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Prayagraj News: मनसैता नदी उफान पर, धान की फसल जलमग्न
Sat, 29 Aug 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 29 Aug 2026 01:47 AM IST
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करनाईपुर क्षेत्र के कहली गांव में मंनसैता नदी के उफान से जलमग्न धान के खेत,पानी मे डूबी फसल ।
लगातार बारिश के कारण मनसैता नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के खेत जलमग्न हो गए हैं। सैकड़ों गांवों का बारिश का पानी इसी नदी में पहुंचता है।
बहरिया क्षेत्र के कहली गांव से निकली मनसैता नदी का पानी दर्जनों बीघा धान के खेतों में फैल गया है। धान की फसल में लगभग पांच फीट तक पानी भर गया है। कई दिनों तक पानी में डूबे रहने से धान के पौधे गलने लगे हैं और फसल खराब हो रही है। विजय कुमार भारतीय और राकेश कुमार भारतीय समेत कई किसानों की धान की खेती जलमग्न हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी का बहाव इतना तेज है कि खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। किसानों ने धान की रोपाई और खाद जैसे कृषि कार्यों में काफी खर्च किया है।
किसानों ने बताया कि समय रहते पानी नहीं निकला तो बची हुई फसल भी पूरी तरह नष्ट हो सकती है। जलभराव के कारण किसानों को फसल के साथ खेती में लगी लागत का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मौके पर फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है। साथ ही, नदी और खेतों के पानी की निकासी की व्यवस्था करने को कहा है। प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है।
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बहरिया क्षेत्र के कहली गांव से निकली मनसैता नदी का पानी दर्जनों बीघा धान के खेतों में फैल गया है। धान की फसल में लगभग पांच फीट तक पानी भर गया है। कई दिनों तक पानी में डूबे रहने से धान के पौधे गलने लगे हैं और फसल खराब हो रही है। विजय कुमार भारतीय और राकेश कुमार भारतीय समेत कई किसानों की धान की खेती जलमग्न हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी का बहाव इतना तेज है कि खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। किसानों ने धान की रोपाई और खाद जैसे कृषि कार्यों में काफी खर्च किया है।
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किसानों ने बताया कि समय रहते पानी नहीं निकला तो बची हुई फसल भी पूरी तरह नष्ट हो सकती है। जलभराव के कारण किसानों को फसल के साथ खेती में लगी लागत का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मौके पर फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है। साथ ही, नदी और खेतों के पानी की निकासी की व्यवस्था करने को कहा है। प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है।
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