प्रयागराज माघ मेला : बारिश में धुली तैयारी, कहीं दलदल तो कहीं धंसीं सड़कें, पांच दिन बाद शुरू हो जाएगा मेला
पिछले वर्ष अक्तूबर तक बारिश होती रही तो कछारी इलाका पानी में डूबा रहा। इसकी वजह से मेले की तैयारी देर से शुरू हो पाई। इसका नतीजा है कि मकर संक्रांति से मेला शुरू हो जाएगा लेकिन अभी तक सुविधा पर्ची ही नहीं बट पाई है।
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मंडलायुक्त संजय गोयल की अध्यक्षता में शुक्रवार को आईसीसीसी (इंटीग्रेटेट सेंट्रल कमांड सेंटर) में हुई बैठक में अफसर जहां एक तरफ स्नानार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं का खाका तैयार करने में जुटे थे वहीं दूसरी तरफ बारिश ने अब तक की तैयारियों पर पानी फेर दिया। लगातार दो दिनों से हो रही बारिश में माघ मेले की तैयारियां बुरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। पूरे मेला क्षेत्र में एक बार फिर जगह-जगह पानी लगने के साथ दलदल की स्थिति बन गई है। कई जगहों पर सड़कें भी धंस गई हैं। मुश्किल यह कि लगातार बारिश की वजह से काम की रफ्तार पर भी ब्र्रेेक लग गया है।
पिछले वर्ष अक्तूबर तक बारिश होती रही तो कछारी इलाका पानी में डूबा रहा। इसकी वजह से मेले की तैयारी देर से शुरू हो पाई। इसका नतीजा है कि मकर संक्रांति से मेला शुरू हो जाएगा लेकिन अभी तक सुविधा पर्ची ही नहीं बट पाई है। ऐसे में लगातार बारिश से प्रशासन तथा मेला क्षेत्र में कैंप लगाने वाली संस्थाओं की परेशानी और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि हर सेक्टर में कई जगहों पर पानी भर गया है तथा सड़कें धंस गई हैं। इसकी वजह से काम भी रुक गया है। ऐेसे में सवाल खड़ा हो गया है कि 14 जनवरी से पहले मेला कैसे आकार ले पाएगा।
अभी तक कल्पवासियों का विवरण ही उपलब्ध नहीं
मेला क्षेत्र में आने वाले कल्पवासियों की संभावित संख्या का भी अभी तक आंकलन नहीं हो सका है। विभिन्न संस्थाओं में कल्पवासियों के कैंप लगते हैं। कल्पवासी भी संबंधित संस्थाओं के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में मेला प्रशासन की ओर से संस्थाओं से निर्धारित प्रारूप में कल्पवासियों की संभावित संख्या तथा अन्य विवरण मांगे जाते हैं लेकिन अभी तक इस औपचारिकता की शुरुआत नहीं हो पाई है।
हर सेक्टर में होगा शिकायत रजिस्टर
मेला क्षेत्र के हर सेक्टर में शिकायत रजिस्टर होगा। श्रद्धालु इस पर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर तथा अन्य विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। ताकि, उनसे पूछा जा सके कि शिकायतों का निस्तारण समय से हुआ या नहीं। मंडलायुक्त संजय गोयल ने शुक्रवार को समीक्षा बैठक में इस बाबत आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने सफाई, अस्पताल, चकर्ड प्लेट बिछाने, शौचालयों का निर्माण, जलापूर्ति आदि सुविधाओं की बिंदुवार समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए।
चकर्ड प्लेट बिछाने का काम ठीक नहीं पाया गया। इस पर उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से स्पष्टीकरण तलब किया। साथ ही जल्द से जल्द काम पूरा कर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए भी कहा। अरैल क्षेत्र में कटान रोकने के प्रयासों की प्रगति भी धीमी पाई गई। इस पर मंडलायुक्त ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता स्पष्टीकरण मांगा। बैठक में डीएम संजय कुमार खत्री, मेलाधिकारी शेषमणि पांडेय आदि मौजूद रहे।
मेला क्षेत्र बनेगा एल-1 अस्पताल
कोविड संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए मेला क्षेत्र में एल-1 अस्पताल बनाया जाएगा। मंडलायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इस बाबत आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं की नियमित जांच एवं टीकाकरण के भी निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने कोविड प्रोटोकाल का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आधे तीर्थपुरोहितों को अबतक नहीं मिली भूमि, न ही सुविधाएं
तीर्थपुरोहित प्रयागवाल समाज की ओर से तैयारियों को लेकर माघ मेला प्रशासन केरवैये पर रोष प्रकट किया गया। संस्था अध्यक्ष अमितराज वैद्य ने कहा, मेला प्रसाशन का रवैया शुरू से ही निराशाजनक रहा। भूमि आवंटन में जानबूझकर की गई देरी की वजह से तकरीबन पचास प्रतिशत तीर्थपुरोहितों को भूमि नहीं आवंटित हो सकी है। अब खराब मौसम की वजह से दो दिनों से सभी काम ठप हैं। वहीं जिन तीर्थपुरोहितों को भूमि मिल चुकी है, उन्हें सुविधा पर्ची के अभाव में सामान नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में तैयारियां अधूरी पड़ी हैं। ऐसे में 12 जनवरी से कल्पवासियों के आने के बाद उन्हें असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा।
तीर्थपुरोहित बलराम शर्मा ने भी मेला प्रशासन पर जानबूझकर भूमि आवंटन में देरी करने का आरोप लगाया। कहा, तीर्थपुरोहितों के यहां ही बड़ी संख्या में कल्पवासियों का ठौर होता है लेकिन तीर्थपुरोहितों की ही उपेक्षा की जाती है। यमुना बैंक रोड स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में श्रवण कुमार शर्मा के संयोजन में हुई बैठक में असीम भारद्वाज, गौतम पांडेय, महामंत्री चंदन तिवारी, गोपाल काला, बलराम शर्मा, विजय मिश्रा, शिवम मिश्रा, गोकूल पाठक, प्रदीप कुमार शर्मा, रवि भारद्वाज, अविरल मिश्रा, राहुल तिवारी आदि मौजूद थे।