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Allahabad High Court News: बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय
Thu, 10 Sep 2020 01:30 PM IST
विनोद सिंह
प्रयागराज, न्यूज डेस्क
प्रयागराज, न्यूज डेस्क
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 10 Sep 2020 01:30 PM IST
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इलाहाबाद हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने जुलाई 1994 से मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक की वेतन भुगतान आदेश की अवमानना याचिका पर बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय कर दिया है। मगर, मामले की शीघ्र सुनवाई से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि आदेश की अवहेलना करने वाले बीएसए बलिया संतोष कुमार राय के खिलाफ आरोप निर्मित किया गया है।
कोविड 19 के प्रकोप के कारण अभी सामान्य तरीके से कोर्ट नहीं चल रही है। जब सामान्य स्थिति हो तो सुनवाई की माग में दोबारा अर्जी दाखिल की जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा की अवमानना याचिका पर दाखिल अर्जी को निरस्त करते हुए दिया है ।
याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह ने बहस की। उनका कहना है कि याची दो जुलाई 94 से जूनियर हाईस्कूल बलिया में बिना वेतन के पढ़ा रहा है। वह भुखमरी के कगार पर है। उसकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में की गई है। हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2002 को याचिका मंजूर कर ली और बीएसए को नियमित वेतन भुगतान का निर्देश दिया।
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साथ ही 9 फीसदी ब्याज के साथ बकाए वेतन का तीन माह में भुगतान करने का भी निर्देश दिया है, जिसका पालन नहीं किया गया है। कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट द्वारा आदेश पालन का समय दिया गया, फिर भी पालन नहीं किया गया तो कोर्ट ने आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का अवमानना आरोप निर्मित किया और जवाब मांगा है। 23 जुलाई 19 को याचिका की सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद लाकडाउन के कारण सुनवाई नहीं हो सकी, तो याची ने कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। कोर्ट ने नार्मल कोर्ट कार्यवाही सुचारु रूप से चलाए जाने पर कोर्ट में आने की सलाह देते हुए अर्जी खारिज कर दी है।
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कोविड 19 के प्रकोप के कारण अभी सामान्य तरीके से कोर्ट नहीं चल रही है। जब सामान्य स्थिति हो तो सुनवाई की माग में दोबारा अर्जी दाखिल की जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा की अवमानना याचिका पर दाखिल अर्जी को निरस्त करते हुए दिया है ।
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याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह ने बहस की। उनका कहना है कि याची दो जुलाई 94 से जूनियर हाईस्कूल बलिया में बिना वेतन के पढ़ा रहा है। वह भुखमरी के कगार पर है। उसकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में की गई है। हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2002 को याचिका मंजूर कर ली और बीएसए को नियमित वेतन भुगतान का निर्देश दिया।
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साथ ही 9 फीसदी ब्याज के साथ बकाए वेतन का तीन माह में भुगतान करने का भी निर्देश दिया है, जिसका पालन नहीं किया गया है। कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट द्वारा आदेश पालन का समय दिया गया, फिर भी पालन नहीं किया गया तो कोर्ट ने आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का अवमानना आरोप निर्मित किया और जवाब मांगा है। 23 जुलाई 19 को याचिका की सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद लाकडाउन के कारण सुनवाई नहीं हो सकी, तो याची ने कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। कोर्ट ने नार्मल कोर्ट कार्यवाही सुचारु रूप से चलाए जाने पर कोर्ट में आने की सलाह देते हुए अर्जी खारिज कर दी है।