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एक लाख से अधिक नेट-पीएचडी मांग रहे नौकरी

Wed, 20 Apr 2016 12:09 AM IST
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 20 Apr 2016 12:09 AM IST
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PhD seeking more than a million net jobs
शिक्षा - फोटो : अमर उजाला
देशभर में एक लाख से अधिक युवा राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) क्वालीफाई करने और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं। ऐसे तकरीबन 65 हजार से अधिक युवाओं ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से 8,770 युवा तो जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) भी हासिल कर चुके हैं। इनसे कहीं अधिक संख्या ऐसे पीएचडी धारकों तथा नेट क्वालीफाई युवाओं की भी है, जिन्होंने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है लेकिन बेरोजगार हैं।
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देशभर के शिक्षण संस्थानों में अध्यापकों के हजारों पद खाली हैं। अकेले इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कॉलेजों में शिक्षकों के 1500 से अधिक पद खाली हैं। प्रदेश के सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पांच हजार से अधिक खाली पदों पर सात साल से कोई भर्ती नहीं हुई है। देश के ज्यादातर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अध्यापकों के 50 फीसदी तक पद रिक्त हैं। कई ऐसे भी कॉलेज हैं, जिनमें कई विषयों के एक भी शिक्षक नहीं हैं। 
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शिक्षकों की कमी को देखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित एक कमेटी ने 2009 से पहले के पंजीकृत पीएचडी धारकों को भी असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए योग्य माना है। इनके लिए नेट अनिवार्य नहीं होगा। वहीं 18 अप्रैल तक 65 हजार नेट और पीएचडी धारकों ने यूजीसी के ‘एकेडमिक जॉब्स फॉर नेट-सेट-पीएचडी नामक’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराके नौकरी की मांग की है। इनके अलावा 31,936 नेट, 7,698 स्टेट इलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) तथा 16,596 पीएचडी अभ्यर्थियों ने नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। दो दिन पहले तक रजिस्ट्रेशन कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 64 हजार 907 थी। हालांकि पोर्टल पर कई दिनों से ‘कोई भी नौकरी नहीं है’ का नोटिस दिखाई दे रहा है।
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‘विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में अध्यापकों की कमी शिक्षण कार्यों की बदहाली की मुख्य वजह है। असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए योग्य युवाओं की लंबी कतार है। देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा नेट और जेआरएफ क्वालीफाई करने वाले युवाओं की बड़ी संख्या है। अध्यापकों की नियुक्ति में धन की कमी भी कोई बाधा नहीं है। शिक्षा में सुधार के लिए अध्यापकों की जल्द नियुक्ति पर गंभीरता से पहल करने की जरूरत है।’
- प्रो. एमपी दुबे (कुलपति, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय)
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