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अगले माह 35 वर्ष की हो जाएगी प्रयागराज एक्सप्रेस
Fri, 21 Jun 2019 02:09 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Jun 2019 02:09 AM IST
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PRAYAGRAJ
- फोटो : self
इलाहाबाद जंक्शन से नई दिल्ली जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस अगले माह 35 वर्ष की हो जाएगी। दिल्ली जाने वाले यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन प्रयागराज एक्सप्रेस के 35 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर रेलवे ने अगले माह एक कार्यक्रम करवाने की तैयारी की है। हालांकि अभी इसकी रूपरेखा तय नहीं की गई है।
दरअसल, 16 जुलाई 1984 को ही प्रयागराज एक्सप्रेस पहली बार इलाहाबाद जंक्शन से नई दिल्ली के लिए चली थी। तब इस ट्रेन का नंबर इलाहाबाद से 91 अप एवं नई दिल्ली से 92 डाउन था। इलाहाबाद जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक से इस ट्रेन को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ने हरी झंडी दिखाई थी। इसके उद्घाटन के दौरान तब इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के सांसद कांग्रेस के केपी तिवारी थे, जबकि चेयरमैन रेलवे बोर्ड का दायित्व केटीवी राघवन के पास था। इस दौरान रेलमंत्री के पद पर एबीए घानी खान चौधरी थे। उस दौरान इलाहाबाद स्थित डीआरएम ऑफिस उत्तर रेलवे नई दिल्ली के अधीन था। वर्तमान समय प्रयागराज को काफी अपग्रेड कर दिया गया है।
जब इसकी शुरूआत हुई थी तब इसमें लाल रंग के आईसीएफ/एससीआरईडब्ल्यू कपलिंग वाले कोच थे। उस दौरान प्रयागराज में वैक्यूम ब्रेक का इस्तेमाल होता था। उस दौरान ट्रेन में एक भी एसी को कोच नहीं थे। उसमें तीन कोच फर्स्ट क्लास के थे। इसके अलावा चार जनरल एवं आठ कोच स्लीपर श्रेणी के थे। वर्ष 2003 में उत्तर मध्य रेलवे के गठन के बाद इसमें पुराने कोचों को बदलकर आईसीएफ/सीबीसी वाले नीले रंग के कोचों को लगाया गया। इसमें वैक्यूम ब्रेेक की जगह एयर ब्रेक का इस्तेमाल किया जाता था। प्रयागराज एक्सप्रेस को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। 18 दिसंबर 2016 को प्रयागराज एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से लैस किया गया। इसके बाद इस वर्ष लगे कुंभ मेले के पूर्व प्रयागराज एक्सप्रेस के कोचों पर कुंभ मेला थीम आधारित विनायल रैपिंग की गई।
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जंक्शन से नई दिल्ली जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस में वर्तमान समय कुल 23 कोच है। इसमें एक कोच एसी फर्स्ट, तीन सेकंड एसी, चार एसी थ्री, 11 स्लीपर एवं दो कोच जनरल श्रेणी के हैं। इसके अलावा दो कोच जेनरेटर यान के हैं। इसके दोनों जनरल कोच में 200 सीटें यात्रियों के बैठने के लिए हैं। इसके अलावा एसी फर्स्ट में 24, एसी टू में 156, एसी थ्री में 288 एवं स्लीपर की 880 बर्थ है। कुल मिलाकर इसमें 1348 बर्थ हैं। रेलवे कर्मी बताते हैं कि प्रयागराज संचालन के बाद इसकी सभी श्रेणी में हमेशा प्रतीक्षा सूची रही है।
चार करोड़ से ज्यादा यात्री कर चुके हैं ट्रेन में सफर
प्रयागराज एक्सप्रेस के नाम एक और उपलब्धि भी है। इलाहाबाद जंक्शन से चलने वाली यह ऐसी ट्रेन है जिसके संचालन के बाद अब तक चार करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें सफर कर चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस ट्रेन से हर रोज 1700 से ज्यादा यात्री दिल्ली का सफर करते हैं। अगर दोनों ओर से जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा औसतन 3400 यात्री प्रतिदिन का है। इसके जनरल कोच में सीटें भले ही 100 हो लेकिन उसमें भीड़ हर रोज दो गुनी होती है। साल भर में ही प्रयागराज में औसतन 12 लाख से ज्यादा यात्री सफर कर लेते हैं। इस तरह ट्रेन संचालन के बाद से अब तक इसमें चार करोड़ से ज्यादा यात्रियों के सफर करने का अनुमान है।
कंडक्टर के रूप में प्रयागराज में तब गए थे शीतला प्रसाद
प्रयागराज एक्सप्रेस की शुरूआत 16 जुलाई 1984 को हुई थी। तब से लेकर अब तक प्रयागराज एक्सप्रेस का दोनों ओर से आवागमन प्लेटफार्म नंबर एक पर ही हो रहा है। इसके पहले सफर में कंडक्टर के रूप में इलाहाबाद जंक्शन से शीतला प्रसाद श्रीवास्तव गऐ थे। वर्तमान में शीतला प्रसाद श्रीवास्तव सीआईटी प्रशासन के पद पर ही इलाहाबाद जंक्शन पर कार्यरत है। इसके अलावा वे एनसीआरएमयू के मंडल मंत्री भी हैं। शीतला प्रसाद ने बताया कि जब ट्रेन की शुरूआत हुई तब इसके स्लीपर का किराया 115 रुपये के आसपास था। फर्स्ट क्लास का किराया भी 400 रुपये से कुछ अधिक था।
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दरअसल, 16 जुलाई 1984 को ही प्रयागराज एक्सप्रेस पहली बार इलाहाबाद जंक्शन से नई दिल्ली के लिए चली थी। तब इस ट्रेन का नंबर इलाहाबाद से 91 अप एवं नई दिल्ली से 92 डाउन था। इलाहाबाद जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक से इस ट्रेन को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजेंद्र कुमारी बाजपेयी ने हरी झंडी दिखाई थी। इसके उद्घाटन के दौरान तब इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र के सांसद कांग्रेस के केपी तिवारी थे, जबकि चेयरमैन रेलवे बोर्ड का दायित्व केटीवी राघवन के पास था। इस दौरान रेलमंत्री के पद पर एबीए घानी खान चौधरी थे। उस दौरान इलाहाबाद स्थित डीआरएम ऑफिस उत्तर रेलवे नई दिल्ली के अधीन था। वर्तमान समय प्रयागराज को काफी अपग्रेड कर दिया गया है।
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जब इसकी शुरूआत हुई थी तब इसमें लाल रंग के आईसीएफ/एससीआरईडब्ल्यू कपलिंग वाले कोच थे। उस दौरान प्रयागराज में वैक्यूम ब्रेक का इस्तेमाल होता था। उस दौरान ट्रेन में एक भी एसी को कोच नहीं थे। उसमें तीन कोच फर्स्ट क्लास के थे। इसके अलावा चार जनरल एवं आठ कोच स्लीपर श्रेणी के थे। वर्ष 2003 में उत्तर मध्य रेलवे के गठन के बाद इसमें पुराने कोचों को बदलकर आईसीएफ/सीबीसी वाले नीले रंग के कोचों को लगाया गया। इसमें वैक्यूम ब्रेेक की जगह एयर ब्रेक का इस्तेमाल किया जाता था। प्रयागराज एक्सप्रेस को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। 18 दिसंबर 2016 को प्रयागराज एक्सप्रेस को एलएचबी रैक से लैस किया गया। इसके बाद इस वर्ष लगे कुंभ मेले के पूर्व प्रयागराज एक्सप्रेस के कोचों पर कुंभ मेला थीम आधारित विनायल रैपिंग की गई।
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जंक्शन से नई दिल्ली जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस में वर्तमान समय कुल 23 कोच है। इसमें एक कोच एसी फर्स्ट, तीन सेकंड एसी, चार एसी थ्री, 11 स्लीपर एवं दो कोच जनरल श्रेणी के हैं। इसके अलावा दो कोच जेनरेटर यान के हैं। इसके दोनों जनरल कोच में 200 सीटें यात्रियों के बैठने के लिए हैं। इसके अलावा एसी फर्स्ट में 24, एसी टू में 156, एसी थ्री में 288 एवं स्लीपर की 880 बर्थ है। कुल मिलाकर इसमें 1348 बर्थ हैं। रेलवे कर्मी बताते हैं कि प्रयागराज संचालन के बाद इसकी सभी श्रेणी में हमेशा प्रतीक्षा सूची रही है।
चार करोड़ से ज्यादा यात्री कर चुके हैं ट्रेन में सफर
प्रयागराज एक्सप्रेस के नाम एक और उपलब्धि भी है। इलाहाबाद जंक्शन से चलने वाली यह ऐसी ट्रेन है जिसके संचालन के बाद अब तक चार करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें सफर कर चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस ट्रेन से हर रोज 1700 से ज्यादा यात्री दिल्ली का सफर करते हैं। अगर दोनों ओर से जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा औसतन 3400 यात्री प्रतिदिन का है। इसके जनरल कोच में सीटें भले ही 100 हो लेकिन उसमें भीड़ हर रोज दो गुनी होती है। साल भर में ही प्रयागराज में औसतन 12 लाख से ज्यादा यात्री सफर कर लेते हैं। इस तरह ट्रेन संचालन के बाद से अब तक इसमें चार करोड़ से ज्यादा यात्रियों के सफर करने का अनुमान है।
कंडक्टर के रूप में प्रयागराज में तब गए थे शीतला प्रसाद
प्रयागराज एक्सप्रेस की शुरूआत 16 जुलाई 1984 को हुई थी। तब से लेकर अब तक प्रयागराज एक्सप्रेस का दोनों ओर से आवागमन प्लेटफार्म नंबर एक पर ही हो रहा है। इसके पहले सफर में कंडक्टर के रूप में इलाहाबाद जंक्शन से शीतला प्रसाद श्रीवास्तव गऐ थे। वर्तमान में शीतला प्रसाद श्रीवास्तव सीआईटी प्रशासन के पद पर ही इलाहाबाद जंक्शन पर कार्यरत है। इसके अलावा वे एनसीआरएमयू के मंडल मंत्री भी हैं। शीतला प्रसाद ने बताया कि जब ट्रेन की शुरूआत हुई तब इसके स्लीपर का किराया 115 रुपये के आसपास था। फर्स्ट क्लास का किराया भी 400 रुपये से कुछ अधिक था।