PCS 2023 : एक समान मूल्यांकन से विज्ञान-मानविकी में नहीं रहेगा विवाद, वैकल्पिक विषय हटाने की तैयारी
पिछली कई परीक्षाओं की तरह इस बार भी पीसीएस-2022 में ऐसे चयनितों की संख्या काफी अधिक है, जिन्होंने स्नातक या परास्नातक की पढ़ाई तो विज्ञान विषय से की, लेकिन पीसीएस में मानविकी विषयों के साथ शामिल हुए और सफलता हासिल की।
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पिछली कई परीक्षाओं की तरह इस बार भी पीसीएस-2022 में ऐसे चयनितों की संख्या काफी अधिक है, जिन्होंने स्नातक या परास्नातक की पढ़ाई तो विज्ञान विषय से की, लेकिन पीसीएस में मानविकी विषयों के साथ शामिल हुए और सफलता हासिल की। फिलहाल विज्ञान और मानविकी के बीच का यह विवाद अब खत्म होने जा रहा है। पीसीएस-2023 से सभी अभ्यर्थियों का एक समान मूल्यांकन होगा।
पीसीएस-2022 में सफलता हासिल करने वाले कई अभ्यर्थियों ने बीएससी, एमएससी या बीटेक की पढ़ाई की और इसके बाद मानविकी विषय से पीसीएस परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे अभ्यर्थियों की रही, जिन्होंने समाजशास्त्र या भूगोल विषय से परीक्षा दी। हालांकि, आयोग की ओर से कोई आंकड़ा तो जारी नहीं किया गया, लेकिन चयनितों से बातचीत के आधार पर यह तस्वीर सामने आई है।
पीसीएस परीक्षा में विज्ञान और मानविकी विषय के बीच यह झगड़ा काफी पुराना है। मानविकी विषयों की पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थी अक्सर यह आरोप लगाते रहे हैं कि विज्ञान विषय वाले जो अभ्यर्थी वैकल्पिक विषय के रूप में मानविकी विषय के साथ अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देते हैं, स्केलिंग की आड़ में उन्हें अतिरिक्त अंक दे दिए जाते हैं। पीसीएस-2023 से वैकल्पिक विषय हटा दिए जाएंगे और इसकी जगह सामान्य अध्यय के यूपी विशेष दो प्रश्नपत्र शामिल किए जाएंगे।
वैकल्पिक विषय हटाए जाने से परीक्षा में स्केलिंग भी नहीं होगी और विज्ञान एवं मानविकी विषयाें के बीच चला आ रहा पुराना विवाद भी खत्म हो जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की तैयारी भी ज्यादा आसान हो जाएगी। इस बदलाव का अवसर पीसीएस-2023 के परिणाम में देखने को मिलेगा।
जानकारों का मानना है कि पैटर्न में यह बदलाव आने वाली परीक्षा को एक नई दिशा प्रदान करेगा। अब आईएएस और पीसीएस परीक्षा की एक साथ तैयारी से काम नहीं चलेगा। पीसीएस परीक्षा की तैयारी अलग से करनी होगी। पूर्वांचल के ज्यादातर जिलों में यह परंपरा रही हैं कि छात्र जब तक सफल नहीं होते और उनकी अधिकतम आयु सीमा पूरी नहीं होती, तब तक परीक्षा में शामिल होते रहते हैं। ऐसे परीक्षार्थियाें को बड़ी राहत मिलेगी।