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फूड सप्लीमेंट के दाम हुए कम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Jan 2018 01:09 AM IST
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जीएसटी
केंद्र सरकार की निगरानी का असर रहा कि जीएसटी लागू होने के बाद फूड सप्लीमेंट की पहली सस्ती खेप दवा बाजार में पहुंची है। दवा की दुकानों पर बिकने वाले कुछ चुनिंदा फूड सप्लीमेंट पर सरकार ने टैक्स की दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है। वहीं 18 से 28 फीसदी वाले स्लैब को ही समाप्त कर दिया। अब कंपनियों की बिक्री दर वही रहेगी लेकिन टैक्स में कमी का लाभ लोगों को मिलेगा। इस निर्णय के बावजूद पहले बाजार में मौजूद स्टाक खपने तक स्थिति पहले जैसी ही रहेगी।
जीएसटी में दवाओं के स्लैब में संशोधन से कुछ दवाओं और फूड सप्लीमेंट पर टैक्स की दर 12 घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही इससे च्यवनप्राश, बोनवीटा, हॉर्लिक्स, शुगरफ्री गोली आदि के दाम कम हुए हैं। बुधवार को बाजार में घटी दरों पर फूड सप्लीमेंट की पहली खेप लीडर रोड के दवा बाजार में पहुंची है। फूड सप्लीमेंट के थोक व्यवसायी मनोज रस्तोगी के मुताबिक सरकार के निर्णय और निर्देश के काफी बाद कंपनियों ने फिलहाल कुछ उत्पादों की एमआरपी कम की है।
उत्पाद का नाम- पहले का दाम- टैक्स दर घटने के बाद का मूल्य
च्वयनप्राश----305 रुपये----- 295 रुपये
हॉर्लिक्स-----230 रुपये------215 रुपये
बोनवीटा----237 रुपये------215 रुपये
शुगर फ्री----180 रुपये------170 रुपये
(300 गोली)
जीएसटी में दवाओं पर टैक्स के चार स्लैब निर्धारित किए गए थे, अब इनकी संख्या तीन ही रह गई है। सरकार ने आम लोगों के अधिकांश उपयोग में आने वाली दवाओं और फूड सप्लीमेंट पर टैक्स की दरें संशोधित कर दी हैं। अब यह स्लैब 12 से 18 प्रतिशत होगी। साफ है कि लोगों को टैक्स में कमी के बाद 10 से 16 प्रतिशत तक का लाभ होगा। फिलहाल दवाओं पर 0से5,5 से 12 और 12 से18 प्रतिशत टैक्स के तीन स्लैब लागू हैं। मरीजों के लिए जरूरी और हल्की या गंभीर बीमारियों में प्रयुक्त होने वाली करीब 60 फीसदी दवाएं 12 से 18 प्रतिशत वाले स्लैब में हैं। 18 से 28 वाले स्लैब में 40 फीसदी दवाएं हैं। 0 से 5 की श्रेणी में आने वाली दवा उत्पादों की संख्या बहुत कम है। हालांकि दवाओं का मूल्य ड्रग प्राइज एक्ट(डीपीए) के तहत निर्धारित करने का अधिकार सरकार के पास है। वहीं डीपीए से बाहर श्रेणी की दवाओं की कीमत निर्माता कंपनी ही निर्धारित करती हैं। इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महासचिव परमजीत सिंह के मुताबिक दवाओं की दरें सरकार और एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) निर्देशों के अनुरूप कंपनियां तय करती हैं। टैक्स की दरों में संशोधन का लाभ लोगों को दिया जा रहा है।
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दवाओं को निर्धारित कीमत से अधिक मूल्य पर न बेचा जाए। अधिक दाम पर दवाओं की बिक्री करने की शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो दवा विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गोविंद लाल गुप्ता, ड्रग इंसपेक्टर
0 मधुमेह, रक्तचाप, आर्थराइटिस, थायरायड जैसी बीमारियों में दी जाने वाली दवाएं महंगी हो गई हैं। इस तरह की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को दवाओं की हर दिन नियमित खुराक लेनी होती है। दवा मूल्य में बढ़ोत्तरी जनता पर बोझ है।
- डॉ. आरएन पांडेय, वृद्धा रोग विशेषज्ञ (जेरायटिक फिजीशियन), एसआरएन अस्पताल
0 सरकार को दवाओं के मूल्य निर्धारण के लिए जल्द कदम उठाना चाहिए। कंपनी या दवा विक्रेता की मनमानी बंद हो। सरकार इस संबंध में गठित कमेटी में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आईएमए) का प्रतिनिधि भी होना चाहिए। इससे जनता से जुड़ी सही राय अमल में लाई जाएगी तो जनता को राहत मिलेगी।
- डॉ. त्रिभुवन सिंह, सचिव, एएमए
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जीएसटी में दवाओं के स्लैब में संशोधन से कुछ दवाओं और फूड सप्लीमेंट पर टैक्स की दर 12 घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही इससे च्यवनप्राश, बोनवीटा, हॉर्लिक्स, शुगरफ्री गोली आदि के दाम कम हुए हैं। बुधवार को बाजार में घटी दरों पर फूड सप्लीमेंट की पहली खेप लीडर रोड के दवा बाजार में पहुंची है। फूड सप्लीमेंट के थोक व्यवसायी मनोज रस्तोगी के मुताबिक सरकार के निर्णय और निर्देश के काफी बाद कंपनियों ने फिलहाल कुछ उत्पादों की एमआरपी कम की है।
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उत्पाद का नाम- पहले का दाम- टैक्स दर घटने के बाद का मूल्य
च्वयनप्राश----305 रुपये----- 295 रुपये
हॉर्लिक्स-----230 रुपये------215 रुपये
बोनवीटा----237 रुपये------215 रुपये
शुगर फ्री----180 रुपये------170 रुपये
(300 गोली)
जीएसटी में दवाओं पर टैक्स के चार स्लैब निर्धारित किए गए थे, अब इनकी संख्या तीन ही रह गई है। सरकार ने आम लोगों के अधिकांश उपयोग में आने वाली दवाओं और फूड सप्लीमेंट पर टैक्स की दरें संशोधित कर दी हैं। अब यह स्लैब 12 से 18 प्रतिशत होगी। साफ है कि लोगों को टैक्स में कमी के बाद 10 से 16 प्रतिशत तक का लाभ होगा। फिलहाल दवाओं पर 0से5,5 से 12 और 12 से18 प्रतिशत टैक्स के तीन स्लैब लागू हैं। मरीजों के लिए जरूरी और हल्की या गंभीर बीमारियों में प्रयुक्त होने वाली करीब 60 फीसदी दवाएं 12 से 18 प्रतिशत वाले स्लैब में हैं। 18 से 28 वाले स्लैब में 40 फीसदी दवाएं हैं। 0 से 5 की श्रेणी में आने वाली दवा उत्पादों की संख्या बहुत कम है। हालांकि दवाओं का मूल्य ड्रग प्राइज एक्ट(डीपीए) के तहत निर्धारित करने का अधिकार सरकार के पास है। वहीं डीपीए से बाहर श्रेणी की दवाओं की कीमत निर्माता कंपनी ही निर्धारित करती हैं। इलाहाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महासचिव परमजीत सिंह के मुताबिक दवाओं की दरें सरकार और एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) निर्देशों के अनुरूप कंपनियां तय करती हैं। टैक्स की दरों में संशोधन का लाभ लोगों को दिया जा रहा है।
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दवाओं को निर्धारित कीमत से अधिक मूल्य पर न बेचा जाए। अधिक दाम पर दवाओं की बिक्री करने की शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत मिलती है तो दवा विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गोविंद लाल गुप्ता, ड्रग इंसपेक्टर
0 मधुमेह, रक्तचाप, आर्थराइटिस, थायरायड जैसी बीमारियों में दी जाने वाली दवाएं महंगी हो गई हैं। इस तरह की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को दवाओं की हर दिन नियमित खुराक लेनी होती है। दवा मूल्य में बढ़ोत्तरी जनता पर बोझ है।
- डॉ. आरएन पांडेय, वृद्धा रोग विशेषज्ञ (जेरायटिक फिजीशियन), एसआरएन अस्पताल
0 सरकार को दवाओं के मूल्य निर्धारण के लिए जल्द कदम उठाना चाहिए। कंपनी या दवा विक्रेता की मनमानी बंद हो। सरकार इस संबंध में गठित कमेटी में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आईएमए) का प्रतिनिधि भी होना चाहिए। इससे जनता से जुड़ी सही राय अमल में लाई जाएगी तो जनता को राहत मिलेगी।
- डॉ. त्रिभुवन सिंह, सचिव, एएमए