फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   On the objection of Prayagraj scientist, green road will be investigated in Singapore

UP News :प्रयागराज के वैज्ञानिक की आपत्ति पर सिंगापुर में हरित सड़क की होगी जांच, पीएमओ ने चिट्ठी का भेजा जवाब

Thu, 19 Sep 2024 12:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Sep 2024 12:37 PM IST
सार

डॉ. अजय कुमार सोनकर ने बताया कि माइक्रो प्लास्टिक पर शोध के दौरान आए दिन नई जानकारियां सामने आ रहीं हैं। शोध में पता चला है कि वाहनाें के टायरों की आयु बढ़ाने के लिए अब उसमें प्लास्टिक का उपयोग होने लगा है, जबकि पहले रबर और कपड़े से टायर बनाए जाते थे। वहीं, जूते-चप्पल के सोल में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

विज्ञापन
On the objection of Prayagraj scientist, green road will be investigated in Singapore
अजय कुमार सोनकर, वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सिंगापुर में गैर पुनर्चक्रणीय प्लास्टिक कचरे का उपयोग करके हरित सड़क बनाई जाएगी। सिंगापुर के एक समाचार पत्र में यह खबर प्रकाशित होने पर जब सिंगापुर के कुछ वैज्ञानिकों ने प्रयागराज के वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर से संपर्क किया तो उन्होंने सिंगापुर के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसके खतरे बताए। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से वापस जवाब आया कि यह संवेदनशील मसला है और इसकी जांच की जाएगी।

विज्ञापन


डॉ. अजय सोनकर माइक्रोप्लास्टिक पर कई वर्षों से शोध कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके शोध को काफी सराहा गया है। डॉ. सोनकर के अनुसार पिछले दिनों सिंगापुर के एक समाचार पत्र में जब यह समाचार प्रकाशित हुआ कि वहां गैर पुनर्चक्रणीय प्लास्टिक से हरित सड़क बनाई जाएगी तो वहां के कुछ वैज्ञानिकों ने उनसे संपर्क किया।

विज्ञापन

डॉ. अजय कुमार सोनकर ने बताया कि माइक्रो प्लास्टिक पर शोध के दौरान आए दिन नई जानकारियां सामने आ रहीं हैं। शोध में पता चला है कि वाहनाें के टायरों की आयु बढ़ाने के लिए अब उसमें प्लास्टिक का उपयोग होने लगा है, जबकि पहले रबर और कपड़े से टायर बनाए जाते थे। वहीं, जूत-चप्पल के सोल में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वाहन चलाते समय या पैदल चलते वक्त घर्षण के कारण माइक्रो प्लास्टिक तेजी से बनने लगता है। ऐसे में गैर पुनर्चक्रणीय प्लास्टिक का उपयोग करके बनाए जाने वाली हरित सड़क से माइक्रो प्लास्टिक बनने की प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। माइक्रो प्लास्टिक खून के रास्ते फेफड़े, दिल, दिमाग में तेजी से पहुंच रहे हैं। इसकी वजह से ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, दमा जैसी बीमारियाें का दायरा बढ़ा है। इससे कैंसर भी हो रहा है।

पेड़-पौधों के डीएन तक डैमेज हो रहे हैं। ऐसे में सिंगापुर जैसे हरे-भरे देश को माइक्रो प्लास्टिक के बड़े खतरे का सामना करना होगा। गैर पुनर्चक्रणीय प्लास्टिक के इस्तेमाल से हरित सड़क बनाना आत्महत्या की ओर से कदम बढ़ाने जैसा है। डॉ. साेनकर ने अपने पत्र में इन अहम जानकारियों के साथ हरित सड़क से होने वाले खतरों के बारे में लिखा और प्रधानमंत्री कार्यालय को डेटा भी उपलब्ध कराया।
 

अब पीएमओ की ओर से डॉ. सोनकर को भेजे गए जवाबी पत्र में यह अहम जानकारी और डेटा उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया है। साथ ही डाॅ. सोनकर को बताया गया है कि उनकी ओर से उपलब्ध कराए गए डेटा का विश्लेषण किया जाएगा और इसे पूरे मामले देखने के लिए संबंधित एजेंसी को लगा दिया गया है। डॉ. अजय ने उम्मीद जताई है कि सिंगापुर सरकार पर्यावरण की दुश्मन ऐसी परियोजनाओं को अनुमति नहीं देगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed