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प्रयागराज माघ मेला : गंदा हुआ जल, माघ मेला से पहले संगम पर टूटा निर्मल गंगा का सपना
Tue, 04 Jan 2022 04:07 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 04 Jan 2022 04:07 AM IST
सार
कानपुर की टेनरियों के अलावा शिवकुटी, झूंसी और दारागंज के नालों से गंदा पानी गंगा में सीधे जा रहा है। इससे रामघाट से लेकर कई घाटों पर सोमवार को काला और मटमैला गंगा जल आने लगा।
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Prayagraj News : संगम तट।
- फोटो : प्रयागराज
विस्तार
माघ मेले में संगम पर संतों-भक्तों को निर्मल गंगा की धारा उपलब्ध कराने की योगी आदित्यनाथ सरकार की मंशा पर पानी फिर सकता है। मकर संक्रांति के प्रथम स्नान पर्व से पहले संगम समेत अन्य स्नान घाटों पर गंगा जल काला पड़ने लगा है। इसे लेकर तीर्थपुरोहितों ने कड़ी आपत्ति जताई है। प्रयागवाल सभा ने सोमवार को काला पड़ रहे गंगा जल को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। तीर्थपुरोहितों ने चेताया कि अगर खुले नालों को बंद नहीं किया गया तो वह संघर्ष के लिए बाध्य होंगे।
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कल्पवासियों और संतों को निर्मल गंगा का प्रवाह मिलेगा या नहीं यह काफी हद तक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इच्छा शक्ति पर निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दिनों माघमेले की समीक्षा के दौरान अफसरों को हिदायत दे चुके हैं, कि गंगा में गिरने वाले नालों को बंद कर दिया जाए, ताकि माघ मेले में संतों-भक्तों को निर्मल गंगा की धारा डुबकी लगाने के लिए प्राप्त हो सके, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका है।
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कानपुर की टेनरियों के अलावा शिवकुटी, झूंसी और दारागंज के नालों से गंदा पानी गंगा में सीधे जा रहा है। इससे रामघाट से लेकर कई घाटों पर सोमवार को काला और मटमैला गंगा जल आने लगा। काला गंगा जल देखे जाने के बाद तीर्थपुरोहितों ने कड़ी नाराजगी जताई है। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश चंद्र मिश्र ने टेनरियों के साथ ही शहर के नालों से गंदा पानी गंगा में बहाए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिवकुटी, दारागंज, झूंसी और अरैल के नालों को बंद नहीं किया गया तो तीर्थपुरोहित मेला प्रशासन का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
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