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Mahakumbh: इटली के जॉर्ज-सफीना ने किया 12 साल इंतजार, अमृत स्नान का साक्षी बनने के लिए भक्तों में दिखी बेकरारी
Wed, 15 Jan 2025 02:31 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 15 Jan 2025 02:31 PM IST
सार
त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय आस्था का महापर्व बन गया। ठंड और कोहरे से लिपटा त्रिवेणी का तट ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सृष्टि ने खुद को इस अद्वितीय आयोजन के स्वागत में संवार लिया हो।
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Mahakumbh
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इटली के एक दंपती ने महाकुंभ के लिए 12 साल का इंतजार किया। मंगलवार को मकर संक्रांति पर पहुंचकर संगम में डुबकी लगाई। पूछने पर उन्होंने कहा कि यहां का जो अनुभव है, उसे शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है। बस इतना ही कह सकते हैं कि यह अकल्पनीय है।
इटली से आए जॉर्ज और उनकी पत्नी सफीना इटली के मिलान शहर के रहने वाले हैं। जॉर्ज पेशे से आर्किटेक्ट व उनकी सफीना मेडिकल प्रोफेशनल हैं। संगम घाट पर अमृत स्नान के लिए जाते संतों को एकटक निहारते जाॅर्ज ने बताया कि वह पहली बार महाकुंभ में आए हैं। मिलान में ही रहने वाले उनके एक दोस्त ने उन्हें महाकुंभ के बारे में बताया था।
एक बार 2019 में भी आने को सोचा, लेकिन फिर पता चला कि यह अर्धकुंभ है। वह देखना चाहते थे कि हजारों साल पुरानी अपनी धार्मिक धरोहर को सहेजने का त्योहार करोड़ों लोग एक जगह पर जमा होकर कैसे मनाते हैं। पत्नी सफीना भी महाकुंभ में आने के लिए बेहद उत्साहित थीं।
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यहां आकर कैसा लगा, इस सवाल पर जॉर्ज ने कहा कि यह अकल्पनीय है। उन्होंने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा। यह भी कहा कि कोशिश रहेगी कि अगले महाकुंभ में भी वह शामिल हो सकें। यह भी बताया कि पांच दिन पहले वह प्रयागराज आए थे और अब यहां वाराणसी जाएंगे।
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इटली से आए जॉर्ज और उनकी पत्नी सफीना इटली के मिलान शहर के रहने वाले हैं। जॉर्ज पेशे से आर्किटेक्ट व उनकी सफीना मेडिकल प्रोफेशनल हैं। संगम घाट पर अमृत स्नान के लिए जाते संतों को एकटक निहारते जाॅर्ज ने बताया कि वह पहली बार महाकुंभ में आए हैं। मिलान में ही रहने वाले उनके एक दोस्त ने उन्हें महाकुंभ के बारे में बताया था।
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एक बार 2019 में भी आने को सोचा, लेकिन फिर पता चला कि यह अर्धकुंभ है। वह देखना चाहते थे कि हजारों साल पुरानी अपनी धार्मिक धरोहर को सहेजने का त्योहार करोड़ों लोग एक जगह पर जमा होकर कैसे मनाते हैं। पत्नी सफीना भी महाकुंभ में आने के लिए बेहद उत्साहित थीं।
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यहां आकर कैसा लगा, इस सवाल पर जॉर्ज ने कहा कि यह अकल्पनीय है। उन्होंने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा। यह भी कहा कि कोशिश रहेगी कि अगले महाकुंभ में भी वह शामिल हो सकें। यह भी बताया कि पांच दिन पहले वह प्रयागराज आए थे और अब यहां वाराणसी जाएंगे।
अमृत स्नान का साक्षी बनने को श्रद्धालुओं में दिखी बेकरारी
त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय आस्था का महापर्व बन गया। ठंड और कोहरे से लिपटा त्रिवेणी का तट ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सृष्टि ने खुद को इस अद्वितीय आयोजन के स्वागत में संवार लिया हो।
त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय आस्था का महापर्व बन गया। ठंड और कोहरे से लिपटा त्रिवेणी का तट ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सृष्टि ने खुद को इस अद्वितीय आयोजन के स्वागत में संवार लिया हो।
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की धाराओं का मिलन स्थल दिव्यता का ऐसा केंद्र बन गया, जहां हर सांस में श्रद्धा और हर पल में ऊर्जा का संचार हो रहा था। आंखों में सूरमा, भस्म से लिपटा तन, जटाजूट की वेणी और हाथों में त्रिशूल व डमरू लिए नागा साधुओं का दृश्य मानो युगों पुरानी कहानियों को जीवंत कर रहा था।
त्रिवेणी के तट पर ये साधु किसी देवदूत की तरह प्रतीत हो रहे थे, जो अपनी तपस्या और आस्था के साथ इस अद्वितीय स्नान के लिए तैयार थे। मकर संक्रांति के अमृत स्नान पर मंगलवार की सुबह संगम पर एकाएक भीड़ जुटनी शुरू हो गई।
बम-बम भोले के उद्घोष
इनमें चादरों में लिपटे, आंखों में उम्मीद लिए घाट के किनारे बड़ी संख्या में लोग बैठे थे। उनके लिए यह इंतजार एक साधना जैसा था। बम-बम भोले के उद्घोष और नावों का साया मानो इस आस्था के संग सफर में साथी बनने का वादा कर रहे थे।
इनमें चादरों में लिपटे, आंखों में उम्मीद लिए घाट के किनारे बड़ी संख्या में लोग बैठे थे। उनके लिए यह इंतजार एक साधना जैसा था। बम-बम भोले के उद्घोष और नावों का साया मानो इस आस्था के संग सफर में साथी बनने का वादा कर रहे थे।
हर चेहरा एक कहानी कह रहा था, और हर निगाह उस पल का हिस्सा बनने के लिए बेकरार थी। जैसे ही मकर संक्रांति की पहली किरण ने संगम को छुआ, घाट पर आस्था का समुद्र उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाकर पवित्र स्नान किया। इनमें न केवल भारत बल्कि दुनियाभर से आए श्रद्धालु भी शामिल थे।