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प्रयागराज : किशोर न्याय बोर्ड ने 28 वर्ष बाद दो मामलों में सुनाया फैसला 

Sun, 30 Jan 2022 12:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 30 Jan 2022 12:39 PM IST
सार

15 वर्षीय एक बालक, जो अब वयस्क हो चुका है, ने अवैध रूप से मोर पाल रखा था। इसके खिलाफ वन्य जीव सरंक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया। मोर को किसी ने मार भी दिया। ऐसे में मारने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था।

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Prayagraj: Juvenile Justice Board has ruled in two cases after 28 years
अदालत

विस्तार

खुल्दाबाद किशोर न्याय बोर्ड ने 28 वर्ष पुराने दो मामले में शनिवार को फैसला सुनाया। दोनों ही मामलें में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। साथ ही बोर्ड ने आगे की कार्रवाई बंद करने का आदेश दिया।

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15 वर्षीय एक बालक, जो अब वयस्क हो चुका है, ने अवैध रूप से मोर पाल रखा था। इसके खिलाफ वन्य जीव सरंक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया। मोर को किसी ने मार भी दिया। ऐसे में मारने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
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18 वर्ष से कम आयु होने की वजह से मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड के सामने लाया गया। जांच में पता चला कि बालक मोर को दाना-पानी देता था। इसलिए मोर उसके पास चला आता था और वह पालतू जानवर जैसा बन गया था। 28 वर्ष पूर्व दर्ज मुकदमे की सुनवाई अभी तक चली आ रही थी।
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प्रधान मजिस्ट्रेट शिवार्थ खरे एवं सदस्य नरेंद्र कुमार साहू और शीला यादव ने शनिवार को फैसला सुनाया कि हिंसा न करने वाले जानवरों को प्यार देना बालकों का नैसर्गिक स्वभाव होता है। इसी वजह से वह मोर को दाना-पानी देता था। बालक को भान भी नहीं था कि वह नियम विरूद्ध काम कर रहा है। इसके अलावा 1993 से मुकदमा दर्ज है और आरोपी निरंतर कोर्ट का चक्कर लगा रहा है।



इस तरह से बालपन में अज्ञानतावश किए गए अपराध की सजा इस रूप में मिल चुकी है। इस आधार पर बोर्ड ने आरोपी को सजा न देने का फैसला सुनाया। साथ ही आगे की कार्रवाई बंद करने का आदेश दिया। इसी तरह के एक अन्य मामले में भी किशोर न्याय बोर्ड ने आगे की कार्रवाई को रोकने का आदेश दिया।

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