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मीरगंज में छापेमारी, खाली कराए कोठे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 02 May 2016 01:49 AM IST
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देह व्यापार की शिकायत पर छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आखिरकार इलाहाबाद के बदनाम रेडलाइट एरिया मीरगंज के कोठों को सेक्स वर्कर्स से खाली करा लिया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने रविवार दोपहर भारी पुलिस बल के साथ मीरगंज को घेरने के बाद कोठों में छापेमारी की। एकबारगी छापे से वहां खलबली मच गई। कोठों में मौजूद औरतों और लड़कियों ने भागने तथा छिपने की भरसक कोशिश की लेकिन तीन घंटे तक चली कार्रवाई और तलाशी अभियान के दौरान पुलिस बल ने दो कोठा संचालिकाओं के साथ 109 औरतों और 10 पुरुषों को पकड़ लिया। महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराकर नारी निकेतन भेजने का फैसला हुआ जबकि गिरफ्तार व्यक्तियों को मुकदमा लिखकर अदालत में पेश किया जाएगा।
जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने मीरगंज में वेश्यावृत्ति बंद कराने का आदेश जारी किया था। अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले दिनों लगातार इस पर मंथन कर मीरगंज के कोठों को खाली कराने की तैयारी की। इस अभियान को ऑपरेशन फ्रीडम नाम दिया गया। इसमें वाराणसी के स्वयंसेवी संगठन गुड़िया के भी पदाधिकारियों और सदस्यों को शामिल किया गया। कार्रवाई के लिए राजपत्रित अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस की 14 कार्डन टीम, 10 निगोसिएशन टीम और 17 रेड (छापेमारी) टीम गठित की गई।
रविवार दोपहर करीब तीन बजे डीएम संजय कुमार, एसएसपी केएस इमेनुएल, एडीएम सिटी, एसपी सिटी, एसपी प्रोटोकाल, एसपी मार्डन कंट्रोल रूम, एसपी ट्रैफिक, पांच सिटी मजिस्ट्रेट, सात सीओ, 31 थाना प्रभारी, पांच दरोगा, 15 महिला दरोगा, तीन सौ पुरुष और 150 महिला सिपाहियों के साथ मीरगंज को चौतरफा घेरने के बाद कोठों में छापा मारा गया। छापेमारी से भगदड़ मच गई। कई कोठों के दरवाजों पर ताला लगाकर दलाल गलियों में भाग गए। कुछ महिलाएं भी निकलकर भागने लगीं, जिन्हें महिला पुलिसकर्मियों ने पकड़ लिया। ताले तोड़कर घुसी पुलिस टीम ने कमरों में छिपी और छत से कूदकर भागने की कोशिश कर रहीं औरतों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों की निगरानी में पुलिस फोर्स ने मीरगंज की गलियों के सभी कोठों को खंगाल डाला। इन कोठों की अंधेरी कोठरियों में लड़कियों के साथ 10 पुरुष भी पकडे़ गए। दो कोठा संचालिकाओं समेत 109 औरतों-लड़कियों को भी हिरासत में लिया गया।
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इनमें तमाम औरतों के 34 बच्चे भी थे। लगभग 15 से 45 उम्र की सभी औरतों-लड़कियों और उनके बच्चों को को खुल्दाबाद थाने के पास नारी निकेतन के नए भवन में अस्थायी तौर पर भेजा गया। एसपी सिटी राजेश यादव ने बताया कि इन सभी औरतों-लड़कियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद तय किया जाएगा कि उन्हें किस नारी निकेतन में रखा जाएगा। ज्यादातर औरतों को आगरा नारी निकेतन भेजने पर विचार हुआ है। पुरुषों को कोतवाली के लॉकअप में डाला गया। उनके खिलाफ देह व्यापार अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया है। धरपकड़ अभियान के बाद मजिस्ट्रेट ने मीरगंज की गलियों में दस कोठों को सीज कर दिया है।
मीरगंज के कोठों को वेश्यावृत्ति से मुक्त कराने के लिए हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी। शनिवार रात ही पुलिस ने मीरगंज की गलियों का निरीक्षण कर घेराबंदी का खाका तैयार कर लिया था। कोठों से पकड़ी जाने वालीं औरतों-लड़कियों और उनके बच्चों को खुल्दाबाद स्थित इमारत तक ले जाने के लिए कई गाड़ियां लगी थीं। यही नहीं, कोठों के भीतर औरतों को बंदकर दलाल बाहर से दरवाजों में ताले लगाकर भागे तो पुलिस ने गैस कटर से ताले काटकर अंदर तलाशी ली। पुलिस ने आलमारियों के भीतर, बेड, तख्त के नीचे, बाथरूम और छत पर छिपी औरतों और लड़कियों को पकड़ लिया। पुलिस की घेराबंदी से बचकर कोई भी भागने नहीं पाया।
मीरगंज में वेश्यावृत्ति बंद कराने के लिए जनहित संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल केसरवानी कई साल से आंदोलन कर रहे थे। वह विरोध प्रदर्शन और अधिकारियों को ज्ञापन देते रहे। रविवार दोपहर प्रमिल भी साथी पदाधिकारियों प्रवीण गुप्ता, शलभ पांडेय, कुलदीप चौरसिया, राजेश केसरवानी, रवि शुक्ला के साथ मीरगंज पहुंचे मगर पुलिस ने अभियान की वजह से उन्हें बाहर ही रोक लिया। समाजसेवी सुनील चौधरी भी मीरगंज में जिस्मफरोशी पर रोकथाम के लिए लंबे समय तक धरने पर रहे। हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की और कई बार पुलिस अफसरों को ज्ञापन दिया।
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जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने मीरगंज में वेश्यावृत्ति बंद कराने का आदेश जारी किया था। अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले दिनों लगातार इस पर मंथन कर मीरगंज के कोठों को खाली कराने की तैयारी की। इस अभियान को ऑपरेशन फ्रीडम नाम दिया गया। इसमें वाराणसी के स्वयंसेवी संगठन गुड़िया के भी पदाधिकारियों और सदस्यों को शामिल किया गया। कार्रवाई के लिए राजपत्रित अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस की 14 कार्डन टीम, 10 निगोसिएशन टीम और 17 रेड (छापेमारी) टीम गठित की गई।
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रविवार दोपहर करीब तीन बजे डीएम संजय कुमार, एसएसपी केएस इमेनुएल, एडीएम सिटी, एसपी सिटी, एसपी प्रोटोकाल, एसपी मार्डन कंट्रोल रूम, एसपी ट्रैफिक, पांच सिटी मजिस्ट्रेट, सात सीओ, 31 थाना प्रभारी, पांच दरोगा, 15 महिला दरोगा, तीन सौ पुरुष और 150 महिला सिपाहियों के साथ मीरगंज को चौतरफा घेरने के बाद कोठों में छापा मारा गया। छापेमारी से भगदड़ मच गई। कई कोठों के दरवाजों पर ताला लगाकर दलाल गलियों में भाग गए। कुछ महिलाएं भी निकलकर भागने लगीं, जिन्हें महिला पुलिसकर्मियों ने पकड़ लिया। ताले तोड़कर घुसी पुलिस टीम ने कमरों में छिपी और छत से कूदकर भागने की कोशिश कर रहीं औरतों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों की निगरानी में पुलिस फोर्स ने मीरगंज की गलियों के सभी कोठों को खंगाल डाला। इन कोठों की अंधेरी कोठरियों में लड़कियों के साथ 10 पुरुष भी पकडे़ गए। दो कोठा संचालिकाओं समेत 109 औरतों-लड़कियों को भी हिरासत में लिया गया।
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इनमें तमाम औरतों के 34 बच्चे भी थे। लगभग 15 से 45 उम्र की सभी औरतों-लड़कियों और उनके बच्चों को को खुल्दाबाद थाने के पास नारी निकेतन के नए भवन में अस्थायी तौर पर भेजा गया। एसपी सिटी राजेश यादव ने बताया कि इन सभी औरतों-लड़कियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद तय किया जाएगा कि उन्हें किस नारी निकेतन में रखा जाएगा। ज्यादातर औरतों को आगरा नारी निकेतन भेजने पर विचार हुआ है। पुरुषों को कोतवाली के लॉकअप में डाला गया। उनके खिलाफ देह व्यापार अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया है। धरपकड़ अभियान के बाद मजिस्ट्रेट ने मीरगंज की गलियों में दस कोठों को सीज कर दिया है।
मीरगंज के कोठों को वेश्यावृत्ति से मुक्त कराने के लिए हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस-प्रशासन ने पूरी तैयारी की थी। शनिवार रात ही पुलिस ने मीरगंज की गलियों का निरीक्षण कर घेराबंदी का खाका तैयार कर लिया था। कोठों से पकड़ी जाने वालीं औरतों-लड़कियों और उनके बच्चों को खुल्दाबाद स्थित इमारत तक ले जाने के लिए कई गाड़ियां लगी थीं। यही नहीं, कोठों के भीतर औरतों को बंदकर दलाल बाहर से दरवाजों में ताले लगाकर भागे तो पुलिस ने गैस कटर से ताले काटकर अंदर तलाशी ली। पुलिस ने आलमारियों के भीतर, बेड, तख्त के नीचे, बाथरूम और छत पर छिपी औरतों और लड़कियों को पकड़ लिया। पुलिस की घेराबंदी से बचकर कोई भी भागने नहीं पाया।
मीरगंज में वेश्यावृत्ति बंद कराने के लिए जनहित संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल केसरवानी कई साल से आंदोलन कर रहे थे। वह विरोध प्रदर्शन और अधिकारियों को ज्ञापन देते रहे। रविवार दोपहर प्रमिल भी साथी पदाधिकारियों प्रवीण गुप्ता, शलभ पांडेय, कुलदीप चौरसिया, राजेश केसरवानी, रवि शुक्ला के साथ मीरगंज पहुंचे मगर पुलिस ने अभियान की वजह से उन्हें बाहर ही रोक लिया। समाजसेवी सुनील चौधरी भी मीरगंज में जिस्मफरोशी पर रोकथाम के लिए लंबे समय तक धरने पर रहे। हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की और कई बार पुलिस अफसरों को ज्ञापन दिया।