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बाहर किए अभ्यर्थियों का ग्रुप डिस्कशन कराने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 15 Jul 2017 01:18 AM IST
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हाईकोर्ट ने दरोगा भर्ती 2011 के संशोधित परिणाम में चयन सूची से बाहर हुए 19 अभ्यर्थियों को शनिवार 15 जुलाई को होने जा रहे ग्रुप डिस्कशन में शामिल करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब मांगा है कि व्हाइटनर लगाने वालों की नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद उनको किस प्रकार से संशोधित परिणाम में फिर से शामिल कर लिया गया।
अमित सिंह और 18 अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल कर संशोधित परिणाम को चुनौती दी है। याचीगण के अधिवक्ताओं अनूप त्रिवेदी और विभू राय की दलील है कि हाईकोर्ट ने व्हाइटनर लगाने वाले 3038 अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। इनको विशेष अपील और सुप्रीमकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। सुप्रीमकोर्ट ने याचिका करने वाले 810 व्हाइटनर लगाने वाले अभ्यर्थियों को ही अपवाद स्वरूप चयन में शामिल करने का आदेश दिया था।
इसके बाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गलत आरक्षण लागू करने के आधार पर लिखित परीक्षा का परिणाम रद्द कर संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के पालन में संशोधित परिणाम जारी करते हुए छह जून 2017 को ग्रुप डिस्कशन के लिए अधिसूचना जारी की गई। इससे याचीगण को पता चला कि संशोधित परिणाम में उन अभ्यर्थियों को भी शामिल कर लिया गया जिनको व्हाइटनर इस्तेमाल करने के कारण हाईकोर्ट के आदेश से बाहर कर दिया गया था।
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इसका नतीजा यह हुआ कि मेरिट लिस्ट ऊपर चली गई और याचीगण जो पूर्व में चयनित हो चुके थे, चयन सूची से बाहर हो गए। कोर्ट ने याचीगण(19) अभ्यर्थियों को ग्रुप डिस्कशन में शामिल करने का निर्देश दिया है मगर कहा है कि उनको परिणाम जारी नहीं किया जाएगा।
व्हाइटनर लगाने वाले 3038 अभ्यर्थियों में से 810 ने सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की दलील थी कि सुप्रीमकोर्ट ने व्हाइटनर के इस्तेमाल को गलत माना, मगर याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों को अपवाद स्वरूप चयन सूची में शामिल करने का आदेश दिया था। सुप्रीमकोर्ट ने यह आदेश महाधिवक्ता इस आश्वासन पर दिया कि सरकार के पास तमाम पद रिक्त हैं और याचीगण को समायोजित किया जा सकता है।
दरोगा भर्ती 2011 की लिखित परीक्षा का पूरा परिणाम हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अभिषेक सिंह की याचिका पर गलत क्षैतिज आरक्षण लागू करने के कारण रद्द कर दिया था। विशेष अपील में भी एकलपीठ के आदेश की पुष्टि हुई। इसके बाद जारी संशोधित परिणाम में उन 2228 व्हाइटनर लगाने वालों को भी शामिल कर लिया गया जिनका परिणाम हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है।
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अमित सिंह और 18 अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल कर संशोधित परिणाम को चुनौती दी है। याचीगण के अधिवक्ताओं अनूप त्रिवेदी और विभू राय की दलील है कि हाईकोर्ट ने व्हाइटनर लगाने वाले 3038 अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। इनको विशेष अपील और सुप्रीमकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। सुप्रीमकोर्ट ने याचिका करने वाले 810 व्हाइटनर लगाने वाले अभ्यर्थियों को ही अपवाद स्वरूप चयन में शामिल करने का आदेश दिया था।
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इसके बाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गलत आरक्षण लागू करने के आधार पर लिखित परीक्षा का परिणाम रद्द कर संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के पालन में संशोधित परिणाम जारी करते हुए छह जून 2017 को ग्रुप डिस्कशन के लिए अधिसूचना जारी की गई। इससे याचीगण को पता चला कि संशोधित परिणाम में उन अभ्यर्थियों को भी शामिल कर लिया गया जिनको व्हाइटनर इस्तेमाल करने के कारण हाईकोर्ट के आदेश से बाहर कर दिया गया था।
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इसका नतीजा यह हुआ कि मेरिट लिस्ट ऊपर चली गई और याचीगण जो पूर्व में चयनित हो चुके थे, चयन सूची से बाहर हो गए। कोर्ट ने याचीगण(19) अभ्यर्थियों को ग्रुप डिस्कशन में शामिल करने का निर्देश दिया है मगर कहा है कि उनको परिणाम जारी नहीं किया जाएगा।
व्हाइटनर लगाने वाले 3038 अभ्यर्थियों में से 810 ने सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की दलील थी कि सुप्रीमकोर्ट ने व्हाइटनर के इस्तेमाल को गलत माना, मगर याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों को अपवाद स्वरूप चयन सूची में शामिल करने का आदेश दिया था। सुप्रीमकोर्ट ने यह आदेश महाधिवक्ता इस आश्वासन पर दिया कि सरकार के पास तमाम पद रिक्त हैं और याचीगण को समायोजित किया जा सकता है।
दरोगा भर्ती 2011 की लिखित परीक्षा का पूरा परिणाम हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अभिषेक सिंह की याचिका पर गलत क्षैतिज आरक्षण लागू करने के कारण रद्द कर दिया था। विशेष अपील में भी एकलपीठ के आदेश की पुष्टि हुई। इसके बाद जारी संशोधित परिणाम में उन 2228 व्हाइटनर लगाने वालों को भी शामिल कर लिया गया जिनका परिणाम हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है।