{"_id":"5736323c4f1c1b816b919efd","slug":"not-so-much-a-conspiracy-to-discredit-allahabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"कहीं इलाहाबाद को बदनाम करने की साजिश तो नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कहीं इलाहाबाद को बदनाम करने की साजिश तो नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 14 May 2016 01:34 AM IST
विज्ञापन
प्रदूषण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्वालियर और इलाहाबाद जैसे शहरों को दुनिया के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में शामिल किए जाने के पीछे कोई साजिश तो नहीं है। डब्ल्यूएचओ ने जिस तरह एक संस्था की ओर से जारी फर्जी आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट जारी की है, उसे देखकर यही लग रहा है। विशेषज्ञ और शहर के आम लोग भी मान रहे हैं कि यह इलाहाबाद को बदनाम करने की साजिश है। देश में ही कई शहर हैं, जहां इलाहाबाद से अधिक प्रदूषण है। अफसर भी परेशान हैं कि डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट से इलाहाबाद को कहीं स्मार्ट सिटी से हाथ न धोना पड़ जाए।
बता दें कि वर्ष 2011 में हुर्ह जनगणना के दौरान जारी आंकड़ों के मुताबिक इलाहाबाद विश्व में 137वां ऐसा शहर है जो सबसे तेजी से तरक्की कर रहा है। ऐसे ही कई कारणों से देश भर में जिन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चुना गया, उनमें इलाहाबाद भी शामिल है लेकिन डब्ल्यूएचओ की प्रदूषण पर जारी रिपोर्ट शहर की तरक्की में रोड़ा बन सकती है। अफसरों को चिंता सता रही है कि अमेरिका स्मार्ट सिटी से कहीं हाथ न पीछे खींच ले। हालांकि रिपोर्ट बिना किसी सर्वे या अध्ययन के जारी की गई है और इसपर फर्जी होने की मुहर भी लग गई है। शहरियों की मांग है कि इलाहाबाद को बदनाम करने वाली संस्था क्लीन एयर एशिया के देश में काम करने पर रोक लगा दी जाए। इस संस्था ने न सिर्फ इलाहाबाद और यूपी बल्कि देश का नाम भी बदनाम करने की साजिश की है।
‘इलाहाबाद की स्थिति और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट देखकर स्पष्ट है कि रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत और तथ्यों से परे है। इलाहाबाद में औद्योगिक इकाइयां नहीं हैं। अन्य शहरों के मुकाबले यहां वाहनों की संख्या भी बहुत कम है। जिन संस्था ने भी प्रदूषण के आंकड़े जारी किए हैं, उसने मौके पर अध्ययन नहीं किया। सिर्फ धूल के कणों के आधार पर इलाहाबाद को विश्व के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में शामिल कर लेना गलत है। सरकार को ऐसे फर्जी आंकड़े जारी करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’ -प्रो. एचएन मिश्र, पूर्व विभागध्यक्ष भूगोल, इविवि
विज्ञापन
‘जिसने भी प्रदूषण से संबंधित यह मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार की है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। इलाहाबाद में जिस स्तर के प्रदूषण की बात की जा रही है, वैसा होता तो यहां की स्थिति काफी बदतर होती और हर शख्स बीमार पड़ा होता।’ -शांतम परासर, छात्र
‘डब्ल्यूएचओ को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी है तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि रिपोर्ट किस आधार पर जारी की गई, क्योंकि जिस तरह इलाहाबाद को दुनिया के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया है, उस पर विश्वास कर पाना मुश्किल है।’ -आशीष केसरवानी, छात्र
‘यह बात सही है कि हर जगह प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है लेकिन इस पर भरोसा नहीं होता कि इलाहाबाद दुनिया के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में है। सरकार को डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की जांच करानी चाहिए।’ -अवनीश कुमार, छात्र
विज्ञापन
बता दें कि वर्ष 2011 में हुर्ह जनगणना के दौरान जारी आंकड़ों के मुताबिक इलाहाबाद विश्व में 137वां ऐसा शहर है जो सबसे तेजी से तरक्की कर रहा है। ऐसे ही कई कारणों से देश भर में जिन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चुना गया, उनमें इलाहाबाद भी शामिल है लेकिन डब्ल्यूएचओ की प्रदूषण पर जारी रिपोर्ट शहर की तरक्की में रोड़ा बन सकती है। अफसरों को चिंता सता रही है कि अमेरिका स्मार्ट सिटी से कहीं हाथ न पीछे खींच ले। हालांकि रिपोर्ट बिना किसी सर्वे या अध्ययन के जारी की गई है और इसपर फर्जी होने की मुहर भी लग गई है। शहरियों की मांग है कि इलाहाबाद को बदनाम करने वाली संस्था क्लीन एयर एशिया के देश में काम करने पर रोक लगा दी जाए। इस संस्था ने न सिर्फ इलाहाबाद और यूपी बल्कि देश का नाम भी बदनाम करने की साजिश की है।
विज्ञापन
‘इलाहाबाद की स्थिति और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट देखकर स्पष्ट है कि रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत और तथ्यों से परे है। इलाहाबाद में औद्योगिक इकाइयां नहीं हैं। अन्य शहरों के मुकाबले यहां वाहनों की संख्या भी बहुत कम है। जिन संस्था ने भी प्रदूषण के आंकड़े जारी किए हैं, उसने मौके पर अध्ययन नहीं किया। सिर्फ धूल के कणों के आधार पर इलाहाबाद को विश्व के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में शामिल कर लेना गलत है। सरकार को ऐसे फर्जी आंकड़े जारी करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’ -प्रो. एचएन मिश्र, पूर्व विभागध्यक्ष भूगोल, इविवि
विज्ञापन
‘जिसने भी प्रदूषण से संबंधित यह मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार की है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। इलाहाबाद में जिस स्तर के प्रदूषण की बात की जा रही है, वैसा होता तो यहां की स्थिति काफी बदतर होती और हर शख्स बीमार पड़ा होता।’ -शांतम परासर, छात्र
‘डब्ल्यूएचओ को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी है तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि रिपोर्ट किस आधार पर जारी की गई, क्योंकि जिस तरह इलाहाबाद को दुनिया के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया है, उस पर विश्वास कर पाना मुश्किल है।’ -आशीष केसरवानी, छात्र
‘यह बात सही है कि हर जगह प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है लेकिन इस पर भरोसा नहीं होता कि इलाहाबाद दुनिया के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में है। सरकार को डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की जांच करानी चाहिए।’ -अवनीश कुमार, छात्र