Mahakumbh : अघोरी बने इटली के एलेस्सो, कहा-मोक्ष के लिए आया, सनातन के लिए अमेरिका से आईं खेप और आइसलैंड से आस
एलेस्सो का कहना है कि अब उनका मन इटली में नहीं लगता। जीवन पश्चिमी संस्कृति की आधुनिकता और तकनीकी सुविधाओं से भरा हुआ था। लेकिन, जीवन में शांति नहीं थी। इसीलिए, वह भारत आते रहते हैं। कुछ वर्ष पूर्व वह भारत आए। साधु-संतों के जीवन पर गहराई से अध्ययन किया और धीरे-धीरे खुद इस जीवनशैली के करीब होते गए।
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गोरा चिट्टा शरीर। छह फीट से ज्यादा लंबाई। शरीर पर कई जगह आभूषण पहनने के लिए बनवाए गए छेद (पियर्सिंग) हैं। भभूत से चमकता चेहरा। कमर में बंधा मग। सिर पर बड़ा सा जूड़ा। गले में रुद्राक्ष समेत कई मालाएं। ऐसी वेश-भूषा बना रखी है इटली के रहने वाले एलेस्सो ने। वह अघोरी बन गए हैं। नाम है, भाषनाथ। वह कहते हैं, एक वर्ष से सभी बुरी आदतों से दूर हूं। एलेस्सो का कहना है कि अब उनका मन इटली में नहीं लगता। वहां उनके पास अच्छी नौकरी थी। उनकी मानें तो करीब तीस गर्लफ्रेंड थीं। उनका जीवन पश्चिमी संस्कृति की आधुनिकता और तकनीकी सुविधाओं से भरा हुआ था। लेकिन, जीवन में शांति नहीं थी। इसीलिए, वह भारत आते रहते हैं। कुछ वर्ष पूर्व वह भारत आए। साधु-संतों के जीवन पर गहराई से अध्ययन किया और धीरे-धीरे खुद इस जीवनशैली के करीब होते गए। अब उनका मन यहीं लगता है। आपको बता दें कि अघोर पंथ भारतीय तांत्रिक परंपरा का हिस्सा है, जो शिव की आराधना पर आधारित है। यह पंथ मृत्यु, मोक्ष और आत्मज्ञान को समझने का मार्ग प्रदान करता है।
महाकुंभ की ऐतिहासिकता और सनातन संस्कृति जानने पहुंचीं खेप और आई आस
कई देशों से महाकुंभ की ऐतिहासिक, धार्मिकता और सनातन संस्कृति का जानने के लिए विदेशी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अमेरिका से आईं खेप और आइसलैंड से आईं आई आस सनातन संस्कृति से रूबरू होने के लिए संगमनगरी पहुंचीं। आई आस के मुताबिक महाकुंभ दुनिया का अनोखा उत्सव है। वहीं, खेप ने तो काली माता के नाम पर ही अपनी कंपनी का नाम मां काली रखा है। अमेरिका में मानसिक हेल्थ से जुड़े प्रोडक्ट का उत्पादन करने वाली कंपनी की सीईओ खेप पिछले एक सप्ताह से भारत भ्रमण पर हैं। अयोध्या, वाराणसी भ्रमण के बाद वह महाकुंभ में पहुंची हैं। दो बच्चियों की मां खेप ने बताया कि वह भारत में एक महीने रहेंगी। इस दौरान वह कई जगहों पर जाएंगी। वह मां काली को मानती हैं। उन्होंने अपनी कंपनी का नाम भी मां काली के नाम पर रखा है। उन्होंने बताया कि महाकुंभ को जानने-समझने की जिज्ञासा उनके मन में लंबे समय से थी। वैसे वर्ष 2011 में भी वह भारत आ चुकी हैं। लेकिन, इस बार महाकुंभ का पर्व उनके जीवन का खास पल है।
ताइवान में भी अमृत स्नान की ललक
मंदारिन, ताइवानी, हक्का और फॉर्मोसन जैसी भाषा बोलने वाले ताइवान में भी अमृत स्नान की ललक है। यहां के यूट्यूबर अमृत स्नान को कवर करने आए हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट पर सर्च के दौरान इसकी जानकारी मिली। वे एक सप्ताह तक वीडियो शूट किए हैं। घर लौटकर इन्हें अपलोड करेंगे।