{"_id":"5d77fb298ebc3e01656e7f18","slug":"muharram-allahabad-news-ald254536297","type":"story","status":"publish","title_hn":"हुसैनियों के हुजूम के बीच करबला में दफन हुए अकीदत के फूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हुसैनियों के हुजूम के बीच करबला में दफन हुए अकीदत के फूल
विज्ञापन
Muharram
- फोटो : CITY DESK
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोतवाली से करबला तक तनी गम की स्याह चादर, गूंजतीं रहीं मातमी सदाएं
छतों, बारजों से बच्चों, महिलाओं ने की जियारत तो सड़कों पर बोसा लेने को हर कोई रहा बेताब
प्रयागराज। करबला के शहीदों की याद में दसवीं मुहर्रम पर मंगलवार को तकरीबन पूरा शहर गमे हुसैन में शरीक हुआ। कोतवाली से करबला तक गम की स्याह चादर तनी रही। जिन रास्तों से जुलूस निकले उसके दोनों ओर के मकानों की छतों, बारजों से महिलाओं, बच्चों ने जियारत की तो सड़क पर बुजुर्गों, नौजवानों का जमावड़ा रहा। दरियाबाद, रानीमंडी, रसूलपुर, करेली, कीडगंज, बड़ा ताजिया, बुड्ढ़ा ताजिया सहित तमाम मोहल्लों से अलम, शेर अलम, मेहंदी, झूला, चौकी अलम के जुलूस निकलकर करबला पहुंचे। हर ओर ‘या अली-या हुसैन’ की मातमी सदाएं गूंजती रहीं। अकीदतमंदों के हुजूम के साथ करबला में अकीदत के फूलों को दफनाया गया।
ऐेतिहासिक मुहर्रम कमेटी के तहत दस दिनों के दौरान 21 ताजियादारों की ओर से 31 मेहंदी, तीन झूला और 22 चौकी अलम उठाए गए थे, जिनके फूल यौमे आशूरा को करबला में नसब किए गए। ताजियों के करबला पहुंचने के बाद फूल दफनाए गए जबकि चौकियां वापस ले आई गईं। जुलूसों का सुबह से ही करबला पहुंचने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नम आंखों से ताजिया के फूलों को दफनाने के बाद अकीदतमंद शहीदे आजम के सब्र और इंसानियत का सबक सीखकर लौटे। उन्होंने हुसैन के रास्ते पर चलते हुए जुल्मोसितम के खिलाफ हमेशा डटे रखने का भी संकल्प लिया।
रवायत के मुताबिक सबसे आगे बुड्ढा ताजिया और फिर बड़ा ताजिया का जुलूस निकाला गया। बुड्ढा ताजिया का जुलूस इमामबाड़े से उठकर नूरउल्लाह रोड होता हुआ खुल्दाबाद चौराहे पर पहुंचने के बाद करबला की ओर मुड़ा। लखनपुर का अलम और अटाला की मेहंदी इसके पीछे रही। वहीं जानसेनगंज स्थित इमामबाड़े से बड़ा ताजिया का जुलूस निकाला गया जो कोतवाली, नखासकोहना, खुल्दाबाद चौराहा होकर करबला पहुंचा। इसके पीछे रसूलपुर और बक्शी मोढ़ा के अलम ने शिरकत की। रसूलपुर का अलम सबसे आखिर में करबला पहुंचा। मोहम्मद अदीब अली खान की सरपरस्ती में पुराना मनोहर दास अकबरपुर बिकानो से मेहंदी उठाई गई।
विज्ञापन
बड़ा ताजिया को कांधा देने को रही होड़
प्रयागराज। मुतवल्ली रेहान खां, इमरान खान की सदारत में दोपहर 2.05 बजे बड़ा ताजिया उठा तो इसे कांधा देने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। हजारों मुस्लिम महिलाओं ने ताजिया की जियारत कर फूल चढ़ाए। गली-गली ढोल ताशे और नौहे गूंजते रहे। बड़ा ताजिया इमामबाड़े पर जियारत और बोसा लेने हजारों की तादात में जायरीन पहुंचे। यहां लंगर, शर्बत आदि बांटा गया। जुलूस में महापौर अभिलाषा गुप्ता, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, एसपी सिटी ब्रजेश श्रीवास्तव, असरार नियाजी, जावेद खान, वजीर खान, जफर खान, जफर खान, सुहैल खान, वसीम, सायबान आदि शामिल थे। इससे पहले हुसैन के शैदाई पूरी रात अंगारों, जंजीरों का मातम कर करबला के शहीदों की याद ताजा करते रहे।
जुलूस ने दिया एंबुलेंस को रास्ता
बड़ा ताजिया का जुलूस जैसे ही ताजशाही के पास पहुंचा, शाहगंज की ओर से मरीज लिए एक एंबुलेंस आ पहुंची। संचालन कर रहे इलाहाबाद ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार नियाजी ने जुलूस में शामिल हुसैनियों से अपील की, जिस पर गौर करते हुए जुलूस ने एंबुलेंस को जाने के लिए रास्ता दे दिया।
कांधे-कांधे करबला पहुंचा मासूम असगर अली का झूला
प्रयागराज। दसवीं मुहर्रम पर मंगलवार को मासूम असगर अली का झूला कांधे-कांधे करबला पहुंचा। झूला बहादुरगंज चक रौजा से उठकर लोकनाथ, चर्च से गढ़ी सराय इमामबाड़े पर लाकर रखा गया। गुलाम रसूल की रहनुमाई में निकले जुलूस में हर कोई बोसा लेने को बेताब रहा। जुलूस में कमेटी के महासचिव गुलाम मोहम्मद, मो.रऊफ, इलियास नियाजी, सलीम पहलवान, गुलाम रब्बानी आदि शरीक थे।
अकीदत से निकला तुरबत का जुलूस
बख्शी बाजार स्थित इमामबाड़ा नजीर हुसैन से ऐतिहासिक तुरबत जुलूस सुबह निकाला गया। रानीमंडी से अंजुमन आबिदया, अब्बासिया व हैदरिया के मातमदार और नौहाख्वान भी जुलूस के हमराह हुए। तुरबत जुलूस दायरा शाह अजमल, रानी मंडी से होकर करबला पहुंचा जहां दुलदुल, तुरबत, ताबूत,अलम पर चढ़ाए गए फूलों को नम आंखों से दफनाया गया। करबला में ही मौलाना सैयद रजी हैदर की कयादत में आमाले आशूरा की रस्म अदा की गई।
विज्ञापन
छतों, बारजों से बच्चों, महिलाओं ने की जियारत तो सड़कों पर बोसा लेने को हर कोई रहा बेताब
प्रयागराज। करबला के शहीदों की याद में दसवीं मुहर्रम पर मंगलवार को तकरीबन पूरा शहर गमे हुसैन में शरीक हुआ। कोतवाली से करबला तक गम की स्याह चादर तनी रही। जिन रास्तों से जुलूस निकले उसके दोनों ओर के मकानों की छतों, बारजों से महिलाओं, बच्चों ने जियारत की तो सड़क पर बुजुर्गों, नौजवानों का जमावड़ा रहा। दरियाबाद, रानीमंडी, रसूलपुर, करेली, कीडगंज, बड़ा ताजिया, बुड्ढ़ा ताजिया सहित तमाम मोहल्लों से अलम, शेर अलम, मेहंदी, झूला, चौकी अलम के जुलूस निकलकर करबला पहुंचे। हर ओर ‘या अली-या हुसैन’ की मातमी सदाएं गूंजती रहीं। अकीदतमंदों के हुजूम के साथ करबला में अकीदत के फूलों को दफनाया गया।
ऐेतिहासिक मुहर्रम कमेटी के तहत दस दिनों के दौरान 21 ताजियादारों की ओर से 31 मेहंदी, तीन झूला और 22 चौकी अलम उठाए गए थे, जिनके फूल यौमे आशूरा को करबला में नसब किए गए। ताजियों के करबला पहुंचने के बाद फूल दफनाए गए जबकि चौकियां वापस ले आई गईं। जुलूसों का सुबह से ही करबला पहुंचने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नम आंखों से ताजिया के फूलों को दफनाने के बाद अकीदतमंद शहीदे आजम के सब्र और इंसानियत का सबक सीखकर लौटे। उन्होंने हुसैन के रास्ते पर चलते हुए जुल्मोसितम के खिलाफ हमेशा डटे रखने का भी संकल्प लिया।
विज्ञापन
रवायत के मुताबिक सबसे आगे बुड्ढा ताजिया और फिर बड़ा ताजिया का जुलूस निकाला गया। बुड्ढा ताजिया का जुलूस इमामबाड़े से उठकर नूरउल्लाह रोड होता हुआ खुल्दाबाद चौराहे पर पहुंचने के बाद करबला की ओर मुड़ा। लखनपुर का अलम और अटाला की मेहंदी इसके पीछे रही। वहीं जानसेनगंज स्थित इमामबाड़े से बड़ा ताजिया का जुलूस निकाला गया जो कोतवाली, नखासकोहना, खुल्दाबाद चौराहा होकर करबला पहुंचा। इसके पीछे रसूलपुर और बक्शी मोढ़ा के अलम ने शिरकत की। रसूलपुर का अलम सबसे आखिर में करबला पहुंचा। मोहम्मद अदीब अली खान की सरपरस्ती में पुराना मनोहर दास अकबरपुर बिकानो से मेहंदी उठाई गई।
विज्ञापन
बड़ा ताजिया को कांधा देने को रही होड़
प्रयागराज। मुतवल्ली रेहान खां, इमरान खान की सदारत में दोपहर 2.05 बजे बड़ा ताजिया उठा तो इसे कांधा देने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। हजारों मुस्लिम महिलाओं ने ताजिया की जियारत कर फूल चढ़ाए। गली-गली ढोल ताशे और नौहे गूंजते रहे। बड़ा ताजिया इमामबाड़े पर जियारत और बोसा लेने हजारों की तादात में जायरीन पहुंचे। यहां लंगर, शर्बत आदि बांटा गया। जुलूस में महापौर अभिलाषा गुप्ता, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, एसपी सिटी ब्रजेश श्रीवास्तव, असरार नियाजी, जावेद खान, वजीर खान, जफर खान, जफर खान, सुहैल खान, वसीम, सायबान आदि शामिल थे। इससे पहले हुसैन के शैदाई पूरी रात अंगारों, जंजीरों का मातम कर करबला के शहीदों की याद ताजा करते रहे।
जुलूस ने दिया एंबुलेंस को रास्ता
बड़ा ताजिया का जुलूस जैसे ही ताजशाही के पास पहुंचा, शाहगंज की ओर से मरीज लिए एक एंबुलेंस आ पहुंची। संचालन कर रहे इलाहाबाद ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष असरार नियाजी ने जुलूस में शामिल हुसैनियों से अपील की, जिस पर गौर करते हुए जुलूस ने एंबुलेंस को जाने के लिए रास्ता दे दिया।
कांधे-कांधे करबला पहुंचा मासूम असगर अली का झूला
प्रयागराज। दसवीं मुहर्रम पर मंगलवार को मासूम असगर अली का झूला कांधे-कांधे करबला पहुंचा। झूला बहादुरगंज चक रौजा से उठकर लोकनाथ, चर्च से गढ़ी सराय इमामबाड़े पर लाकर रखा गया। गुलाम रसूल की रहनुमाई में निकले जुलूस में हर कोई बोसा लेने को बेताब रहा। जुलूस में कमेटी के महासचिव गुलाम मोहम्मद, मो.रऊफ, इलियास नियाजी, सलीम पहलवान, गुलाम रब्बानी आदि शरीक थे।
अकीदत से निकला तुरबत का जुलूस
बख्शी बाजार स्थित इमामबाड़ा नजीर हुसैन से ऐतिहासिक तुरबत जुलूस सुबह निकाला गया। रानीमंडी से अंजुमन आबिदया, अब्बासिया व हैदरिया के मातमदार और नौहाख्वान भी जुलूस के हमराह हुए। तुरबत जुलूस दायरा शाह अजमल, रानी मंडी से होकर करबला पहुंचा जहां दुलदुल, तुरबत, ताबूत,अलम पर चढ़ाए गए फूलों को नम आंखों से दफनाया गया। करबला में ही मौलाना सैयद रजी हैदर की कयादत में आमाले आशूरा की रस्म अदा की गई।