फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Not only the hospital, blood bank employees are also on the radar, police may soon inquire

नकली प्लेटलेट्स मामला :अस्पताल ही नहीं, ब्लड बैंक के कर्मचारी भी रडार पर, पुलिस जल्द कर सकती है पूछताछ

Mon, 24 Oct 2022 06:13 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 24 Oct 2022 06:13 AM IST
सार

आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह फर्जी रेफरल लेटर बनवाते थे। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कई बार वह अस्पतालों के पर्चे पर सादा कागज रखकर उसकी फोटोकॉपी करा लेते थे। इसके बाद इस पर फर्जी दस्तखत कर रेफरल लेटर बना लेते थे। 

विज्ञापन
Not only the hospital, blood bank employees are also on the radar, police may soon inquire
Prayagraj News : पुलिस के हत्थे चढ़े नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह के सदस्य। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नकली प्लेटलेट्स बेचने वाले गिरोह के भंडाफोड़ के बाद अब ब्लड बैंकों के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। पुलिस जल्द ही इनसे भी पूछताछ कर सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गिरोह के सदस्यों को इतनी ज्यादा मात्रा में प्लाज्मा कैसे उपलब्ध हो जाता था। आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह फर्जी रेफरल लेटर बनवाते थे। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कई बार वह अस्पतालों के पर्चे पर सादा कागज रखकर उसकी फोटोकॉपी करा लेते थे। इसके बाद इस पर फर्जी दस्तखत कर रेफरल लेटर बना लेते थे। 

विज्ञापन



फिर इसी के जरिये ब्लड बैंक जाकर प्लाज्मा ले लेते थे। जानकारों का कहना है कि बिना रेफरल लेटर पर प्लाज्मा मिलना संभव नहीं है। इसके अलावा वही रेफरल लेटर स्वीकार किया जाता है जो अस्पताल या फिर डॉक्टर के पर्चे पर बना हो। नियमत: फोटेाकॉपी से बने रेफरल लेटर पर प्लाज्मा, खून या प्लेटलेट्स देने का प्रावधान नहीं है। 
विज्ञापन



हालांकि गिरोह के लोगों ने पूछताछ में यह बात कबूली है कि उन्होंने ब्लड बैंकों से फोटोकॉपी पैड पर बने रेफरल लेटर से भी प्लाज्मा लिए। ऐसे में इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस खेल में गिरोह के मददगार ब्लड बैंकों के कुछ कर्मचारी भी रहे हों। फिलहाल कोतवाली पुलिस इस मामले की जांच पड़ताल में जुटी है। मामले में इंस्पेक्टर कोतवाली अमर सिंह रघुवंशी का कहना है कि जिनकी भी संलिप्तता होगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

विज्ञापन
विज्ञापन

अजय व प्रदीप का तीसरे दिन भी सुराग नहीं
उधर गिरोह के फरार सदस्यों अजय सिंह व प्रदीप मौर्य का तीसरे दिन भी सुराग नहीं मिला। पुलिस उनकी तलाश में जुटी रही लेकिन कुछ पता नहीं चला। सीओ सत्येंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि उनकी तलाश में कोतवाली पुलिस के साथ ही एसओजी को भी लगाया गया है। 


सतीश का नहीं मिला सुराग
उधर ग्लोबल अस्पताल में डेंगू पीड़ित प्रदीप पांडेय की मौत के मामले में आरोपी झलवा निवासी सतीश साहू तीसरे दिन भी नहीं मिला। मरीज की पत्नी ने तहरीर देकर आरोप लगाया है कि सतीश ने ही प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए थे। जिसे चढ़ाए जाने के बाद उनके पति की हालत बिगड़ी। धूमनगंज इंस्पेक्टर राजेश मौर्य का कहना है कि उसकी तलाश की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed