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Prayagraj News: मलमास खत्म, 19 अप्रैल से फिर गूंजेगी शहनाई
Thu, 16 Apr 2026 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 16 Apr 2026 02:22 AM IST
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ग्रहों के राजा सूरज के 14 अप्रैल को मेष राशि में आने के साथ ही खरमास समाप्त हो गया। अब विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण और गृह प्रवेश जैसे आयोजन एक बार फिर शुरू होंगे। इस सीजन का पहला विवाह मुहूर्त 19 अप्रैल को है।
पंडित गोपाल देवाचार्य महाराज ने बताया कि भगवान सूर्य 14 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे मेष राशि में प्रवेश कर गए। मेष राशि का स्वामी मंगल अश्वनी नक्षत्र और इसके स्वामी केतु हैं। ऐसे में मलमास समाप्त हो गया और अब मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। जब तक सूरज मीन राशि में रहता है, शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। अब 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ ही यह अवधि पूरी हो गई और 16 संस्कार व अन्य शुभ काम किए जा सकेंगे।
इस सीजन में शादियों की शुरुआत 19 अप्रैल के अक्षय तृतीया के अमृत मुहूर्त से हो रही है। इस अवसर पर जो लोग नए घर में प्रवेश या वाहन, स्वर्ण आभूषण खरीदना चाहते हैं, उनके लिए 16 मई तक का समय सबसे फलदायी है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र कुमार शुक्ला का कहना है कि 14 अप्रैल से चातुर्मास के प्रारंभ तक मांगलिक कार्य होंगे। बीच में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास की वजह से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य पर अंकुश रहेगा। फिर 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा। यह 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में भी शुभ कार्य नहीं होंगे। 20 नवंबर के बाद तुलसी विवाह के साथ ही दोबारा शहनाइयां गूंजेंगी।
विवाह के 39 रहेंगे शुभ मुहूर्त
अप्रैल : 19, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29
मई : 1,3,5,6,7,8,13,14
जून : 21,22, 23, 24, 25,26, 27 और 29
जुलाई : एक, छह, सात और 11
नवंबर : 21, 24 , 25 और 26
दिसंबर : 2,3,4,5,6,11 और 12
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पंडित गोपाल देवाचार्य महाराज ने बताया कि भगवान सूर्य 14 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे मेष राशि में प्रवेश कर गए। मेष राशि का स्वामी मंगल अश्वनी नक्षत्र और इसके स्वामी केतु हैं। ऐसे में मलमास समाप्त हो गया और अब मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। जब तक सूरज मीन राशि में रहता है, शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। अब 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ ही यह अवधि पूरी हो गई और 16 संस्कार व अन्य शुभ काम किए जा सकेंगे।
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इस सीजन में शादियों की शुरुआत 19 अप्रैल के अक्षय तृतीया के अमृत मुहूर्त से हो रही है। इस अवसर पर जो लोग नए घर में प्रवेश या वाहन, स्वर्ण आभूषण खरीदना चाहते हैं, उनके लिए 16 मई तक का समय सबसे फलदायी है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र कुमार शुक्ला का कहना है कि 14 अप्रैल से चातुर्मास के प्रारंभ तक मांगलिक कार्य होंगे। बीच में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास की वजह से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य पर अंकुश रहेगा। फिर 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा। यह 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में भी शुभ कार्य नहीं होंगे। 20 नवंबर के बाद तुलसी विवाह के साथ ही दोबारा शहनाइयां गूंजेंगी।
विवाह के 39 रहेंगे शुभ मुहूर्त
अप्रैल : 19, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29
मई : 1,3,5,6,7,8,13,14
जून : 21,22, 23, 24, 25,26, 27 और 29
जुलाई : एक, छह, सात और 11
नवंबर : 21, 24 , 25 और 26
दिसंबर : 2,3,4,5,6,11 और 12