरों की छतों पर गंगा-यमुना की बाढ़ थमने की उम्मीद पाले हुए है। दारागंज-नागवासुकि मार्ग के अलावा कछार की जिन सड़कों पर हफ्ते भर पहले वाहन दौड़ रहे थे, वहीं अब गंगा और यमुना के जलाप्लावन के बीच रौद्र रूप से उन सड़कों पर नावों से भी गुजरने में लोग दिल थाम ले रहे हैं।

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