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Moharram 2020: मोहर्रम पर नहीं दफन हुए ताजिए, अजाखानों में चढ़े फूल
Mon, 31 Aug 2020 11:46 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 11:46 AM IST
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मुहर्रम के दौरान चाक-चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रयागराज। बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नजीर हुसैन से दसवीं मोहर्रम पर तक़रीब 150 बरस पुराना तुरबत का जुलूस कोविड 19 और सरकार की तरफ से लगी रोक के कारण नहीं निकाला गया। दिन भर रोजा रखकर इबादत की गई। मोहर्रम की 10वीं पर मुसलमानों ने घरों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आमाल- ए -आशूरा की विशेष नमाज अदा की।
पहली बार मोहर्रम पर ताजिए दफन नहीं किए जा सके। जुलूसों को स्थगित कर दिया गया। तुरबत का जुलूस जो बख्शी बाजार इमामबाड़ा नजीर हुसैन से उठ कर दायरा शाह अजमल, रानी मंडी, चड्ढ़ा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया कर्बला पर जाता था, वह इस बार नहीं उठाया गया। अलबत्ता इमामबाड़े पर ही मजलिस हुई, जिसे मौलाना आजम मेरठी ने खिताब किया। गमजदा हो कर हुसैन -ए- मजलूम की शहादत का जनाबे फात्मा जहरा को पुरसा दिया गया।
सरकारी गाइड लाइन पर अमल करते हुए बहुत कम संख्या में लोगों ने शिरकत की। तुरबत को फूलों से सजा कर इमामबाड़े से घर में ही गश्त कराकर उसी इमामबाड़े में दोबारा रखवा दिया गया। तुरबत के आसपास बैठ कर घर की औरतों और मर्दों ने नम आंखों से पुरसा पेश करते हुए अलविदा या हुसैन की सदा बुलंद की। इस मौके पर इमामबाड़े की देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाले नूरुलऐन आब्दी, जुलकरनैन आब्दी, रईस मेहंदी, तय्याबैन आब्दी, फराज आब्दी, मोहम्मद मेहंदी, अहद मेहंदी, अजमी मेहंदी, जामिन हसन, मिर्जा अजादार हुसैन समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
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सात प्रकार के अनाज से हुई फाका शिकनी
दिन भर भूखा प्यासा रहने के बाद शाम को सात तरीके के भूने अनाज और खिचड़ी पर नजरो नियाज करा कर की गई फाका शिकनी। माहे मोहर्रम की दसवीं पर शिया समुदाय के लोगों में हजरत इमाम हुसैन के साथ कर्बला के मैदान में राहे हक में कुर्बान हुए 72 शहीदों का गम मनाते हुए नंगे पांव रहे। अंजुमन गुंचा- ए -कासिमिया के प्रवक्ता सैयद मोहम्मद अस्करी ने बताया कि कोविड-19 की वजह से लोग घरों से नहीं निकले। देर शाम इमामबाड़ा अली नवाब में शहादते इमाम हुसैन के बाद के मंजर को पेश करते हुए मजलिस हुई। वहीं लोगों को सतनजा सात प्रकार के भूने अनाज से फाका शिकनी कराई गई।
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पहली बार मोहर्रम पर ताजिए दफन नहीं किए जा सके। जुलूसों को स्थगित कर दिया गया। तुरबत का जुलूस जो बख्शी बाजार इमामबाड़ा नजीर हुसैन से उठ कर दायरा शाह अजमल, रानी मंडी, चड्ढ़ा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया कर्बला पर जाता था, वह इस बार नहीं उठाया गया। अलबत्ता इमामबाड़े पर ही मजलिस हुई, जिसे मौलाना आजम मेरठी ने खिताब किया। गमजदा हो कर हुसैन -ए- मजलूम की शहादत का जनाबे फात्मा जहरा को पुरसा दिया गया।
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सरकारी गाइड लाइन पर अमल करते हुए बहुत कम संख्या में लोगों ने शिरकत की। तुरबत को फूलों से सजा कर इमामबाड़े से घर में ही गश्त कराकर उसी इमामबाड़े में दोबारा रखवा दिया गया। तुरबत के आसपास बैठ कर घर की औरतों और मर्दों ने नम आंखों से पुरसा पेश करते हुए अलविदा या हुसैन की सदा बुलंद की। इस मौके पर इमामबाड़े की देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाले नूरुलऐन आब्दी, जुलकरनैन आब्दी, रईस मेहंदी, तय्याबैन आब्दी, फराज आब्दी, मोहम्मद मेहंदी, अहद मेहंदी, अजमी मेहंदी, जामिन हसन, मिर्जा अजादार हुसैन समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
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सात प्रकार के अनाज से हुई फाका शिकनी
दिन भर भूखा प्यासा रहने के बाद शाम को सात तरीके के भूने अनाज और खिचड़ी पर नजरो नियाज करा कर की गई फाका शिकनी। माहे मोहर्रम की दसवीं पर शिया समुदाय के लोगों में हजरत इमाम हुसैन के साथ कर्बला के मैदान में राहे हक में कुर्बान हुए 72 शहीदों का गम मनाते हुए नंगे पांव रहे। अंजुमन गुंचा- ए -कासिमिया के प्रवक्ता सैयद मोहम्मद अस्करी ने बताया कि कोविड-19 की वजह से लोग घरों से नहीं निकले। देर शाम इमामबाड़ा अली नवाब में शहादते इमाम हुसैन के बाद के मंजर को पेश करते हुए मजलिस हुई। वहीं लोगों को सतनजा सात प्रकार के भूने अनाज से फाका शिकनी कराई गई।

moharram celebration 2020- फोटो : CITY DESK