स्वास्थ्य : माता-पिता की धूम्रपान की लत नवजातों में बढ़ा रही हार्निया का खतरा
चिकित्सकों की मानें तो हार्निया होने के कारण आंत फंसने का डर रहता है। इसके कारण बच्चे की जान भी जा सकती है। ऐसे में ऑपरेशन करना जरूरी हो जाता है। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि नवजात में हार्निया होने के पीछे धूम्रपान के अलावा माता में कैल्शियम और विटामिन की कमी होना भी प्रमुख कारण है।
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धूम्रपान की लत लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से ही बर्बाद नहीं कर रही, बल्कि इसका असर नवजातों पर भी पड़ रहा है। दरअसल, अगर माता-पिता में सिगरेट, पान-मसाला व शराब की लत है तो उनके शिशु में हार्निया का खतरा बना रहता है। इस प्रकार के 20 से 25 मामले हर महीने सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं दो दिन पहले जन्मे बच्चों में भी हार्निया का ऑपरेशन किया जा रहा है।
चिकित्सकों की मानें तो हार्निया होने के कारण आंत फंसने का डर रहता है। इसके कारण बच्चे की जान भी जा सकती है। ऐसे में ऑपरेशन करना जरूरी हो जाता है। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि नवजात में हार्निया होने के पीछे धूम्रपान के अलावा माता में कैल्शियम और विटामिन की कमी होना भी प्रमुख कारण है। हालांकि, 70 फीसदी मामलों में माता-पिता में धूम्रपान की लत ही प्रमुख कारण कारण होता है।
बता दें कि एब्डॉमिनल कैविटी (पेरिटोनियम) द्वारा बनाई गई थैली मांसपेशियों को घेरे रहती है। जब यह थैली एब्डॉमिनल वॉल के कमजोर होने पर उस भाग से बाहर निकल आती है, तो इस समस्या को हार्निया कहा जाता है। यह समस्या कई बच्चों में देखी जाती है। इस कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हार्निया होने का मुख्य कारण मांसपेशियों का कमजोर होना हो सकता है। सूजन, तेज दर्द होना, उल्टी होना और बुखार आना इसके लक्षण हो सकते हैं। बच्चे को इससे राहत दिलाने के लिए सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है।
शिशुओं में होते हैं दो प्रकार के हार्निया
इनगुइनल हार्निया : इस प्रकार के हार्निया का पता चलते ही डॉक्टर सर्जरी करने की सलाह दे सकते हैं, क्योंकि इस मामले में आंत के इनगुइनल कैनल में फंसने का डर रहता है। ऐसा होने पर आंत में होने वाला रक्त प्रवाह रुक सकता है, जिससे आंत क्षतिग्रस्त हो सकती है। ऐसे ही दो मामले हाल ही में चिल्ड्रेन अस्पताल में आए थे, जिसमें एक शिशु चार माह का और दूसरा आठ माह का था। इन दोनों में इनगुइनल हार्निया की समस्या थी। इनका आनन-फानन ऑपरेशन करना पड़ा था।
अम्बिलिकल हार्निया : अधिकतर मामलों में अम्बिलिकल हार्निया की समस्या शिशु के तीन-चार वर्ष का होने तक अपने आप ठीक हो जाती है। अगर यह हार्निया समय के साथ बढ़ता जाता है और दबाने पर भी वापस अंदर नहीं जाता तो डॉक्टर इस अवस्था में अम्बिलिकल हार्निया को ठीक करने के लिए सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी के दौरान मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए सिंथेटिक जाल भी लगाया जाता है। इससे हार्निया को फिर से बाहर निकलने से रोका जा सकता है।
माता-पिता को चाहिए कि वे धूम्रपान न करें, क्योंकि इसका असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है। इसके अलावा मां को गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन का भरपूर सेवन करना चाहिए। - डॉ. डी कुमार, सर्जन, एसआरएन हॉस्पिटल