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Mahakumbh 2025: अखाड़ों का जाना जारी, एक ऐसी पहचान जो उनका मेले में होने या न होने का है सबूत

Vikrant Chaturvedi विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 14 Feb 2025 09:32 PM IST
सार

तीनों शाही स्नान के होने के बाद कुंभनगरी से अब अखाड़ों के जाने का सिलसिला जारी है। जब आप सेक्टर 19 और 20 की तंबुओं की गलियों से गुजरते हैं तो आपको इसका अहसास हो जाता है। ऐसे में कई अखाड़े ऐसे भी देखे जहां कुछ साधु-संन्यासी तो हैं लेकिन कुछ चले गए। ऐसे में मन में सवाल आया कि यह कब और कैसे माना जाता है कि कोई अखाड़ा मेले में है या नहीं?

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Mahakumbh 2025 Akharas continue to leave an identity that is proof of their presence or absence in fair
महाकुंभ 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस संबंध में एक सहयोगी के माध्यम से महंत राजूदास से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो सबसे बड़ा प्रतीक होता है वह है अखाड़े की धर्मध्वजा। किसी अखाड़े की सही पहचान अगर आप करना चाहते हैं तो उनके ध्वज को देखना चाहिए, इससे आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि यह अखाड़ा किससे संबंध रखता है। जैसा कि उन्होंने बताया कि जो मुख्य अखाड़े होते हैं उनकी धर्मध्वजा 52 हाथ लंबी होती है। यह अखाड़े की शान का सबसे बड़ा प्रतीक होती है और इसके सम्मान के लिए कुछ भी किया जा सकता है। 

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अखाड़े की धर्मध्वजा - फोटो : अमर उजाला

इसे लगाने और निकालने की एक विधिवत प्रक्रिया होती है। धर्मध्वजा लगाने के पहले अखाड़े अपने इष्टदेव की पूजा करते हैं। कोई अखाड़ा भगवान शिव को मानता है तो कोई काली को और कोई भगवान हनुमान को। यह पूजा भी उसी के अनुसार होती है। पूजा संम्पन्न होने के बाद धर्मध्वजा को ऊपर कर दिया जाता है। ठीक इसी प्रक्रिया को धर्म ध्वजा को उतारते समय भी किया जाता है।

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अखाड़ा - फोटो : अमर उजाला

अखाड़े लिए धर्मध्वजा उनके गुरु का प्रतीक है। इसके जरिए वो समाज को इष्टदेव, मान और शक्ति का संदेश देते है। इनमें रंगों का भी एक अपना महत्व और स्थान होता है। अखाड़ों की ध्वजा चारों दिशाओं में 4 रस्सियों पर खड़ी की जाती है। किसी भी परिस्थिति में धर्मध्वजा का झुकना अखाड़ों द्वारा अस्वीकार्य होता है। प्रतीक और रंगों की बात की जाए तो, दिगंबर अनी अखाड़े की धर्मध्वजा पंच रंगों की होती है। निर्मोही अनी अखाड़े की ध्वजा सुनहरी होती है। निर्वाणी अनी अखाड़े की ध्वजा लाल रंग की होती है और पंचायती अखाड़े की ध्वजा मोरपंख वाली होती है।

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सामान समेट के जाते अखाड़े - फोटो : अमर उजाला

इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अगर कुंभ मेले में लगी किसी भी अखाड़े की धर्मध्वजा को उतार लिया जाता है तो इसका मतलब साफ होता है कि वह अखाड़ा अब मेले से प्रस्थान कर चुका है। अगर आप टेंट खाली होने की बाद भी धर्मध्वजा को वहां लगा हुआ देखते हैं तो साफ मतलब है कि अखाड़े की ओर से इस बात की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि वह मेले से प्रस्थान कर चुके हैं।

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