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Prayagraj : अशरफ के जेल से लेकर पैरवी-पेशी तक के खर्चे उठाता था नफीस, कभी करेली में चलाता था छोटी सी दुकान

Thu, 23 Nov 2023 12:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 23 Nov 2023 12:17 PM IST
सार

नफीस को करीब से जानने वाले बताते हैं कि 2005 में वह बेहद तंगी के दौर से गुजर रहा था। तब करेली में उसने ठेले पर बिरयानी बेचना शुरू किया। तंगहाली के दिनों में उसके स्कूल के साथी रहे माफिया अशरफ ने उसका साथ दिया।

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Nafees used to bear the expenses of Ashraf from jail to legal proceedings
नफीस बिरयानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

50 हजार का इनामी नफीस अशरफ के जेल से लेकर पैरवी-पेशी तक के खर्चे उठाता था। इसके साथ ही अशरफ की पत्नी जैनब के लिए भी रुपयों-गाड़ी का इंतजाम करता था। करेेली में छोटी सी दुकान से व्यवसाय शुरू करने वाला यह आरोपी माफिया की सरपरस्ती में कुछ ही सालों में फर्श से अर्श पर पहुंच गया। ठेले पर बिरयानी बेचने वाला दुकानदार जमीनों का सौदागर बन बैठा था।

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नफीस को करीब से जानने वाले बताते हैं कि 2005 में वह बेहद तंगी के दौर से गुजर रहा था। तब करेली में उसने ठेले पर बिरयानी बेचना शुरू किया। तंगहाली के दिनों में उसके स्कूल के साथी रहे माफिया अशरफ ने उसका साथ दिया। न सिर्फ रुपयों से मदद की बल्कि बड़े भाई के कब्जे वाली नवाब युसुफ रोड स्थित जमीन को कारखाने के लिए दे दिया। इसके बाद नफीस ने एमजी मार्ग पर पैलेस सिनेमाहाल के पास बिरयानी की दुकान खोली। दुकान चल पड़ी और देखते ही देखते वह नफीस बिरयानी के नाम से जाना जाने लगा।
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अशरफ और उसके गुर्गे अक्सर उसकी दुकान पर बिरयानी खाने पहुंचते थे। इसके बाद अशरफ की मदद से ही वह जमीनों की खरीद फरोख्त में जुट गया और फिर माफिया की काली कमाई को सफेद करने में लग गया। 2021 में अशरफ के जेल जाने के बाद से उसके जेल और पेशी-पैरवी के खर्चे वह ही उठाता था। अशरफ की पत्नी जैनब के लिए रुपयों व गाड़ी का इंतजाम भी वह ही करता था। अशरफ के नाम पर उसने जमीन के कई बड़े सौदों में भी हाथ डाला और लाखों रुपये कमाए भी।

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तीन मुकदमे दर्ज थे उमेश पाल हत्याकांड से पहले

खुल्दाबाद के गुलाबबाड़ी के रहने वाले नफीस पर उमेश पाल हत्याकांड से पहले कुल तीन मुकदमे दर्ज थे। इनमें से एक हत्या का प्रयास व एससी एसटी एक्ट का था। जबकि दो मुकदमे कोराना काल के दौरान महामारी अधिनियम के तहत लिखे गए थे। इसके बाद उमेश पाल हत्याकांड में उसका नाम तब आया जब पुलिस को पता चला कि वारदात में इस्तेमाल क्रेटा कार उसकी ही थी। हालांकि तब पकड़े जाने के दौरान उसने बताया था कि घटना से कुछ महीनों पहले ही उसने यह कार रुखसार को बेच दी थी जो ट्रैवेल एजेंसी चलाता था।

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