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मैनपुरी की छात्रा की मौत का मामला : हाईकोर्ट ने लौटाई एसआईटी की सीलबंद जांच रिपोर्ट

Mon, 26 Sep 2022 10:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 26 Sep 2022 10:04 PM IST
सार

कोर्ट ने यह आदेश महेंद्र सिंह की जनहित याचिका पर पारित किया है। सोमवार को याची की ओर से अनुरोध किया गया कि वह सांस का मरीज है और वृद्ध हो चुका है। इस नाते इस केस की सुनवाई पूरी कर न्याय किया जाए।

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Mainpuri student's death case: High Court returned sealed investigation report of SIT
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व  न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की खंडपीठ मैनपुरी की 16 वर्षीय स्कूली छात्रा की मौत मामले में अब 14 नवंबर को सुनवाई करेगी। इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने दो बंद लिफाफों में जांच की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की। कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट को देखने के बाद पुन: इसे सील कर वापस करने का आदेश दिया। याची का कहना था कि एसआईटी असली दोषी को बचा रही है।

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कोर्ट ने यह आदेश महेंद्र सिंह की जनहित याचिका पर पारित किया है। सोमवार को याची की ओर से अनुरोध किया गया कि वह सांस का मरीज है और वृद्ध हो चुका है। इस नाते इस केस की सुनवाई पूरी कर न्याय किया जाए। याची का कहना था कि मैनपुरी के नवोदय विद्यालय में 16 वर्षीय स्कूली छात्रा की मौत हो गई। मौत कैसे हुई आज तक इसका पता नहीं चल सका। कहा गया कि लड़की की मां ने अपने बयान में एक मंत्री के बेटे का नाम लिया है।

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याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने भी कोर्ट में पक्ष रखा और कहा कि एसआईटी का गठन 15 जुलाई 2021 को हुआ, जिसमें सात अधिकारियों को शामिल किया गया था। कहा गया कि एडिशनल एसपी रैंक के जिस अधिकारी ज्ञानेंद्र प्रसाद ने आरोप पत्र दाखिल किया है। वह उन सात अधिकारियों में शामिल नहीं थे। 


बहस की गई कि आरोपी सुषमा सागर की धारा 302, 376, 511 व पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तारी की गई थी। अब आरोप पत्र में उसके खिलाफ  सब धाराएं हटाकर केवल 306 लगाई गई है और इस कारण आरोपी की जमानत भी हो गई। कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट जनवरी 22 में दाखिल हो गई है और इस एसआईटी अभी भी जांच कर रही है। वहीं सरकार की तरफ  से नियुक्त विशेष अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी का कहना था कि एसआईटी जांच में शामिल सात अधिकारियों के नाम को बढ़ाकर टीम के सदस्यों की संख्या 11 कर दी गई थी और उसमें एडिशनल एसपी ज्ञानेंद्र प्रसाद का नाम शामिल है। कहा गया कि जांच अधिकारी ने अपनी पूरी क्षमता व ज्ञान के साथ जांच पूरी की है।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल को तलब किया था। कोर्ट के रुख को देखते हुए पूर्व डीजीपी ने एडिशनल एसपी, पुलिस क्षेत्राधिकारी व अन्य पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर जांच बैठा दी थी। कोर्ट ने लड़की के माता-पिता को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दे रखा है।

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