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बाढ़ से 60 करोड़ की फसल को नुकसन

Wed, 25 Sep 2019 01:48 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 25 Sep 2019 01:48 AM IST
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Loss of 60 crores crop due to flood
बाढ़ में डूब गई 60 करोड़ रुपये की फसल
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0 धान और सब्जियों के अलावा कई अन्य फसलों को भारी नुकसान
0 प्रशासन का सर्वे, 24 हजार हेक्टेयर में खेती हुई है बर्बाद
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। बाढ़ की वजह से जिले में करीब 24 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है। इससे 60 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। धान के अलावा सबसे अधिक नुकसान सब्जियों और फूल की खेती करने वाले किसानों को हुआ है। उनकी सैकड़ों हेक्टेयर फसल पानी में डूबकर सड़ गई।
गंगापार के कछारी इलाके में 300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जी की खेती होती है। फाफामऊ, फूलपुर, हथिगहां, कौड़िहार, नवाबगंज, झूंसी, कोतारी, फैज्जुलापुर और हनुमानगंज में लीलापुर कला, लीलापुर खुर्द, कतवारुपुर, दक्षिणी कोटवा, कोलाही, बेलवार, दुबावल, ककरा, तिवारीपुर, पट्टीबैरीशाल आदि क्षेत्रों में सब्जी की खेती किसानों की जीविका का मुख्य आधार है। लौकी, नेनुआ, तरुई, करैली आदि सब्जियों आसपास के जिलों में भी भेजी हैं लेकिन बाढ़ का सबसे अधिक प्रभाव इसी क्षेत्र में रहा। इससे पूरी फसल बर्बाद हो गई है। नवाबगंज के सब्जी उत्पादक राम किशोर का कहना है कि 50 फीसदी क्षेत्र कछार है, जहां सब्जी की अच्छी खेती होती है लेकिन सबकुछ बर्बाद हो गया। हथिगहां के राम आसरे का कहना है कि उन्होंने दो हेक्टयर में सब्जी लगा रखी थी लेकिन, पूरी फसल सड़ गई। मलिकपुर गांव के रामकिशुन का कहना है कि अब उनके सामने जीवन यापन संकट खड़ा हो गया है। इस तरह का संकट सब्जी की खेती पर निर्भर चार हजार से अधिक किसानों के सामने है। यमुनापार के करछना तथा आसपास के क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर परवल की खेती होती है लेकिन बड़े क्षेत्र में फसल बाढ़ की चपेट में आकर सड़ गई।
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करछना, चाका, नैनी, धनुपुर आदि क्षेत्रों में सैकड़ों बीघे में गुलाब, गेंदा समेत अन्य फूलों की भी खेती होती है लेकिन बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। अरैल के किसान नारायण माली का कहना है कि गेंदा के पौधे तो पूरी तरह से सड़ गए। वहीं गुलाब के फूल तोड़े नहीं जा सके। फूल के व्यापारी गुड्डू माली, हरिओम का कहना है कि काफी नुकसान हुआ है। जिला उद्यान अधिकारी प्रतिभा का कहना है कि सब्जी की खेती को काफी नुकसान हुुआ है। फूल की खेती कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होती है। इसलिए बहुत नुकसान नहीं हुआ है लेकिन पानी लग जाने से उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। नुकसान का सर्वे किया जा रहा है।
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बीमा कंपनी के सर्वे में मात्र 9000 हेक्टेयर फसल प्रभावित
0 बाढ़ की वजह से फसल बर्बाद होने तथा नुकसान की भरपाई को लेकर अभी से गतिरोध शुरू हो गया है। नुकसान को लेकर जिला प्रशासन और बीमा कंपनी के सर्वे में भारी अंतर आया है। जिला प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार जिले में 24 हजार हेक्टेयर फसल बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो गई। इसमें धान, फूल, सब्जी, उरद, मूंग, चरी, बाजरा, अरहर आदि फसलें शामिल हैं। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह का कहना है कि फसल बीमा कराने वालों को ही नुकसान की भरपाई हो पाएगी। इनके अलावा अन्य किसानों को आपदा राहत विभाग से मुआवजा दिया जाएगा लेकिन उसकी शर्तें हैं। जिला प्रशासन के समानांतर फसल बीमा करने वाली कंपनी की ओर से भी नुकसान का सर्वे कराया गया है। उसके अनुसार बाढ़ की वजह से नौ हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। अब इसमें से बीमित क्षेत्र कितना है इसका सर्वे अलग से होगा। ऐसे में दो अलग-अलग रिपोर्ट की वजह से बाढ़ पीड़ित किसानों को कितनी राहत मिल पाएगी इसे लेकर अभी से सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि प्रशासन के सर्वे के अनुसार ही किसानों के नुकसान की भरपाई की जाएगी।
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