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टीचरों को गेच्युटी मिलने का रास्ता साफ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Nov 2014 12:46 AM IST
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निजी स्कूलों में तैनात टीचरों को ग्रेच्युटी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि यह व्यवस्था पहले से थी लेकिन ज्यादा निजी स्कूल अपने टीचरों को ग्रेच्युटी नहीं दे रहे थे। ऐसे ही एक मामले में सेंट जोसेफ कॉलेज से रिटायर शिक्षिका ने श्रम न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया, जिस पर निर्णय लेते हुए सहायक श्रमायुक्त ने सेंट जोसेफ कॉलेज को आदेश दिया है कि शिक्षिका को दो माह के भीतर ब्याज सहित ग्रेच्युटी का भुगतान कर दिया जाए।
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी ऐक्ट-1972 के तहत एक निर्धारित अवधि तक सेवा करने पर ग्रेच्युटी किए जाने का प्रावधान है। इस ऐक्ट में यह भी बताया गया है कि ग्रेच्युटी किसे मिलेगी लेकिन इसमें टीचरों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी। ऐसे में 2009 में इस ऐक्ट में संशोधित करते हुए टीचरों को भी ग्रेच्युटी भुगतान किए जाने की व्यवस्था कर दी गई। साथ ही यह प्रावधान भी किया गया कि ग्र्रेच्युटी का लाभ एक अप्रैल 1997 के बाद रिटायर होने वाले टीचरों को ही दिया जाएगा। व्यवस्था होने के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल-कॉलेजों में टीचरों को ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
इनमें से एक सेंट जोसेफ कॉलेज है, जहां से रिटायर हुई शिक्षिका शहरनाज गांधी ने ग्रेच्युटी भुगतान के लिए श्रम न्यायालय में वाद दाखिल किया। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सहायक श्रमायुक्त डॉ. दिव्य प्रताप सिंह ने सेंट जोसेफ कॉलेज शहरनाज को दो लाख 28 हजार 300 रुपये ग्रेच्युटी का भुगतान आदेश जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से करे, जो ‘उप श्रम आयुक्त इलाहाबाद’ के पदनाम से देय होगा। साथ ही सेवानिवृत्ति की तारीख 31 मार्च 2003 से वास्तविक भुगतान जमा करने की तिथि तक आठ फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज की रकम का भी भुगतान करे। इस आदेश के बाद उन तमाम प्राइवेट टीचरों के लिए ग्रेच्युटी पाने का रास्ता खुल गया है, जो इसके पात्र हैं।
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पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी ऐक्ट-1972 के तहत एक निर्धारित अवधि तक सेवा करने पर ग्रेच्युटी किए जाने का प्रावधान है। इस ऐक्ट में यह भी बताया गया है कि ग्रेच्युटी किसे मिलेगी लेकिन इसमें टीचरों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी। ऐसे में 2009 में इस ऐक्ट में संशोधित करते हुए टीचरों को भी ग्रेच्युटी भुगतान किए जाने की व्यवस्था कर दी गई। साथ ही यह प्रावधान भी किया गया कि ग्र्रेच्युटी का लाभ एक अप्रैल 1997 के बाद रिटायर होने वाले टीचरों को ही दिया जाएगा। व्यवस्था होने के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल-कॉलेजों में टीचरों को ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
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इनमें से एक सेंट जोसेफ कॉलेज है, जहां से रिटायर हुई शिक्षिका शहरनाज गांधी ने ग्रेच्युटी भुगतान के लिए श्रम न्यायालय में वाद दाखिल किया। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सहायक श्रमायुक्त डॉ. दिव्य प्रताप सिंह ने सेंट जोसेफ कॉलेज शहरनाज को दो लाख 28 हजार 300 रुपये ग्रेच्युटी का भुगतान आदेश जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से करे, जो ‘उप श्रम आयुक्त इलाहाबाद’ के पदनाम से देय होगा। साथ ही सेवानिवृत्ति की तारीख 31 मार्च 2003 से वास्तविक भुगतान जमा करने की तिथि तक आठ फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज की रकम का भी भुगतान करे। इस आदेश के बाद उन तमाम प्राइवेट टीचरों के लिए ग्रेच्युटी पाने का रास्ता खुल गया है, जो इसके पात्र हैं।
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