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जेल में बंद रहे अभ्यर्थी का मेडिकल कराने का आदेश
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जेल में बंद रहे अभ्यर्थी का मेडिकल कराने का आदेश
जेल जाने के कारण पुलिस भर्ती बोर्ड ने मेडिकल कराने से कर दिया था मना
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती 2018 में आवेदन करने वाले जेल में बंद रहे अभ्यर्थी का मेडिकल सीएमओ से कराने का आदेश दिया है। पुलिस भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थी के जेल में होने के कारण उसका मेडिकल कराने से इंकार कर दिया था। जेल से छूटने के बाद अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मेडिकल कराए जाने की मांग की थी।
याची गौरव कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने 2018 की पुलिस भर्ती के लिए आवेदन किया था। वह फिजिकल टेस्ट और अन्य परीक्षाओं में सफल हुआ। इस बीच निजी रंजिश में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई, जिसकी वजह से उसे जेल जाना पड़ा। इस दौरान भर्ती बोर्ड ने 12 अप्रैल 19 और 21 अप्रैल 19 को मेडिकल टेस्ट के लिए पत्र भेजा मगर, जेल में होने के कारण याची मेडिकल में शामिल नहीं हो सका ।
जेल से छूटने के बाद वह मेडिकल के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड गया तो उसे इस आधार पर मेडिकल कराने से मना कर दिया गया कि याची जेल गया था। अधिवक्ता का कहना था कि याची फर्जी मुकदमों में फंसाया गया था और अदालत ने उसे बाइज्जत बरी किया है। जिस तिथि को मेडिकल के लिए पत्र भेजा गया था, उस तिथि को उपस्थित होना संभव नहीं था क्योंकि याची जेल में था। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए पुलिस भर्ती बोर्ड से कहा है कि याची का सीएमओ से मेडिकल कराया जाए। याचिका निस्तारित कर दी है।
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जेल जाने के कारण पुलिस भर्ती बोर्ड ने मेडिकल कराने से कर दिया था मना
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस भर्ती 2018 में आवेदन करने वाले जेल में बंद रहे अभ्यर्थी का मेडिकल सीएमओ से कराने का आदेश दिया है। पुलिस भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थी के जेल में होने के कारण उसका मेडिकल कराने से इंकार कर दिया था। जेल से छूटने के बाद अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मेडिकल कराए जाने की मांग की थी।
याची गौरव कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची ने 2018 की पुलिस भर्ती के लिए आवेदन किया था। वह फिजिकल टेस्ट और अन्य परीक्षाओं में सफल हुआ। इस बीच निजी रंजिश में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई, जिसकी वजह से उसे जेल जाना पड़ा। इस दौरान भर्ती बोर्ड ने 12 अप्रैल 19 और 21 अप्रैल 19 को मेडिकल टेस्ट के लिए पत्र भेजा मगर, जेल में होने के कारण याची मेडिकल में शामिल नहीं हो सका ।
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जेल से छूटने के बाद वह मेडिकल के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड गया तो उसे इस आधार पर मेडिकल कराने से मना कर दिया गया कि याची जेल गया था। अधिवक्ता का कहना था कि याची फर्जी मुकदमों में फंसाया गया था और अदालत ने उसे बाइज्जत बरी किया है। जिस तिथि को मेडिकल के लिए पत्र भेजा गया था, उस तिथि को उपस्थित होना संभव नहीं था क्योंकि याची जेल में था। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए पुलिस भर्ती बोर्ड से कहा है कि याची का सीएमओ से मेडिकल कराया जाए। याचिका निस्तारित कर दी है।
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