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बिना एफआईआर मजिस्ट्रेट को तलबी का अधिकार नहींः हाईकोर्ट
Wed, 08 Jan 2020 07:03 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 08 Jan 2020 07:03 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना प्राथमिकी दर्ज हुए मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति को तलब करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने जाति सूचक गाली देने, मारपीट और धोखाधड़ी की शिकायत पर अपर सिटी मजिस्ट्रेट गाजियाबाद द्वारा आरोपी को तलब करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके तहत बिना एफ आईआर दर्ज किए मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति को तलब करने का अधिकार मिला हो ।
अपर नगर मजिस्ट्रेट गाजियाबाद ने याची को धोखाधड़ी करने एवं शिकायतकर्ता सुनील कुमार को जातिसूचक गाली देने की शिकायत पर अपने समक्ष हाजिर होने का निर्देश दिया था। जिसे चुनौती दी गई थी । यह आदेश न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय तथा न्यायमूर्ति रविनाथ तिलहरी की खंडपीठ ने सुधीर मलिक की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि वह शालीमार गार्डन गाजियाबाद का निवासी है। उसके खिलाफ सुनील कुमार ने धोखाधड़ी, मारपीट व जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। जिस पर अपर नगर मजिस्ट्रेट ने 19 नवंबर 2019 के आदेश से याची को तलब किया और सफाई मांगी। जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि मजिस्ट्रेट को सम्मन करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कानून के मुताबिक कार्यवाही करने की छूट दी है।
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अपर नगर मजिस्ट्रेट गाजियाबाद ने याची को धोखाधड़ी करने एवं शिकायतकर्ता सुनील कुमार को जातिसूचक गाली देने की शिकायत पर अपने समक्ष हाजिर होने का निर्देश दिया था। जिसे चुनौती दी गई थी । यह आदेश न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय तथा न्यायमूर्ति रविनाथ तिलहरी की खंडपीठ ने सुधीर मलिक की याचिका पर दिया है।
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याची का कहना था कि वह शालीमार गार्डन गाजियाबाद का निवासी है। उसके खिलाफ सुनील कुमार ने धोखाधड़ी, मारपीट व जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। जिस पर अपर नगर मजिस्ट्रेट ने 19 नवंबर 2019 के आदेश से याची को तलब किया और सफाई मांगी। जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि मजिस्ट्रेट को सम्मन करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कानून के मुताबिक कार्यवाही करने की छूट दी है।
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