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अब सीबीआई जांच में ही खुलेगा पेपर लीक का राज

Sun, 30 Jul 2017 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 30 Jul 2017 01:32 AM IST
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Now the CBI will open itself in the investigation of the paper leak
पीसीएस प्री का रिजल्ट
ज्यादा दिन नहीं बीते, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की दो बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। दोनों ही मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई, लेकिन आयोग ने अपने स्तर से न तो जांच कराई और न ही किसी पर कार्रवाई की। अब प्रदेश सरकार ने आयोग की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने का निर्णय लिया है। आयोग ने तो जांच नहीं कराई, लेकिन प्रतियोगी छात्रों को उम्मीद है कि पेपर लीक के इन मामलों में दोषी आयोग के कर्मचारी, अधिकारी और पदाधिकारी सीबीआई जांच के फंदे में जरूर फंसेंगे।
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पीसीएस-2015 पेपर लीक मामले में लखनऊ के कृष्णा नगर सदर थाने में एसटीएफ की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिस केेंद्र में पेपर लीक हुआ था, वहां परीक्षा शुरू होने से सवा दो घंटे पहले ही पेपर पहुंचा दिए गए थे। हालांकि, पेपर लीक होने के बाद आयोग ने उस पाली की परीक्षा रद्द कर दी थी और नए सिरे से परीक्षा कराई थी, लेकिन इस पूरे मामले में आयोग ने किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की। केंद्र पर पेपर पहुंचाए जाने की जिम्मेदारी आयोग की ही होती है। आखिर नियमों को दरकिनार कर पेपर सवा दो घंटे पहले केंद्र में कैसे पहुंचा, आयोग के अफसरों ने यह जानने की जरूरत भी नहीं समझी और न ही अपने स्तर से कोई जांच कराई।
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आरओ-एसआरओ 2016 पेपर लीक मामले में आयोजित इससे भी एक कदम आगे निकल गया। पेपर व्हाट्सएप पर वायरल होने के बावजूद आयोग यह मानने को तैयार नहीं हुआ कि पेपर लीक हुआ है। मामले में प्रतियोगी छात्रों ने काफी बवाल भी किया, लेकिन आयोग पर इसका भी कोई असर नहीं पड़ा। बाद में प्रतियोगियों को वरिष्ठ आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर का साथ मिला और उनके हस्तक्षेप पर मामला लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज किया गया। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय कहते हैं कि इन मामलों में आयोग के स्तर से कोई कार्रवाई न किए जाने से स्पष्ट हो जाता है कि पेपर लीक प्रकरण आयोग की मिलीभगत से हुआ। प्रतियोगियों की उम्मीद है कि सीबीआई जांच के दौरान इस मामले में दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।
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आयोग के अफसरों को इस बात की भनक माह भर पहले ही लग गई थी कि सरकार सीबीआई जांच कराने जा रही है। इसी वजह से आयोग ने सुधार के लिए तमाम प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए। इनमें से एक प्रस्ताव पेपर लीक के मामले रोकने के लिए सीसीटीवी खरीदने का भी है। आयोग का प्रस्ताव है कि पेपर की सील खोलने का काम सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में किया जाए ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
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