NCR Railway : रेलवे ट्रैक के पहरेदारों की जान बचाएगा ‘रक्षक, ट्रेन आने से पहले कर देगा सतर्क
पटरियों पर गश्त के दौरान जाने अनजाने में हर वर्ष कई ट्रैकमैन और गैंगमैन की जान चली जाती है। कोहरे के दौरान इस तरह की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। उत्तर मध्य रेलवे की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2018-19 से वर्तमान वित्तीय वर्ष के नवंबर तक 39 रेलकर्मियों की जान जा चुकी है।
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ट्रैक पर काम करने वाले कर्मियों की जान ट्रेन की चपेट में आने से नहीं जाएगी। इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन पहली बार अप्रोचिंग ट्रेन वार्निंग सिस्टम (रक्षक) का प्रयोग करने जा रहा है। इसकी मदद से ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारियों को ट्रेन आने की सूचना पहले ही मिल जाएगी। कोहरे के दौरान यह सिस्टम खासा कारगर सिद्ध होगा है। ‘रक्षक ’को लगाने के लिए एनसीआर ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। पांच दिसंबर को इसका टेंडर खुलेगा।
पटरियों पर गश्त के दौरान जाने अनजाने में हर वर्ष कई ट्रैकमैन और गैंगमैन की जान चली जाती है। कोहरे के दौरान इस तरह की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। उत्तर मध्य रेलवे की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2018-19 से वर्तमान वित्तीय वर्ष के नवंबर तक 39 रेलकर्मियों की जान जा चुकी है। इसी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने अब प्रयागराज, आगरा एवं झांसी मंडल में रक्षक प्रणाली लगाने का निर्णय लिया है।
13.41 करोड़ रुपये आएगी लागत
‘रक्षक’ वेरी हाई फ्रीक्वेंसी आधारित अप्रोचिंग ट्रेन वार्निंग सिस्टम (उच्च-आवृत्ति रेडियो-आधारित चेतावनी प्रणाली) है। इसके तीनों ही मंडलों के विभिन्न स्टेशनों के बीच अप, डाउन और लूप लाइनों पर लगाया जाएगा। इसके लिए 13.41 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया है, जो पांच दिसंबर 2023 को खुलेगा। ‘रक्षक’ एक हैंडहेल्ड वॉकी-टॉकी डिवाइस है। यह उपकरण एलईडी इंडिकेशन के साथ-साथ बजर और आने वाली ट्रेनों के कंपन के बारे में अलर्ट प्रदान करता है। ताकि, ट्रेन आने के पहले ही ट्रैकमैन आदि को उसकी जानकारी मिल जाए और वह समय रहते ट्रैक से दूर हो जाएं।
इससे कुछ हद तक घातक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, क्योंकि यह उपकरण उन्हें आने वाली ट्रेनों के बारे में पहले से ही सचेत कर देगा। इस बारे में एनसीआर के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय का कहना है कि ‘रक्षक’ की स्थापना और कमीशनिंग के लिए टेंडर निकाला गया है। एनसीआर के तीनों ही मंडलों में इस तकनीक का प्रयोग होगा।