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पाक पोशाक, जायके ने जीता दिल
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 17 May 2016 02:30 AM IST
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टूरिस्ट बंग्लों में इंडो पाक फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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पाकिस्तान से अपनी संस्कृति, तहजीब और स्वाद से रूबरू कराने आने मेहमान दिलों को जीत कर और मीठी यादों के साथ विदा हुए। होटल इलावर्त में चार दिनी इंडो-पाक लाइफ स्टाइल प्रदर्शनी एवं फूड फेस्टिवल ‘अमन के सात रंग’ के अंतिम दिन सोमवार को शहरियों की भारी भीड़ जुटी। पाकिस्तानी कपड़ों और लजीज व्यंजनों का सभी ने खूब लुत्फ उठाया। शहर के अपनेपन को देखकर पाक मेहमान बेहद खुश दिखे। कराची से आए शकील अहमद और मुल्तान के अब्दुल रहमान ने कहा, यहां आकर काफी अच्छा लगा । शहरियों ने सामान को खूब सराहा। हमारी ख्वाहिश है कि जल्द ही फिर से हमें यहां आने मौका मिले।
फैब्रिक्स पर चुनरी पर गोटा पट्टी, तोला वर्क, साड़ियाें-सूट पर तारकशी, पत्तीवर्क, कराची वर्क, प्रिंटेड लॉन के साथ ही कुर्तियों, शहारा, शमामा सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। वहीं पाकिस्तानी व्यंजनों में सिंधी बिरयानी, कराची हलवा, चिकेन नहारी, लाहौरी चिकेन, चिकेन बर्रा का स्वाद शहरियों के सिर चढ़कर बोला। फेस्टिवल में पहुंचे अमन ने कहा, पहली बार पाक जायके का मौका मिला। पाक जायका उम्दा है। भारतीय मसालों और बनाने के तरीके और वहां के स्वाद में काफी अंतर हैं। सिविल लाइंस की प्रियंका ने कहा, कराची हलवा हमारे यहां बनने वाले हलवे से एकदम अलग हैं। इसका टेक्सचर काफी क्रीमी था। करेली की नाजिया और दारागंज के नमन ने कहा, पाक जायके को चखने और कपड़ों को करीब से देखने, समझने का मौका पहली बार मिला। बहुत कुछ समान होते हुए भी अंतर हैं। आयोजक स्वाति मलिक ने कहा, मेरी कोशिश है कि यहां के कलाकारों को भी पाक में अपनी कला दिखाने का मौका मिले। इस दिशा में बातचीत जारी है।
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फैब्रिक्स पर चुनरी पर गोटा पट्टी, तोला वर्क, साड़ियाें-सूट पर तारकशी, पत्तीवर्क, कराची वर्क, प्रिंटेड लॉन के साथ ही कुर्तियों, शहारा, शमामा सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। वहीं पाकिस्तानी व्यंजनों में सिंधी बिरयानी, कराची हलवा, चिकेन नहारी, लाहौरी चिकेन, चिकेन बर्रा का स्वाद शहरियों के सिर चढ़कर बोला। फेस्टिवल में पहुंचे अमन ने कहा, पहली बार पाक जायके का मौका मिला। पाक जायका उम्दा है। भारतीय मसालों और बनाने के तरीके और वहां के स्वाद में काफी अंतर हैं। सिविल लाइंस की प्रियंका ने कहा, कराची हलवा हमारे यहां बनने वाले हलवे से एकदम अलग हैं। इसका टेक्सचर काफी क्रीमी था। करेली की नाजिया और दारागंज के नमन ने कहा, पाक जायके को चखने और कपड़ों को करीब से देखने, समझने का मौका पहली बार मिला। बहुत कुछ समान होते हुए भी अंतर हैं। आयोजक स्वाति मलिक ने कहा, मेरी कोशिश है कि यहां के कलाकारों को भी पाक में अपनी कला दिखाने का मौका मिले। इस दिशा में बातचीत जारी है।
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