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अक्षय तृतीया पर व्यापारियों को झटका
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पहले से ही सुस्ती की मार झेल रहे बाजार को कोरोना संकट ने तगड़ा झटका दिया है। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया को लेकर सराफा कारोबारियों में खासा उत्साह था। उनको उम्मीद थी कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन खत्म होने के बाद बाजार की सुस्ती दूर हटेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अक्षय तृतीया के दिन बड़ी तादाद में शादियां भी होती हैं। इस वजह से लोग इस पर्व के पूर्व ही ज्वैलरी आदि खरीदना शुभ मानते हैं। पर्व के दिन सोना खरीदना भी शुभ माना जाता है। लेकिन तीन मई तक लॉक डाउन बढ़ने पर सराफा व्यवसाय से जुड़े जिले के तकरीबन पांच हजार कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान हो गया है।
बीते कुछ वर्ष से धनतेरस की तरह लोग अक्षय तृतीया में भी खूब खरीदारी करते हैं। पिछले वर्ष प्रयागराज में अक्षय तृतीया के दिन ही तकरीबन 300 करोड़ रुपये का कारोबार हो गया। इसमें 150 करोड़ से ज्यादा का कारोबार सराफा मार्केट का रहा। एक अनुमान के मुताबिक प्रयागराज शहर में एक दिन में सराफा बाजार में औसतन 20 करोड़ का कारोबार होता है। बीती 22 मार्च से ही शहर का सराफा बाजार बंद है, जो लॉकडाउन की वजह से तीन मई तक बंद रहेगा। इन 43 दिनों के दौरान सिर्फ सराफा बाजार में ही तकरीबन 850 करोड़ का नुकसान कारोबारियों को होने का अनुमान लगाया गया है। अगर इसमें अक्षय तृतीया के अनुमानित कारोबार को जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा एक हजार करोड़ का हो सकता है। रानी मंडी स्थित बच्चा जी ज्वैलर्स के प्रोपराइटर अमिताभ टंडन का कहना है कि कोरोना वैश्विक महामारी के रूप में सामने आई है। पीएम ने लॉकडाउन कर ठीक निर्णय लिया है। रही बात कारोबार की तो अभी भले ही नुकसान हो रहा है लेकिन, आगे सब ठीक हो जाएगा।
ग्रामीण इलाकों में घटी सोने-चांदी की डिमांड
फसल बिकने के बाद किसानों के हाथ में पैसा रहता है। इसलिए किसान अक्षय तृतीया के अवसर पर अपने बच्चों की शादी करने और सोना-चांदी खरीदने को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन इस वर्ष किसानों की फसलों की कटाई काफी कम स्थानों पर शुरू हो सकी है। मंडियां बंद होने से फसल भी नहीं बिक रही। इसलिए ग्रामीण इलाकों में सोना-चांदी की मांग कमजोर है।
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कोरोना से पहले मिले 60 फीसदी आर्डर निरस्त
प्रयागराज में रानी मंडी, सिविल लाइंस, चौक, मीरगंज, कटरा आदि इलाकों में सराफा कारोबारियों की दुकानें एवं बड़े शोरूम हैं। 22 मार्च से ही शहर की सभी दुकानें एवं शोरूम बंद चल रहे हैं। लॉकडाउन के पूर्व लोगों ने आभूषण आदि बनवाने के लिए आर्डर आदि दे रखे थे, लेकिन 60 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने आर्डर निरस्त कर दिए हैं। प्रयाग सराफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष कुलदीप सोनी बताते हैं कि यह सीजन कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन कोरोना से सबकुछ चौपट कर दिया। समझ में ही नहीं आ रहा कि व्यापारी इस नुकसान से कैसे उबरेंगे ।
कारीगर हुए बेरोजगार, कई छोड़ चुके हैं प्रयागराज
प्रयागराज के सराफा बाजार में बंगाल के काफी कारीगर हैं। लॉकडाउन के बाद इसमें से काफी ने पहले ही शहर छोड़ दिया, जो बचे हैं तो वह अपने परिजनों संग जीवकोपार्जन के लिए परेशान हैं। मीरगंज में एक सराफा कारोबारी की दुकान पर आर्डर लेकर काम करने वाले बंगाल के कारीगर मानिक ने बताया कि 25 दिन से बाजार बंद है। समझ में नहीं आ रहा कि परिजनों का पालन पोषण कैसे किया जाएगा। आभूषण व्यवसायी राहुल वर्मा ने बताया कि बहुत से कारीगरों ने राज्य सरकार से मिलने वाली सहायता राशि का फार्म भरा है, लेकिन फिर भी कुछ कारीगर फार्म भरने से चूक गए। उन कारीगरों को फार्म भरने का मौका दिया जाना चाहिए।
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बीते कुछ वर्ष से धनतेरस की तरह लोग अक्षय तृतीया में भी खूब खरीदारी करते हैं। पिछले वर्ष प्रयागराज में अक्षय तृतीया के दिन ही तकरीबन 300 करोड़ रुपये का कारोबार हो गया। इसमें 150 करोड़ से ज्यादा का कारोबार सराफा मार्केट का रहा। एक अनुमान के मुताबिक प्रयागराज शहर में एक दिन में सराफा बाजार में औसतन 20 करोड़ का कारोबार होता है। बीती 22 मार्च से ही शहर का सराफा बाजार बंद है, जो लॉकडाउन की वजह से तीन मई तक बंद रहेगा। इन 43 दिनों के दौरान सिर्फ सराफा बाजार में ही तकरीबन 850 करोड़ का नुकसान कारोबारियों को होने का अनुमान लगाया गया है। अगर इसमें अक्षय तृतीया के अनुमानित कारोबार को जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा एक हजार करोड़ का हो सकता है। रानी मंडी स्थित बच्चा जी ज्वैलर्स के प्रोपराइटर अमिताभ टंडन का कहना है कि कोरोना वैश्विक महामारी के रूप में सामने आई है। पीएम ने लॉकडाउन कर ठीक निर्णय लिया है। रही बात कारोबार की तो अभी भले ही नुकसान हो रहा है लेकिन, आगे सब ठीक हो जाएगा।
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ग्रामीण इलाकों में घटी सोने-चांदी की डिमांड
फसल बिकने के बाद किसानों के हाथ में पैसा रहता है। इसलिए किसान अक्षय तृतीया के अवसर पर अपने बच्चों की शादी करने और सोना-चांदी खरीदने को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन इस वर्ष किसानों की फसलों की कटाई काफी कम स्थानों पर शुरू हो सकी है। मंडियां बंद होने से फसल भी नहीं बिक रही। इसलिए ग्रामीण इलाकों में सोना-चांदी की मांग कमजोर है।
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कोरोना से पहले मिले 60 फीसदी आर्डर निरस्त
प्रयागराज में रानी मंडी, सिविल लाइंस, चौक, मीरगंज, कटरा आदि इलाकों में सराफा कारोबारियों की दुकानें एवं बड़े शोरूम हैं। 22 मार्च से ही शहर की सभी दुकानें एवं शोरूम बंद चल रहे हैं। लॉकडाउन के पूर्व लोगों ने आभूषण आदि बनवाने के लिए आर्डर आदि दे रखे थे, लेकिन 60 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने आर्डर निरस्त कर दिए हैं। प्रयाग सराफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष कुलदीप सोनी बताते हैं कि यह सीजन कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन कोरोना से सबकुछ चौपट कर दिया। समझ में ही नहीं आ रहा कि व्यापारी इस नुकसान से कैसे उबरेंगे ।
कारीगर हुए बेरोजगार, कई छोड़ चुके हैं प्रयागराज
प्रयागराज के सराफा बाजार में बंगाल के काफी कारीगर हैं। लॉकडाउन के बाद इसमें से काफी ने पहले ही शहर छोड़ दिया, जो बचे हैं तो वह अपने परिजनों संग जीवकोपार्जन के लिए परेशान हैं। मीरगंज में एक सराफा कारोबारी की दुकान पर आर्डर लेकर काम करने वाले बंगाल के कारीगर मानिक ने बताया कि 25 दिन से बाजार बंद है। समझ में नहीं आ रहा कि परिजनों का पालन पोषण कैसे किया जाएगा। आभूषण व्यवसायी राहुल वर्मा ने बताया कि बहुत से कारीगरों ने राज्य सरकार से मिलने वाली सहायता राशि का फार्म भरा है, लेकिन फिर भी कुछ कारीगर फार्म भरने से चूक गए। उन कारीगरों को फार्म भरने का मौका दिया जाना चाहिए।